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Latest Religious News: भारत को पर्वों और त्योहारों की पावन भूमि माना जाता है। यहां हर उत्सव के पीछे एक गहरा आध्यात्मिक रहस्य छिपा होता है। ऐसे में माघ माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी को बसंत पंचमी मनाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इसी पावन दिन मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था।
यह पर्व विद्या और ज्ञान की देवी मां सरस्वती को समर्पित है। बसंत पंचमी को नई शुरुआत और ऋतुराज बसंत के आगमन का प्रतीक मानते हैं। इस साल ये उत्सव 23 जनवरी शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा।
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बसंत पंचमी 2026 का शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के मुताबिक, पंचमी तिथि 22 जनवरी को शुरू होगी। तिथि की शुरुआत शाम 06:15 बजे से होने वाली है। इसका समापन 23 जनवरी को रात 08:30 बजे होगा।
उदया तिथि के मुताबिक, इस पर्व को 23 जनवरी को मनाया जाएगा। शुक्रवार के दिन सरस्वती पूजा करना बेहद फलदायी माना जाता है। इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50 से दोपहर 12:40 तक है।
पीला रंग ही क्यों है उत्सव की आत्मा
बसंत पंचमी (Basant Panchami Special) के पावन पर्व पर पीला रंग केवल एक रंग नहीं, बल्कि श्रद्धा और प्रकृति के उल्लास की आत्मा है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, पीला रंग शुद्धता, सादगी और नई ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। ये हमारे मन में सकारात्मक विचार जगाता है।
इस समय प्रकृति भी ऋतुराज बसंत का स्वागत खेतों में सरसों के पीले फूलों की चादर बिछाकर करती है। यह रंग सूर्य के सुनहरे प्रकाश का प्रतिनिधित्व करता है। ये अज्ञानता के अंधेरे को दूर कर ज्ञान का मार्ग दिखाता है।
विद्या की देवी मां सरस्वती को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। इसलिए भक्त इस दिन पीले वस्त्र पहनकर और पीला भोग लगाकर अपनी अटूट श्रद्धा अर्पित करते हैं। यह रंग जीवन में खुशहाली, ज्ञान और वसंत के नए आगमन का सबसे शुभ संकेत है।
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बसंत पंचमी की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की, तो उन्हें चारों ओर सन्नाटा और उदासी महसूस हुई। इस शांति को दूर करने के लिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे एक अद्भुत देवी प्रकट हुईं।
उनके चार हाथ थे—एक में वीणा, दूसरे में पुस्तक, और अन्य दो में माला व वर मुद्रा थी। जैसे ही देवी ने वीणा बजाई, पूरी सृष्टि में मधुर ध्वनि गूंज उठी और हर जीव को वाणी मिल गई। वह देवी मां सरस्वती थीं। चूंकि यह घटना माघ शुक्ल पंचमी को हुई थी, इसलिए इस दिन को बसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है।
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सरस्वती पूजा के लिए जरूरी सामग्री
प्रतिमा और वस्त्र: मां सरस्वती की सुंदर प्रतिमा या तस्वीर और उनके लिए पीला या सफेद वस्त्र।
पीले पुष्प और माला: मां को अत्यंत प्रिय पीले गेंदे के फूल, चमेली या पीले फूलों की माला।
तिलक और सुगंध: पीला चंदन, केसर, हल्दी, अक्षत (चावल) और खुशबूदार अगरबत्ती या धूप।
विशेष नैवेद्य: पीले रंग की मिठाई जैसे बेसन के लड्डू, केसरिया भात (मीठे चावल) या पीली खीर।
ज्ञान के प्रतीक: पूजा के लिए अपनी पुस्तकें, कलम (पेन) और यदि कोई वाद्ययंत्र (गिटार या हारमोनियम) हो तो वह भी।
दीपक और कलश: शुद्ध घी का दीपक, एक कलश, आम के पत्ते और गंगाजल।
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सरस्वती पूजा की पूजा विधि
स्नान और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और शुद्ध पीले वस्त्र धारण कर पूजा का संकल्प लें।
स्थापना: पूजा स्थान को साफ कर वहां मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित करें और साथ में अपनी किताबें और कलम भी रखें।
शुद्धिकरण और तिलक: गंगाजल छिड़क कर स्थान शुद्ध करें, फिर मां को पीला चंदन, हल्दी और केसर का तिलक लगाएं।
पुष्प और दीप अर्पण: मां को पीले फूल अर्पित करें और घी का दीपक जलाकर श्रद्धापूर्वक धूप दिखाएं।
मंत्र और वंदना: 'ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें और 'या कुन्देन्दु तुषारहार धवला' सरस्वती वंदना का पाठ करें।
आरती और वितरण: अंत में मां की आरती उतारें, अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें और सभी में पीला प्रसाद बांटें।
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छात्रों के लिए बसंत पंचमी का विशेष महत्व
छात्रों के लिए बसंत पंचमी (Basant Panchami) का दिन किसी वरदान से कम नहीं है। यह महापर्व पूरी तरह से विद्या, बुद्धि और कला की प्राप्ति को समर्पित है। इस दिन छात्र अपनी लेखनी (पेन), पुस्तकों की विशेष पूजा करते हैं।
इससे उनके भीतर सीखने की शक्ति और एकाग्रता बढ़ती है। धार्मिक मान्यता है कि पीले वस्त्र धारण करने से मानसिक स्पष्टता और आंतरिक शांति मिलती है।
नई शिक्षा (बसंत पंचमी विशेष) या किसी भी कला को सीखने की शुरुआत के लिए यह साल का सबसे सर्वोत्तम (बसंत पंचमी महोत्सव) दिन है। मां सरस्वती की असीम कृपा से छात्रों की वाणी में मधुरता आती है। उन्हें करियर में अपार सफलता प्राप्त होती है।
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बसंत पंचमी पर क्या करें
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और शुद्ध पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
मां सरस्वती की पूजा करें और उनके चरणों में पीले फूल अर्पित करें।
विद्या की प्राप्ति के लिए अपनी पुस्तकों और कलम की भी पूजा करें।
एकाग्रता बढ़ाने के लिए 'ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः' मंत्र का श्रद्धा से जाप करें।
गरीबों या ब्राह्मणों को पीले चावल या पीली वस्तुओं का दान करें।
घर के बड़ों का आशीर्वाद लेकर ही किसी भी नई पढ़ाई की शुरुआत करें।
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बसंत पंचमी पर क्या न करें
भूलकर भी तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन) और मांस-मदिरा का सेवन न करें।
इस पावन दिन पर काले या गहरे रंग के वस्त्र पहनना पूरी तरह वर्जित है।
प्रकृति का अपमान न करें और किसी भी जीव या वृक्ष को नुकसान न पहुंचाएं।
मां सरस्वती की आराधना के दौरान मन में क्रोध या नकारात्मक विचार न लाएं।
आज के दिन किसी को भी अपशब्द न बोलें और वाणी पर संयम रखें।
बिना स्नान किए अपनी किताबों या वाद्ययंत्रों को स्पर्श न करें।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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