सर्वपित्र अमावस्या के साथ पितृ पक्ष का समापन, जानें श्राद्ध करने का सबसे शुभ समय और सूर्य ग्रहण का संयोग
Kaushiki | Sept 18, 2025, 14:34 IST
pitru-paksha-2025-end-date-mahalaya-amavasya
पितृ पक्ष 2025 का समापन 21 सितंबर को महालया अमावस्या के साथ होगा, जिसे सर्वपित्र अमावस्या भी कहते हैं। यह दिन भूले-बिसरे पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने का सबसे शुभ और अंतिम अवसर होता है।
सर्वपित्र अमावस्या:सनातन धर्म में पितृ पक्ष का एक गहरा और पवित्र स्थान है। यह 16 दिनों की वह अवधि होती है जब हम अपने दिवंगत पूर्वजों को याद करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।
यह समय भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन अमावस्या तक चलता है। इस साल पितृ पक्ष की शुरुआत 7 सितंबर 2025 को हुई थी। अब सभी के मन में यह सवाल है कि इस 16-दिवसीय पुण्य काल का समापन कब होगा और क्या है महालया अमावस्या का महत्व? आइए जानें...
![Mahalaya 2025 Date: किस दिन है महालया, जानिए इसका धार्मिक महत्व]()
ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, पितृ पक्ष 2025 (Pitru Paksha)का समापन 21 सितंबर को हो रहा है। यह दिन महालया अमावस्या का होता है जिसे सर्वपित्र अमावस्या भी कहा जाता है।
यह पितरों की तृप्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण और अंतिम तिथि मानी जाती है। जो लोग अपने पितरों की श्राद्ध तिथि को भूल गए हैं, वे इस दिन सभी पूर्वजों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान कर सकते हैं। यह दिन पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करने और उन्हें मोक्ष दिलाने के लिए एक सुनहरा अवसर होता है।
ये खबर भी पढ़ें...पितृ अमावस्या के दिन लगेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, जानें भारत पर क्या होगा इसका असर
![Mahalaya Amavasya 2025: Know Date, Significance & Rituals]()
महालया अमावस्या पर
ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस साल पितृ पक्ष के समापन के साथ ही एक और खगोलीय घटना भी होने जा रही है। 21 सितंबर की रात को साल का आखिरी सूर्य ग्रहण लगेगा।
यह ग्रहण भारतीय समयानुसार रात 10:59 बजे से शुरू होकर 22 सितंबर की सुबह 03:23 बजे तक चलेगा। यह ग्रहण आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को कन्या राशि और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में लगेगा।
ज्योतिष के मुताबिक यह ग्रहण न्यूजीलैंड, फिजी, अंटार्कटिका और ऑस्ट्रेलिया के दक्षिणी भाग में दिखाई देगा। भारत में इस ग्रहण की दृश्यता नहीं होगी इसलिए इसका सूतक काल भी यहां पर मान्य नहीं होगा।
![Mahalaya Amavasya 2025 Date And Time- पितृपक्ष का सबसे महत्वपूर्ण दिन महालया अमावस्या, जानें महत्त्व और तिथि]()
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, महालया अमावस्या को सर्वपित्र अमावस्या या मोक्षदायिनी अमावस्या भी कहते हैं। इस दिन का महत्व कई कारणों से बढ़ जाता है जैसे-
महालया अमावस्या (पितृ मोक्ष अमावस्या)के दिन श्राद्ध और तर्पण करना बहुत ही शुभ माना जाता है। इस दिन आप अपने घर पर ही ये अनुष्ठान कर सकते हैं:
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
क्या कलश स्थापना के बिना अधूरी है नवरात्रि की पूजा, जानें बिना कलश के मां दुर्गा को कैसे करें प्रसन्न
इंदिरा एकादशी पर करें इस चालीसा का पाठ, पितरों को मिलेगी मुक्ति व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
यह समय भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन अमावस्या तक चलता है। इस साल पितृ पक्ष की शुरुआत 7 सितंबर 2025 को हुई थी। अब सभी के मन में यह सवाल है कि इस 16-दिवसीय पुण्य काल का समापन कब होगा और क्या है महालया अमावस्या का महत्व? आइए जानें...
