रिसर्च सेक्टर में बढ़ा महिलाओं का दबदबा, साइंटिफिक रिसर्च में तीसरे नंबर पर भारत

Kaushiki | Aug 10, 2026, 12:35 IST
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Women Researchers India
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भारत के प्राइवेट रिसर्च सेक्टर में महिलाओं की हिस्सेदारी केवल 17.8% है। यह आंकड़ा पब्लिक सेक्टर से काफी पीछे है। हालांकि देश में कुल महिला शोधकर्ताओं की संख्या बढ़ी है। हायर एजुकेशन में महिलाओं की भागीदारी सबसे ज्यादा 36% दर्ज की गई है।

Women Researchers India: विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भारत बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश में नए आविष्कार और रिसर्च लगातार हो रहे हैं। इस पूरी क्रांति में महिला वैज्ञानिकों का बहुत बड़ा योगदान रहा है। लेकिन हाल ही में आई रिपोर्ट ने एक नई चिंता पैदा कर दी है।

देश के प्राइवेट सेक्टर में महिला शोधकर्ताओं की संख्या बहुत कम है। प्राइवेट R&D में महिलाओं की भागीदारी केवल 17.8% ही दर्ज की गई है। ये आंकड़ा पब्लिक सेक्टर और सरकारी लैब के मुकाबले काफी कम है। सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ने यह नया डाटा जारी किया है। आइए इस रिसर्च के बारे में डिटेल से जानें...

women researchers
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प्राइवेट सेक्टर R&D में महिलाएं क्यों हैं पीछे

इस रिपोर्ट का नाम Research and Development Statistics At a Glance 2025-26 है। ये रिपोर्ट हमें भारत में जेंडर डिस्पैरिटी यानी लैंगिक असमानता के बारे में बताती है। एक तरफ जहां कुल रिसर्च वर्कफोर्स में महिलाएं बढ़ रही हैं।

वहीं दूसरी तरफ प्राइवेट कंपनियां इस मामले में काफी पीछे दिखाई दे रही हैं। एक अप्रैल 2024 तक भारत में पांच लाख से अधिक फुल-टाइम रिसर्चर्स थे। इनमें से लगभग 1.5 लाख केवल महिला रिसर्चर काम कर रही हैं। देश के कुल रिसर्च क्षेत्र में महिलाओं का शेयर बढ़कर 29% हो गया है।

साल 2020-21 में यह शेयर केवल 18.6% ही रिकॉर्ड हुआ था। इस तरह पिछले कुछ सालों में महिला वैज्ञानिकों की संख्या में बड़ा सुधार हुआ है। लेकिन सेक्टर वाइज आंकड़े देखने पर एक अलग ही तस्वीर सामने आती है। प्राइवेट इंडस्ट्री इस पूरी लिस्ट में सबसे नीचे के पायदान पर खड़ी है। वहां महिलाओं को काम करने के मौके बहुत कम मिल पा रहे हैं।

किस क्षेत्र में कितना है महिलाओं का योगदान

हायर एजुकेशन के क्षेत्र में महिलाएं (प्राइवेट सेक्टर की नौकरी) सबसे आगे हैं। इस सेक्टर में 36% FTE (Full Time Equivalent) रिसर्चर महिलाएं हैं। इसके बाद स्टेट एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी और स्टेट R&D लैब्स का नंबर आता है। यहां महिलाओं की भागीदारी लगभग 28% दर्ज की गई है।

सेंट्रल गवर्नमेंट की R&D लैब्स में महिलाओं का योगदान 21.9% है। वहीं पब्लिक सेक्टर इंडस्ट्री में यह आंकड़ा 21.2% देखा गया है। लेकिन जब बात प्राइवेट सेक्टर R&D की आती है तो ये गिर जाता है। प्राइवेट सेक्टर में ये संख्या घटकर केवल 17.8% ही रह जाती है।

