पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए आज वैशाख अमावस्या पर करें ये विशेष दान, दूर होंगे सारे कष्ट
Kaushiki | Apr 13, 2026, 13:52 IST
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आज (17 अप्रैल) वैशाख अमावस्या मनाया जा रहा है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। पितृ दोष मुक्ति के लिए तर्पण और दान जरूर करें। इससे सुख मिलेगा। आइए जानें...
Vaishakh Amavasya 2026: हिंदू धर्म में वैशाख अमावस्या का बहुत बड़ा महत्व होता है। वैशाख अमावस्या आज (17 अप्रैल) मनाई मनाया जाएगा। पितृ दोष से परेशान लोग इस दिन विशेष उपाय कर सकते हैं।
इस साल अमावस्या शुक्रवार के दिन है। इससे इसका धार्मिक महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है। सच्चे मन से की गई पूजा जीवन के दुख हर लेगी। श्रद्धा भाव से तर्पण करना बहुत शुभ होता है। पूर्वजों की कृपा से घर में सुख-समृद्धि आती है।
इस बार वैशाख अमावस्या पर बहुत ही दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ प्रभाव बना रहेगा। इसके साथ ही सुबह के समय अमृत सिद्धि योग भी होगा। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, इन योगों में किए काम फलदायी होते हैं। पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए यह समय सबसे उत्तम है।
पंचांग के मुताबिक, इस साल वैशाख अमावस्या की तिथि 16 अप्रैल, गुरुवार रात 08:11 बजे से शुरू हो चुका है। ये आज (17 अप्रैल) शाम 05:21 बजे तक रहेगा। उदयातिथि के चलते अमावस्या 17 अप्रैल को ही मनाया जाएगा।
इस दिन स्नान-दान के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:25 से 05:09 बजे तक का समय सबसे शुभ है। यदि इस समय संभव न हो, तो सुबह 05:54 बजे सूर्योदय के बाद भी स्नान और पुण्य कार्य किए जा सकते हैं।
![कब है वैशाख अमावस्या? जानें तिथि, पूजा और क्या करें-क्या न करें - Newswave Jharkhand]()
पितृ दोष निवारण के लिए तर्पण करना सबसे पहला काम है। जल में काले तिल मिलाकर पितरों को अर्घ्य जरूर दें। पितरों का नाम लेकर तर्पण करने से आत्मा तृप्त होती है।
यदि संभव हो तो पिंडदान (पिंडदान महत्व) का कार्य ब्राह्मण से करवाएं। इससे परिवार पर आने वाले बड़े संकट भी टल जाते हैं। पूर्वजों की कृपा से जीवन में बहुत तरक्की मिलती है।
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इस साल अमावस्या शुक्रवार के दिन है। इससे इसका धार्मिक महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है। सच्चे मन से की गई पूजा जीवन के दुख हर लेगी। श्रद्धा भाव से तर्पण करना बहुत शुभ होता है। पूर्वजों की कृपा से घर में सुख-समृद्धि आती है।
वैशाख अमावस्या का शुभ संयोग
पंचांग के मुताबिक, इस साल वैशाख अमावस्या की तिथि 16 अप्रैल, गुरुवार रात 08:11 बजे से शुरू हो चुका है। ये आज (17 अप्रैल) शाम 05:21 बजे तक रहेगा। उदयातिथि के चलते अमावस्या 17 अप्रैल को ही मनाया जाएगा।
इस दिन स्नान-दान के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:25 से 05:09 बजे तक का समय सबसे शुभ है। यदि इस समय संभव न हो, तो सुबह 05:54 बजे सूर्योदय के बाद भी स्नान और पुण्य कार्य किए जा सकते हैं।
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अमावस्या पर पिंडदान का महत्व
यदि संभव हो तो पिंडदान (पिंडदान महत्व) का कार्य ब्राह्मण से करवाएं। इससे परिवार पर आने वाले बड़े संकट भी टल जाते हैं। पूर्वजों की कृपा से जीवन में बहुत तरक्की मिलती है।
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वैशाख अमावस्या पर करें ये उपाए
- पीपल की पूजा
पीपल के पेड़ को पितरों का पवित्र निवास स्थान मानते हैं। अमावस्या की शाम को पीपल के नीचे सरसों का दीपक जलाएं। दीपक जलाकर पेड़ की सात बार परिक्रमा जरूर करनी चाहिए। परिक्रमा करते समय अपने पूर्वजों का मन ही मन स्मरण करें। यह उपाय पितृ दोष से मुक्ति दिलाने में बहुत प्रभावी है। - भगवान शिव का पूजन
वैशाख मास की अमावस्या तिथि की शाम को भगवान शिव की विशेष पूजा करें। शिवलिंग पर काला तिल और कच्चा दूध अर्पित करना चाहिए। 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करते रहें। इसके साथ ही पितृ चालीसा और स्तोत्र का पाठ करें। शिवजी की कृपा से पितरों को मोक्ष प्राप्त होता है। परिवार में इससे सुख, शांति और बहुत समृद्धि आती है। - कम होगा पितृ दोष का प्रभाव
वैशाख अमावस्या पर दान करने का फल कई गुना बढ़ जाता है। गाय, कुत्ते और कौए को भोजन जरूर करवाना चाहिए। मछलियों को आटे की गोलियां खिलाना भी बहुत शुभ है। जरूरतमंदों को सत्तू, घड़ा और फल का दान करें। काले तिल का दान करने से पितर बहुत प्रसन्न होते हैं। सेवा भाव से किया गया दान दोषों को काटता है। - घर की शुद्धता का रखें ध्यान
अमावस्या के दिन घर में गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए। इससे घर का वातावरण शुद्ध और बहुत सकारात्मक बनता है। पूरे परिवार को साथ बैठकर पितरों के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। इस दिन सात्विक भोजन करें और किसी पर क्रोध न करें। झूठ बोलने से बचें और शुद्ध मन से पूजा करें। राज पंचक के योग में यह पूजा शीघ्र फल देगी।
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