World Menopause Day: क्या उम्र का असर समझकर आप भी छिपा रही हैं मेनोपॉज का ये बड़ा राज? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

Kaushiki | Oct 18, 2026, 12:02 IST
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भारत में 50% महिलाएं मेनोपॉज के शारीरिक प्रभावों से बिल्कुल अनजान हैं<br>
भारत में 50% महिलाएं मेनोपॉज के शारीरिक प्रभावों से बिल्कुल अनजान हैं

विश्व मेनोपॉज दिवस पर जानिए महिलाओं की सेहत का सच। मेनोपॉज के लक्षण जैसे जोड़ों का दर्द, पसीना आना और चिड़चिड़ापन सामान्य नहीं हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक सही समय पर स्त्री रोग विशेषज्ञ सलाह, संतुलित डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव से इस दौर को आसान बनाया जा सकता है। डॉक्टरों की सलाह है कि दर्द को उम्र का असर मानकर नजरअंदाज न करें।

World Menopause Day 2026: आज 18 अक्टूबर को पूरी दुनिया में विश्व मेनोपॉज दिवस (World Menopause Day) मनाया जाता है। इस बार की थीम क्रॉनिक पेन एट मिडलाइफ रखी गई है। उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं के शरीर में हार्मोन्स का स्तर तेजी से घटता है। एस्ट्रोजन हार्मोन कम होने से हड्डियों और हृदय की सेहत पर असर पड़ता है। लेकिन जानकारी के अभाव में ज्यादातर महिलाएं इन बदलावों को चुपचाप सहती रहती हैं।

ऐसे में समय पर सही जानकारी और डॉक्टर की सलाह से इसे आसान बनाया जा सकता है। जयपुर की स्त्री रोग विशेषज्ञ और मेनोपॉज कंसल्टेंट डॉ. सुनीला खंडेलवाल के मुताबिक, मेनोपॉज के लक्षणों को सहने की जरूरत नहीं है। सही खानपान, व्यायाम और चिकित्सकीय सलाह से महिलाएं स्वस्थ जीवन जी सकती हैं। आइए विश्व मेनोपॉज दिवस के मौके पर इस पूरे मामले को समझते हैं।

इस स्टेज में कितनी महिलाएं शामिल हैं

United Nations Population Fund के मुताबिक, हर साल लगभग 4.7 करोड़ महिलाएं इस स्टेज में आती हैं। साल 2030 तक दुनिया में एक अरब से ज्यादा महिलाएं इस दौर में होंगी।

एक स्टडी के मुताबिक, भारत में 50% महिलाओं को इसके प्रभावों की जानकारी ही नहीं है। वहीं 62% महिलाओं को इसके उपलब्ध ट्रीटमेंट्स के बारे में पता नहीं होता। ये कोई बीमारी नहीं, बल्कि जीवन का एक स्वाभाविक पड़ाव है।

मेनोपॉज के संकेत
मेनोपॉज के संकेत

क्या है मेनोपॉज और इसके संकेत

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, मेनोपॉज 45 से 55 साल की उम्र में होता है। बिना किसी कारण के 12 महीने तक पीरियड्स न आना मेनोपॉज कहलाता है। इसके पहले के समय को पेरिमेनोपॉज या संक्रमणकाल (Perimenopause or Transition Period) कहा जाता है।

इस दौरान पीरियड्स अनियमित होने लगते हैं। रात में अचानक पसीना आना और नींद न खुलना इसके की सिम्पटम्स हैं। बिना वजह गर्मी महसूस होना और स्वभाव में चिड़चिड़ापन आना भी शामिल है। जोड़ों में दर्द, कमर में अकड़न और थकान बनी रहती है। इन संकेतों को उम्र का असर मानकर टालना सही नहीं है।

शरीर और हड्डियों पर पड़ता है असर

मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन घटने से हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। 53 से 56% महिलाएं मांसपेशियों के पुराने दर्द से पीड़ित रहती हैं। 72% से ज्यादा महिलाएं घुटनों के दर्द की शिकायत करती हैं।

इसके अलावा 57% महिलाएं कमर दर्द और रीढ़ की अकड़न से परेशान हैं। 70% से अधिक महिलाओं में विटामिन डी3 और कैल्शियम बहुत कम मिलता है। इससे ऑस्टियोआर्थराइटिस और हड्डियों के टूटने का खतरा बढ़ जाता है।

महिला स्वास्थ्य सलाह
महिला स्वास्थ्य सलाह

कामकाज और अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव

मेनोपॉज का असर केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में मेनोपॉज से जुड़ी समस्याओं से बड़ा नुकसान होता है। हर साल करीब 150 अरब डॉलर यानी 13 लाख करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान अनुमानित है।

जापान में साल 2026 के स्टडी के मुताबिक, 14.65 अरब डॉलर की प्रोडक्टिविटी अफेक्ट हुई। बीमारी के कारण काम से अनुपस्थित रहना और परफॉरमेंस इवेंट इसकी मेन वजह है। कार्यस्थल पर महिलाओं के लिए अनुकूल माहौल होना बहुत जरूरी है।

