ब्रिटेन लौटाएगा भारत को 500 साल पुरानी मूर्ति, जानें क्या है मामला
Aparajita Priyadarshini | Jun 11, 2024, 15:11 IST
ब्रिटेन लौटाएगा भारत को 500 साल पुरानी मूर्ति
ब्रिटेन ने एक हिंदू संत की 500 साल पुरानी कांस्य मूर्ति भारत को लौटाने पर सहमति जताई है। मूर्ति के लिए ब्रिटेन के संग्रहालय को फॉर्मल रिक्वेस्ट भेजा था, जो नीलामी के जरिए ब्रिटेन के एक संग्रहालय में पहुंची थी।
ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ने एक संत की 500 साल पुरानी कांस्य मूर्ति भारत को लौटाने पर सहमति जताई है। प्रतिमा के बारे में माना जाता है कि यह तमिलनाडु के मंदिर से चुराई गई थी। भारतीय उच्चायोग के दावे के बाद 11 मार्च 2024 को, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की परिषद ने यह फैसला किया है।
विश्वविद्यालय के एशमोलियन संग्रहालय की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया कि 11 मार्च 2024 को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की काउंसिल ने संत तिरुमंकाई अलवर की 16वीं शताब्दी की कांस्य मूर्ति की वापसी के लिए भारतीय उच्चायोग के दावे का समर्थन किया। यह फैसला अब अप्रूवल के लिए चैरिटी आयोग को प्रस्तुत किया जाएगा। oxford university | bronze sculpture
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संत तिरुमंकाई अलवर की 60 सेमी ऊंची प्रतिमा को 1967 में डॉ. जे.आर. बेलमोंट (1886-1981) नामक एक कलेक्टर के कलेक्शन से ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के एशमोलियन संग्रहालय द्वारा ले लिया गया था।
संग्रहालय का कहना है कि पिछले साल नवंबर में एक स्वतंत्र शोधकर्ता ने उसे प्राचीन प्रतिमा की ओरिजिन के बारे में बताया, जिसके बाद उसने भारतीय उच्चायोग को एलर्ट किया।
भारत सरकार ने तमिलनाडु के एक मंदिर से चुराई गई कांस्य मूर्ति के लिए ब्रिटेन के संग्रहालय को फॉर्मल रिक्वेस्ट भेजा था, जो नीलामी के जरिए ब्रिटेन के एक के एक संग्रहालय में पहुंची थी।
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विश्वविद्यालय के एशमोलियन संग्रहालय की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया कि 11 मार्च 2024 को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की काउंसिल ने संत तिरुमंकाई अलवर की 16वीं शताब्दी की कांस्य मूर्ति की वापसी के लिए भारतीय उच्चायोग के दावे का समर्थन किया। यह फैसला अब अप्रूवल के लिए चैरिटी आयोग को प्रस्तुत किया जाएगा। oxford university | bronze sculpture
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रिसर्च से मूर्ति की ओरिजन का पता चला
संत तिरुमंकाई अलवर की 60 सेमी ऊंची प्रतिमा को 1967 में डॉ. जे.आर. बेलमोंट (1886-1981) नामक एक कलेक्टर के कलेक्शन से ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के एशमोलियन संग्रहालय द्वारा ले लिया गया था।
संग्रहालय का कहना है कि पिछले साल नवंबर में एक स्वतंत्र शोधकर्ता ने उसे प्राचीन प्रतिमा की ओरिजिन के बारे में बताया, जिसके बाद उसने भारतीय उच्चायोग को एलर्ट किया।
भारत सरकार ने तमिलनाडु के एक मंदिर से चुराई गई कांस्य मूर्ति के लिए ब्रिटेन के संग्रहालय को फॉर्मल रिक्वेस्ट भेजा था, जो नीलामी के जरिए ब्रिटेन के एक के एक संग्रहालय में पहुंची थी।
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