कौन थे भक्ति और समानता का संदेश देने वाले महान संत स्वामी रामानुजाचार्य, जानें इनका इतिहास

Kaushiki | Apr 21, 2026, 14:27 IST
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swami ramanujacharya
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रामानुज जयंती 22 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी। स्वामी रामानुजाचार्य ने भक्ति और समानता का मार्ग दिखाया। उन्होंने ऊंच-नीच के भेदभाव को खत्म कर समाज को एकजुट किया।

Ramanujacharya Jayanti 2026: हिंदू धर्म के महान संत स्वामी रामानुजाचार्य की जयंती इस साल 22 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी। उन्होंने समाज में छुआछूत और भेदभाव के खिलाफ एक बड़ी क्रांति की शुरुआत की थी। दक्षिण भारत के श्रीपेरंबुदूर में जन्मे रामानुजाचार्य ने विशिष्टाद्वैत वेदांत के जरिए भक्ति मार्ग को सरल बनाया।

रामानुजाचार्य ने सिखाया कि ईश्वर की भक्ति पर सबका समान अधिकार है। दलितों के लिए मंदिर के द्वार खोलने वाले वे पहले महान सुधारक थे। समाज सुधार और अध्यात्म के उनके अतुलनीय योगदान के कारण उन्हें समानता का पुरोधा माना जाता है। आइए इनके बारे में जानें...

StatueOfEquality : रामानुजाचार्य कौन थे जिनकी 216 फीट ऊंची प्रतिमा हैदराबाद  में बनाई गई है - BBC News हिंदी
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कौन थे स्वामी रामानुजाचार्य

स्वामी रामानुजाचार्य हिंदू धर्म के महान दार्शनिक और संत थे। उनका जन्म दक्षिण भारत के श्रीपेरंबुदूर में सन 1017 में हुआ था। उन्होंने समाज में समानता का संदेश फैलाया था। रामानुजाचार्य ने जाति-पाति के भेदभाव को खत्म किया। उन्होंने ईश्वर की भक्ति को सबसे सरल बताया।

रामानुजाचार्य के बचपन का नाम इलैया पेरुमल था, जिसका अर्थ लक्ष्मण होता है। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज कल्याण और ईश्वर भक्ति में समर्पित किया। वे विशिष्टाद्वैत वेदांत के बहुत बड़े विद्वान थे। उन्होंने सगुण भगवान और प्रेम मार्ग को चुना।

रामानुजाचार्य ने दलितों के लिए मंदिर के द्वार खोले। उन्होंने भक्ति को आम लोगों तक पहुंचाया था। वे गरीब और उपेक्षित लोगों के मसीहा बने। उनके विचार आज भी लाखों लोगों को प्रेरणा देते हैं। इन्हीं महान कार्यों के कारण वे पूजनीय माने गए।

Ramanujacharya Jayanti 2024: Ramanujacharya Ka Jivan Parichay In Hindi Who  Was Ramanujacharya Kaun The know intresting facts about saint ramanujacharya  - कौन थे महान संत रामानुजाचार्य जिनके 1000 साल पूर्व के मूल
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भक्ति आंदोलन में रामानुजाचार्य का योगदान

रामानुजाचार्य के आने से पहले भक्ति को केवल साधन माना जाता था। उन्होंने सिखाया कि भक्ति केवल साधन नहीं बल्कि परम लक्ष्य है। उन्होंने भगवान को एक सगुण और साकार रूप में प्रस्तुत किया।

रामानुजाचार्य के अनुसार ईश्वर से प्रेम का रिश्ता कोई भी बना सकता है। उन्होंने जाति-पाति के कड़े बंधनों को पूरी तरह से तोड़ दिया था। समाज के हर वर्ग के लिए उन्होंने भक्ति के द्वार खोले। इसी कारण उन्हें समानता का सबसे बड़ा पुरोधा भी कहा जाता है।

रामानुजाचार्य का जीवन परिचय – Ramanujacharya Ka Jeevan Parichay
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गुरु यादव प्रकाश की कहानी

रामानुजाचार्य बचपन से ही बहुत कुशाग्र और दयालु स्वभाव के थे। शिक्षा के लिए उन्हें गुरु यादव प्रकाश के पास भेजा गया। गुरु यादव प्रकाश निराकार ईश्वर की कठिन विचारधारा में विश्वास रखते थे। रामानुजाचार्य को ईश्वर का अपमान और रूखी बातें पसंद नहीं थीं। एक बार गुरु ने भगवान की आंखों की गलत व्याख्या की।