इन लक्षणों को कभी न करें इग्नोर

  • सुबह उठने पर हाथ-पैर और जोड़ों में तेज अकड़न होना पहला संकेत है।
  • घुटनों, कंधों या कमर में लगातार दर्द बने रहना दूसरा लक्षण है।
  • रात में नींद पूरी न होना और दिनभर थकान महसूस होना तीसरा संकेत है।
  • पहले की तुलना में शारीरिक गतिविधियों में कठिनाई महसूस होना चौथा लक्षण है।
  • दर्द के कारण सीढ़ियां चढ़ने या पैदल चलने में परेशानी होना पांचवां संकेत है।
  • यदि ये समस्याएं बनी रहें तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।

स्त्री रोग विशेषज्ञ की क्या सलाह है

जयपुर की मेनोपॉज कंसल्टेंट डॉ. सुनीला खंडेलवाल के मुताबिक दर्द को सहना हल नहीं है। हार्मोन्स के बदलाव को सही लाइफस्टाइल से नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने महिलाओं के लिए चार सबसे जरूरी आदतों का सुझाव दिया है:

  • रोज थोड़ा पैदल चलने की आदत डालें और हल्का व्यायाम करें।
  • अपनी थाली में कैल्शियम, प्रोटीन और हरी सब्जियां शामिल करें।
  • अपनी नींद को प्राथमिकता दें और तनाव कम करने के लिए योग करें।
  • दर्द को छिपाने की जगह सही समय पर स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लें।

क्या हार्मोन थेरेपी ही एकमात्र रास्ता है

डॉक्टरों के मुताबिक, हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी यानी एचआरटी एक विकल्प है। लेकिन यह हर महिला के लिए उपयुक्त या जरूरी नहीं होती। इसे केवल विशेषज्ञ की सख्त सलाह के बाद ही अपनाना चाहिए।

बिना डॉक्टरी सलाह के कैल्शियम या विटामिन की गोलियां न खाएं। प्राकृतिक धूप, दूध, दही, पनीर, तिल और रागी से कैल्शियम खाएं। सही खानपान और नियमित दिनचर्या से औषधियों की जरूरत कम हो जाती है।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की जरूरत

भारतीय मेनोपॉज सोसायटी की 2026 गाइडलाइन में विशेष सिफारिशें की गई हैं। मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में मेनोपॉज को अधिक जगह मिलनी चाहिए। हैल्थवर्कर्स को इसके लिए स्पेशलाइज्ड ट्रेनिंग दिया जाना जरूरी है।

40 से 60 साल की महिलाओं की स्वास्थ्य जरूरतों पर ध्यान देना चाहिए। अस्पतालों में मेनोपॉज क्लिनिक की सुविधा एक्सपैंड की जानी चाहिए। इससे महिलाओं को सही समय पर प्रॉपर गाइडेंस मिल सकेगा।

परिवार और समाज की जिम्मेदारी

मेनोपॉज के दौरान महिलाओं को मानसिक सहयोग की सबसे ज्यादा ज़रूरत होती है। परिवार के सदस्यों को उनके मूड स्विंग्स को समझना चाहिए। घर में तनावमुक्त और सहानुभूतिपूर्ण माहौल बनाना बहुत जरूरी है।

महिलाओं को अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना सीखना होगा। तकलीफ होने पर चुप रहने के बजाए खुलकर बात करनी चाहिए। समाज में इसके प्रति जागरूकता फैलाना बेहद जरूरी है।

ये खबर क्यों जरूरी है

मेनोपॉज महिला जीवन का एक साधारण और प्राकृतिक पड़ाव है। इससे डरने या घबराने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। सही जानकारी, संतुलित आहार और सकारात्मक सोच से इसे आसान बनाएं।

अपनी सेहत का ध्यान रखें और लक्षण दिखने पर डॉक्टर से मिलें। दर्द में चुप रहने की बजाए समाधान की तरफ कदम बढ़ाएं। आइए इस विश्व मेनोपॉज दिवस पर महिलाओं के स्वास्थ्य का संकल्प लें।

FAQs:

  1. मेनोपॉज क्या है और इसके लक्षण क्या हैं?
    मेनोपॉज 45 से 55 वर्ष की उम्र में होता है जब महिला के शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर घटने लगता है। इसके लक्षणों में अनियमित पीरियड्स, रात में पसीना आना, बिना वजह गर्मी महसूस होना, चिड़चिड़ापन, जोड़ों में दर्द, और थकान शामिल हैं।
  2. क्या मेनोपॉज को सहना आवश्यक है?
    नहीं, मेनोपॉज के लक्षणों को सहना आवश्यक नहीं है। डॉ. सुनीला खंडेलवाल के मुताबिक, सही खानपान, व्यायाम और चिकित्सकीय सलाह से महिलाएं स्वस्थ जीवन जी सकती हैं।
  3. मेनोपॉज के इलाज के लिए हार्मोन थेरेपी जरूरी है क्या?
    हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (एचआरटी) एक विकल्प है, लेकिन यह हर महिला के लिए उपयुक्त नहीं होती। इसे विशेषज्ञ की सलाह के बिना नहीं अपनाना चाहिए।
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