दिसंबर 2025 में बन रहा है तीन एकादशी का अद्भुत संयोग, देखें तीनों एकादशी की तारीखें
Kaushiki | Dec 05, 2025, 16:58 IST
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हिंदू पंचांग के अनुसार, दिसंबर 2025 में खरमास के कारण तीन एकादशी (मोक्षदा, सफला, पुत्रदा) का दुर्लभ संयोग बन रहा है। हालांकि इस अवधि में विवाह जैसे मांगलिक कार्य वर्जित रहेंगे...
Latest Religious News: हिंदू पंचांग के मुताबिक, दिसंबर का महीना इस साल धर्म-कर्म के लिहाज से बहुत अद्भुत होने वाला है। इस मास में भक्तों को एक या दो नहीं, बल्कि तीन-तीन एकादशी तिथियों का पवित्र व्रत करने का मौका मिलेगा।
यह दुर्लभ संयोग खरमास के कारण बन रहा है। खरमास की अवधि लगभग 30 दिनों की होती है। इसमें शुभ और मांगलिक कार्यक्रम रुक जाते हैं। पंचांग के मुताबिक खरमास की शुरुआत 16 दिसंबर से हो रही है।
जब सूर्य देव गुरु बृहस्पति देव की राशि धनु या मीन में गोचर करते हैं, तब खरमास लगता है। खरमास की वजह से ही दिसंबर मास में तीन एकादशी व्रत का संयोग बन रहा है।
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एकादशी तिथि (Ekadashi Tithi) को भगवान विष्णु की विशेष तिथि कहा गया है। ये तिथि देवताओं की ऊर्जा का केंद्र मानी जाती है। यह व्रत पापों का नाश करता है और मनुष्य को मोक्षमार्ग की ओर ले जाता है।
इस व्रत से भक्ति-भाव बढ़ता है और मन में सात्त्विकता का संचार होता है। पुराणों में वर्णित है कि एकादशी व्रत करने से हजारों यज्ञों के समान पुण्य फल मिलता है।
यह व्रत करने से व्यक्ति जन्म-मरण के बंधन से मुक्त होकर बैकुंठ धाम की प्राप्ति करता है। एकादशी की रात्रि को सोना नहीं चाहिए, बल्कि पूरी रात श्रीहरि की भक्ति करनी चाहिए। इस व्रत से दरिद्रता, दुर्भाग्य और हर तरह के कष्टों से मुक्ति मिलती है।
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यह दुर्लभ संयोग खरमास के कारण बन रहा है। खरमास की अवधि लगभग 30 दिनों की होती है। इसमें शुभ और मांगलिक कार्यक्रम रुक जाते हैं। पंचांग के मुताबिक खरमास की शुरुआत 16 दिसंबर से हो रही है।
जब सूर्य देव गुरु बृहस्पति देव की राशि धनु या मीन में गोचर करते हैं, तब खरमास लगता है। खरमास की वजह से ही दिसंबर मास में तीन एकादशी व्रत का संयोग बन रहा है।
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एकादशी व्रत का महत्व
इस व्रत से भक्ति-भाव बढ़ता है और मन में सात्त्विकता का संचार होता है। पुराणों में वर्णित है कि एकादशी व्रत करने से हजारों यज्ञों के समान पुण्य फल मिलता है।
यह व्रत करने से व्यक्ति जन्म-मरण के बंधन से मुक्त होकर बैकुंठ धाम की प्राप्ति करता है। एकादशी की रात्रि को सोना नहीं चाहिए, बल्कि पूरी रात श्रीहरि की भक्ति करनी चाहिए। इस व्रत से दरिद्रता, दुर्भाग्य और हर तरह के कष्टों से मुक्ति मिलती है।
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दिसंबर 2025 की तीन एकादशी व्रत तिथियां
- मोक्षदा एकादशी व्रत
यह दिसंबर 2025 की पहली एकादशी थी, जो मार्गशीर्ष महीना के शुक्ल पक्ष में आती है।
यह पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति का दिन है।
यह व्रत पितरों की मुक्ति के लिए बहुत खास माना जाता है।
व्रत तिथि: 1 दिसंबर 2025 सोमवार को थी।
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- सफला एकादशी व्रत
यह दिसंबर की दूसरी एकादशी होगी जो पौष महीना के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि में आती है।
सफला एकादशी का अर्थ है जीवन में हर कार्य में सफलता दिलाना।
इस दिन व्रत रखने से जीवन से निराशा और नकारात्मकता दूर होती है।
व्रत तिथि: 15 दिसंबर 2025, सोमवार। - पौष पुत्रदा एकादशी व्रत
यह दिसंबर की तीसरी एकादशी है, जो पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पड़ती है।
यह एकादशी संतान इच्छुक दंपतियों के लिए बहुत शुभ मानी जाती है, एकादशी पर पूजा।
पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान प्राप्ति और धन-वैभव के लिए उत्तम होता है।
व्रत तिथि: 30 दिसंबर 2025, दिन मंगलवार।
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