प्राइवेट सेक्टर में महज 18 महिला रिसर्चर, सरकारी कंपनियों से भी पीछे,  रिपोर्ट में खुलासा - women researchers in indias private rd dst report
प्राइवेट सेक्टर में महज 18 महिला रिसर्चर, सरकारी कंपनियों से भी पीछे, रिपोर्ट में खुलासा - women researchers in indias private rd dst report


रिसर्च लीडरशिप में महिलाओं की स्थिति

केवल रिसर्च करने में ही नहीं बल्कि लीडरशिप में भी बदलाव आया है। महिलाओं की लीडरशिप रोल में भागीदारी धीरे-धीरे काफी बेहतर हुई है। सेंट्रल गवर्नमेंट द्वारा फंडेड प्रोजेक्ट्स में महिला प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर बढ़ी हैं। साल 2000-01 में ये संख्या केवल 13% हुआ करती थी।

साल 2023-24 में ये आंकड़ा बढ़कर 28% तक पहुंच गया है। पिछले दो सालों के आंकड़े और भी ज्यादा उत्साहजनक दिखाई देते हैं। लगभग 30% प्रोजेक्ट्स की कमान अब महिला लीडर्स के हाथों में है।

इससे पता चलता है कि महिलाएं अब बड़े प्रोजेक्ट्स को संभाल रही हैं। वे केवल पार्टिसिपेंट नहीं हैं बल्कि पूरे प्रोग्राम को लीड भी कर रही हैं। यह बदलाव भारतीय विज्ञान के लिए बहुत ही शुभ संकेत माना जा रहा है।

भारत का रिसर्च आउटपुट

भारत सरकार R&D सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए भारी फंड दे रही है। साल 2023-24 में तीन हजार 356 करोड़ रुपए का फंड जारी किया गया था। यह बजट कुल छह हजार 94 विभिन्न रिसर्च प्रोजेक्ट्स के लिए बांटा गया था।

इस फंडिंग का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा शैक्षणिक संस्थानों को मिला है। डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ने इसमें से आधा फंड अकेले दिया। इसके बाद बायोटेक्नोलॉजी विभाग और ICMR ने भी फंड जारी किया है।

आज R&D पर खर्च होने वाले हर सौ रुपए में से 48 रुपए सरकार देती है। वहीं प्राइवेट इंडस्ट्री का योगदान लगभग 45 रुपए के बराबर रहता है। इस भारी निवेश के कारण भारत का रिसर्च आउटपुट बहुत तेजी से बढ़ा है। पिछले एक दशक में साइंटिफिक पब्लिकेशन 2.5 गुना तक बढ़ चुके हैं।

साल 2022 में भारत वैज्ञानिक रिसर्च के मामले में वैश्विक स्तर पर तीसरे नंबर पर रहा। ये देश के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। लेकिन प्राइवेट सेक्टर को महिला शोधकर्ताओं को और ज्यादा मौके देने होंगे। तभी देश का R&D सेक्टर सही मायनों में इंक्लूसिव और मजबूत बन पाएगा।

Reference Links

  • Department of Science and Technology - Research and Development Statistics At a Glance 2025-26

FAQ

  1. भारत के प्राइवेट सेक्टर R&D में कितनी प्रतिशत महिलाएं हैं?
    रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के प्राइवेट सेक्टर R&D में महिलाओं की भागीदारी केवल 17.8% है। यह पब्लिक सेक्टर इंडस्ट्री के 21.2% के आंकड़े से भी काफी पीछे है।
  2. किस सेक्टर में महिला शोधकर्ताओं की संख्या सबसे ज्यादा है?
    हायर एजुकेशन सेक्टर में महिला शोधकर्ताओं की संख्या सबसे अधिक है। यहां लगभग 36% FTE शोधकर्ता महिलाएं हैं। इसके बाद स्टेट R&D लैब्स का नंबर आता है।
  3. वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिक पब्लिकेशन में भारत का क्या स्थान है?
    पिछले एक दशक में भारत के साइंटिफिक पब्लिकेशन 2.5 गुना बढ़े हैं। साल 2022 के आंकड़ों के मुताबिक वैज्ञानिक रिसर्च पब्लिकेशन के मामले में भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।
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