Mahalaya 2025 Date: किस दिन है महालया, जानिए इसका धार्मिक महत्व
पितृ पक्ष 2025 का समापन
यह पितरों की तृप्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण और अंतिम तिथि मानी जाती है। जो लोग अपने पितरों की श्राद्ध तिथि को भूल गए हैं, वे इस दिन सभी पूर्वजों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान कर सकते हैं। यह दिन पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करने और उन्हें मोक्ष दिलाने के लिए एक सुनहरा अवसर होता है।
महालया अमावस्या 2025
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस साल महालया अमावस्या 21 सितंबर 2025, रविवार को पड़ रही है। यह तिथि इस दिन को और भी खास बनाती है। इस दिन का हर क्षण पितरों को समर्पित है लेकिन कुछ विशेष मुहूर्त होते हैं जब श्राद्ध करना सबसे ज्यादा फलदायी माना जाता है। पिंडदान महत्व
महालया अमावस्या 2025 का शुभ मुहूर्त:
- कुतुप मुहूर्त (Kutup Muhurat): सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:38 बजे तक।
- रौहिण मुहूर्त (Rohin Muhurat): दोपहर 12:38 बजे से दोपहर 01:27 बजे तक।
- अपराह्न काल (Aparahan Kaal): दोपहर 01:27 बजे से दोपहर 03:53 बजे तक।
- अमावस्या तिथि प्रारम्भ: 21 सितंबर 2025 को सुबह 12:16 बजे।
- अमावस्या तिथि समाप्त: 22 सितंबर 2025 को सुबह 01:23 बजे।
Mahalaya Amavasya 2025: Know Date, Significance & Rituals
महालया अमावस्या पर सूर्य ग्रहण का संयोग
यह ग्रहण भारतीय समयानुसार रात 10:59 बजे से शुरू होकर 22 सितंबर की सुबह 03:23 बजे तक चलेगा। यह ग्रहण आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को कन्या राशि और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में लगेगा।
ज्योतिष के मुताबिक यह ग्रहण न्यूजीलैंड, फिजी, अंटार्कटिका और ऑस्ट्रेलिया के दक्षिणी भाग में दिखाई देगा। भारत में इस ग्रहण की दृश्यता नहीं होगी इसलिए इसका सूतक काल भी यहां पर मान्य नहीं होगा।
Mahalaya Amavasya 2025 Date And Time- पितृपक्ष का सबसे महत्वपूर्ण दिन महालया अमावस्या, जानें महत्त्व और तिथि
महालया अमावस्या का महत्व
- अंतिम श्राद्ध तिथि: यह पितृ पक्ष की आखिरी तिथि होती है, जब पितर अपने वंशजों से अंतिम विदाई लेते हैं। इस दिन श्राद्ध करने से पितर प्रसन्न होते हैं और अपना आशीर्वाद देते हैं।
- भूले-बिसरे पितरों का श्राद्ध: यदि किसी व्यक्ति को अपने पूर्वजों की मृत्यु की तिथि याद नहीं है, तो वह इस दिन सभी पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान कर सकता है।
- पितरों की तृप्ति: इस दिन किया गया श्राद्ध, तर्पण और ब्राह्मण भोजन पितरों की आत्मा को तृप्त करता है।
- मां दुर्गा का आगमन: इस दिन पितृ पक्ष समाप्त होता है और इसके ठीक अगले दिन से शारदीय नवरात्रि का पर्व शुरू होता है, जिसे मां दुर्गा के आगमन का प्रतीक माना जाता है।
कैसे करें अनुष्ठान
- स्नान: सबसे पहले सुबह उठकर पवित्र स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
- तर्पण: दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अपने पितरों को जल अर्पित करें। इसके लिए एक पात्र में जल, काले तिल, दूध, कुश और जौ मिलाएं और पितरों का नाम लेते हुए 'ॐ पितृभ्य: नम:' मंत्र का जाप करें।
- पिंडदान: चावल और जौ से बने पिंड बनाकर पितरों को अर्पित करें।
- ब्राह्मण भोजन: किसी योग्य ब्राह्मण या जरूरतमंद को अपने पितरों के नाम से भोजन कराएं।
- दान: अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र और अन्य चीजें दान करें।
- गाय को भोजन: एक रोटी या भोजन का कुछ हिस्सा गाय, कौवा, कुत्ता, चींटी और पक्षियों के लिए भी निकालें।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
FAQ
- महालया अमावस्या का पितृ पक्ष में क्या महत्व है?
महालया अमावस्या को सर्वपित्र अमावस्या भी कहा जाता है, जो पितृ पक्ष का अंतिम दिन होता है। यह दिन उन सभी पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है। इस दिन श्राद्ध करने से सभी पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। - क्या महालया अमावस्या 2025 को भारत में सूर्य ग्रहण का सूतक काल लगेगा?
नहीं, महालया अमावस्या 2025 पर लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए, भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। इसका मतलब है कि आप सभी धार्मिक अनुष्ठान और दैनिक कार्य बिना किसी बाधा के कर सकते हैं। - महालया अमावस्या पर श्राद्ध करने के लिए सबसे शुभ समय क्या है?
महालया अमावस्या पर श्राद्ध करने के लिए सबसे शुभ समय कुतुप मुहूर्त, रौहिण मुहूर्त, और अपराह्न काल होता है। ये सभी मुहूर्त 21 सितंबर 2025 को दोपहर के समय हैं, जो श्राद्ध के लिए सबसे उत्तम माने गए हैं। इस दौरान किए गए सभी धार्मिक कार्य पितरों को सीधे तृप्ति देते हैं।
क्या कलश स्थापना के बिना अधूरी है नवरात्रि की पूजा, जानें बिना कलश के मां दुर्गा को कैसे करें प्रसन्न
इंदिरा एकादशी पर करें इस चालीसा का पाठ, पितरों को मिलेगी मुक्ति व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय की VC पर सोशल मीडिया पोस्ट से विवाद, यूनिवर्सिटी ने आरोपों को बताया भ्रामक
By Umeshwari Baghel
त्योहार से पहले नहीं हटेंगी स्ट्रीट वेंडर्स की दुकानें, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग बनेगा ढाल, जानें कैसे
By Manya Jain
रूस ने यूक्रेन में भारतीय कारोबारी की दवा फैक्ट्री पर किया ड्रोन हमला, 400 करोड़ का नुकसान
By Ashish Bhardwaj
विधायकों के आलीशान 4 बीएचके फ्लैट का नक्शा तैयार, भूपेश बघेल की योजना को अब मिलेगा आकार
By Arun Tiwari
RBSE ने लिया बड़ा फैसला, अब साल में दो बार होगी दसवीं की परीक्षा, जानें क्या किया गया है बदलाव?
By Jageshwar prasad
कूनो में फिर गूंजी किलकारी: भारत में जन्मी मादा चीता KJP21 ने दिया 5 शावकों को जन्म, देश में चीतों की संख्या 60 पहुंची
By Arohi Raj
संगठित अपराध और ड्रोन तस्करी पर DGP का बड़ा बयान, पुलिसिंग में बढ़ी महिला भागीदारी
By Jyoti Mahender Bhardwaj