रामानुजाचार्य की आंखों से आंसू निकले और उन्होंने सही अर्थ बताया। उन्होंने कहा कि भगवान की आंखें कमल के समान सुंदर होती हैं। इस घटना के बाद गुरु और शिष्य के रास्ते अलग हो गए।

Ramanujacharya created a harmonious society-रामानुजाचार्य ने बनाया  समरसतापूर्ण समाज | Jansatta
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जब साक्षात भगवान ने की रामानुज की रक्षा

गुरु यादव प्रकाश ने रामानुज की बढ़ती लोकप्रियता से ईर्ष्या की थी। उन्होंने रामानुज को मारने के लिए एक गुप्त योजना बनाई थी। यात्रा के दौरान चचेरे भाई गोविंद ने उन्हें समय रहते सचेत किया। रामानुज गहरे जंगल में भाग गए और रास्ता पूरी तरह भूल गए।

तभी भगवान वरदराज और माता लक्ष्मी शिकारी बनकर वहां प्रकट हुए। उन्होंने रामानुज को जंगल पार कराया और कांचीपुरम तक सुरक्षित पहुंचाया। सुबह होने पर वे शिकारी दंपति अचानक ही ओझल हो गए थे। रामानुज समझ गए कि उनके आराध्य ने ही उनकी जान बचाई।

सामाजिक समानता का उदाहरण

रामानुजाचार्य ने समाज को प्रेम और समानता का पाठ स्वयं पढ़ाया। उन्होंने कांचीपूर्ण को अपना गुरु माना जो तथाकथित निचली जाति से थे। ब्राह्मण कुल में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने यह साहस दिखाया।

लोग इस बात पर हैरान थे लेकिन रामानुज अडिग रहे। उन्होंने सिखाया कि भक्ति में कुल नहीं बल्कि भाव प्रधान होता है। यह कदम उस समय के समाज के लिए बहुत बड़ी क्रांति थी। उन्होंने साबित किया कि ईश्वर के चरणों में सब समान हैं।

यमुनाचार्य की तीन अधूरी इच्छाएं

महान संत यमुनाचार्य ने रामानुज को अपना उत्तराधिकारी बनाने का सोचा था। जब रामानुज श्रीरंगम पहुंचे तब तक यमुनाचार्य शरीर त्याग चुके थे। उनके मृत शरीर की तीन उंगलियां उस समय बंद थीं।

समाज सुधारकरामानुज (Ramanujacharya) ने उनकी आत्मा की शांति के लिए तीन प्रतिज्ञाएं लीं। उन्होंने भक्ति का प्रचार करने और वेदांत पर टीका लिखने का वादा किया। जैसे-जैसे वे प्रतिज्ञा लेते गए, उंगलियां अपने आप खुलती गईं। इसके बाद उन्होंने सन्यास लिया और पूरे भारत में भक्ति फैलाई।

स्वामी रामानुजाचार्य के विचार

  • ईश्वर की नजर में सब बराबर हैं
    मतलब: भक्ति के लिए कोई ऊंच-नीच नहीं होती। भगवान केवल प्रेम देखते हैं, इंसान की जाति या कुल नहीं।
  • भक्ति ही मोक्ष का सबसे आसान रास्ता है
    मतलब: कठिन तपस्या या ज्ञान से भी ऊपर 'भक्ति' है। सच्चे मन से ईश्वर को याद करना ही सबसे बड़ी पूजा है।
  • जीव और जगत भगवान का ही हिस्सा हैं
    मतलब: हम सब और यह पूरी दुनिया ईश्वर से अलग नहीं हैं। हर जीवित प्राणी में भगवान का वास होता है।
  • समाज की सेवा ही सच्ची ईश्वर सेवा है
    मतलब: अगर आप भूखे या दुखी इंसान की मदद करते हैं, तो वह सीधे भगवान तक पहुँचती है। इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है।
  • शरणागति (खुद को ईश्वर को सौंपना)
    मतलब: जब हम अपना अहंकार छोड़कर पूरी तरह भगवान के भरोसे हो जाते हैं, तब वे हमारी रक्षा की जिम्मेदारी खुद लेते हैं।
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