घर में सुख-समृद्धि के लिए आज सीता नवमी पर घर लाएं ये शुभ चीजें, बरसेगी माता लक्ष्मी की कृपा
Kaushiki | Apr 24, 2026, 14:42 IST
sita navami
सीता नवमी आज 25 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी। माता सीता का प्राकट्य दिवस धैर्य और मर्यादा की सीख देता है। इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है। आइए जानें...
Latest Religious News: हिंदू धर्म में सीता नवमी का विशेष महत्व बताया गया है। ये पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाते हैं। ये शुभ दिन आज (25 अप्रैल) शनिवार को पड़ रहा है।
माता सीता को शक्ति और सहनशीलता का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भक्त उपवास रखकर माता जानकी की पूजा करते हैं। माता सीता का जीवन हमें मर्यादा का पाठ पढ़ाता है। उनके आशीर्वाद से घर में सुख और समृद्धि आती है।
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रामायण की सबसे सुंदर और दिव्य कथाओं में से एक माता सीता के जन्म की है। मिथिला के राजा जनक धार्मिक और न्यायप्रिय शासक थे। वे लंबे समय से संतान प्राप्ति के लिए यज्ञ और अनुष्ठान कर रहे थे। एक बार राज्य में भीषण अकाल पड़ा, तब ऋषियों ने राजा को स्वयं खेत में हल चलाने का सुझाव दिया।
वैशाख शुक्ल नवमी के दिन जब राजा जनक सोने का हल चला रहे थे, तब हल की नोक (सीत) जमीन में दबे एक धातु के घड़े से टकराई। जब उस घड़े को बाहर निकाला गया, तो उसमें एक तेजस्वनी कन्या मुस्कुरा रही थी।
चूंकि हल की फाल या रेखा को संस्कृत में सीता कहा जाता है, इसलिए इस दिव्य बालिका का नाम सीता रखा गया। धरती से प्रकट होने के कारण उन्हें भूमिजा भी कहा जाता है। राजा जनक ने उन्हें अपनी पुत्री मानकर पालन-पोषण किया, जिससे वे जानकी कहलाईं।
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माता सीता ने राजमहल की सुख-सुविधाओं को सहज ही त्याग दिया। उन्होंने पति (माता सीता और प्रभु श्रीराम) के साथ वन में रहना स्वीकार किया था। लंका की अशोक वाटिका में भी वे अडिग रही थीं। उन्होंने रावण के सामने कभी अपना सिर नहीं झुकाया। उनका चरित्र हमें आत्मसम्मान के साथ जीना सिखाता है। विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने अपना धर्म नहीं छोड़ा। वे आज के समय में हर स्त्री के लिए प्रेरणा हैं।
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ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, इस दिन अनाज और जल का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है।
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माता सीता को शक्ति और सहनशीलता का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भक्त उपवास रखकर माता जानकी की पूजा करते हैं। माता सीता का जीवन हमें मर्यादा का पाठ पढ़ाता है। उनके आशीर्वाद से घर में सुख और समृद्धि आती है।
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मां सीता के जन्म की कथा
वैशाख शुक्ल नवमी के दिन जब राजा जनक सोने का हल चला रहे थे, तब हल की नोक (सीत) जमीन में दबे एक धातु के घड़े से टकराई। जब उस घड़े को बाहर निकाला गया, तो उसमें एक तेजस्वनी कन्या मुस्कुरा रही थी।
चूंकि हल की फाल या रेखा को संस्कृत में सीता कहा जाता है, इसलिए इस दिव्य बालिका का नाम सीता रखा गया। धरती से प्रकट होने के कारण उन्हें भूमिजा भी कहा जाता है। राजा जनक ने उन्हें अपनी पुत्री मानकर पालन-पोषण किया, जिससे वे जानकी कहलाईं।
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त्याग और अटूट मर्यादा की अद्भुत प्रतिमूर्ति
कैसे करें माता सीता की पूजा
- सीता नवमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
- इसके बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर व्रत का संकल्प लें।
- पूजा स्थान पर राम-सीता की सुंदर प्रतिमा स्थापित करें।
- माता जानकी को फल, फूल और नैवेद्य अर्पित करें।
- इस दिन रामचरितमानस का पाठ करना बहुत शुभ होता है।
- अंत में धूप और दीप जलाकर आरती करनी चाहिए।
- माता को सुहाग की सामग्री चढ़ाना बहुत फलदायी होता है।
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दान-पुण्य का मिलता है कई गुना फल
- मिट्टी के बर्तन का दान करने से ग्रह दोष मिटते हैं।
- जरूरतमंदों को दक्षिणा देने से जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है।
- मान्यता है कि इस दिन दान कभी खाली नहीं जाता।
- भक्त अपनी श्रद्धा के मुताबिक, अन्न का वितरण करते हैं।
- इससे परिवार पर माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।
सौभाग्य बढ़ाने के लिए घर लाएं ये शुभ चीजें
- सीता नवमी पर कुछ खास चीजें घर लाना शुभ है।
- आप चांदी के लक्ष्मी चरण घर ला सकते हैं।
- इन्हें मंदिर में स्थापित करने से धन की वृद्धि होती है।
- सुहाग का सामान खरीदकर माता को अर्पित करना चाहिए।
- नया तुलसी का पौधा घर लाना वास्तु दोष मिटाता है।
- दक्षिणावर्ती शंख लाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
- ये वस्तुएं घर में शांति और खुशहाली लेकर आती हैं।
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