CBSE 12th Result Controversy: राजनाथ के घर बड़ी बैठक, शिक्षा मंत्री ने ली जिम्मेदारी

Manya Jain | May 28, 2026, 15:34 IST
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CBSE OSM Controversy
CBSE OSM Controversy

CBSE के डिजिटल मूल्यांकन (OSM) पर देश भर में बड़ा विवाद। कॉपियों में गड़बड़ी के आरोप के बाद 4 लाख छात्रों ने री-चेकिंग के लिए अप्लाई किया। सरकार ने टेंडर विवाद पर जांच की बात कही है।

5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला

  • सीबीएसई द्वारा पहली बार लागू किए गए OSM) पर देश भर में विवाद खड़ा हो गया है।
  • सीबीएसई 12वीं बोर्ड रिजल्ट में OSM सिस्टम विवादित।
  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर आपात बैठक।
  • शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने डिजिटल सिस्टम की कमियों की जिम्मेदारी ली।
  • प्रभावित छात्रों के लिए पारदर्शी री-इवैल्युएशन का फैसला।
  • विपक्ष ने कंपनी को टेंडर देने पर सवाल उठाए, सरकार ने सख्त कार्रवाई का ऐलान।

राजनाथ सिंह के आवास पर बैठक

सीबीएसई 12वीं के रिजल्ट में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम को लेकर दिल्ली में हलचल तेज है। इस विवाद के बीच गुरुवार को एक बड़ी बैठक बुलाई गई। यह अहम बैठक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर हुई। इसमें प्रधानमंत्री कार्यालय के कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।

cbse osm system
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी इस मीटिंग में पहुंचे। बैठक में सीबीएसई के कई बड़े अधिकारियों को भी बुलाया गया। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार सार्वजनिक रूप से गलती मानी है। उन्होंने सरकार की जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया।

शिक्षा मंत्री ने दिए हैरान करने वाले डिजिटल आंकड़े

दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस बार के मूल्यांकन से जुड़े कुछ बेहद चौंकाने वाले आंकड़े देश के सामने रखे।

डिजिटल चेकिंग का गणित

  • कुल शामिल छात्र: 17 लाख विद्यार्थी
  • कुल आंसर स्क्रिप्ट (कॉपियों) की संख्या: 98 लाख कॉपियां
  • स्कैन किए गए कुल पेजों की संख्या: लगभग 40 करोड़ पेज
  • शिकायत लेकर लौटे छात्र: 4 लाख से अधिक छात्र
  • दोबारा जांच के लिए आई कॉपियां: 11 लाख कॉपियां
शिक्षा मंत्री ने कहा, यह पूरा सिस्टम स्टूडेंट सेंट्रिक (Student-Centric) यानी छात्रों की सुविधा के लिए बनाया गया है। इससे बच्चों को पूरी पारदर्शिता के साथ अपने नंबरों की सही जानकारी मिलती है।

राहुल गांधी ने की SIT जांच की मांग

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने इस पूरे मामले को एक बड़ा घोटाला करार दिया है। राहुल गांधी ने स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने की मांग उठाई है।

साथ ही उन्होंने मामले में एसआईटी (SIT) गठन की भी बात कही। राहुल गांधी के निशाने पर सीबीएसई (CBSE) का ओएसएम (OSM) कॉन्ट्रैक्ट है। उन्होंने कहा कि कॉन्ट्रैक्ट पाने वाली कंपनी का पुराना रिकॉर्ड विवादित रहा है। यह कंपनी पहले 'ग्लोबरेना' (Globarena) नाम से काम करती थी।

साल 2019 और 2023 के तेलंगाना बोर्ड विवाद में इसका नाम था। ओएसएम की गलतियों के कारण तेलंगाना में छात्रों ने खुदकुशी की थी। राहुल गांधी ने पूछा कि पुराना रिकॉर्ड खराब होने पर भी काम क्यों मिला।

शिक्षा मंत्री ने ली जिम्मेदारी

धर्मेंद्र प्रधान ने बड़ी बेबाकी से यह बात स्वीकार की

पहली बार इस बड़े डिजिटल सिस्टम को लागू करने में कुछ व्यावहारिक दिक्कतें आई हैं। उन्होंने कहा, "इसमें कुछ विसंगति और कमियां ध्यान में आ रही हैं, जिसका मैं स्वयं दायित्व लेता हूँ। इसका हर हाल में सही उपाय निकाला जाएगा।
सरकार इस समय सभी कमियों को दूर करने के काम में पूरी गंभीरता से जुटी हुई है। शिक्षा मंत्री ने देश के छात्रों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि हम एक भी विद्यार्थी की शिकायत या जिज्ञासा को बिना समाधान के नहीं छोड़ेंगे। यह मामला शिक्षा की क्वालिटी और पारदर्शिता से जुड़ा है, जिसमें आगे कई जरूरी सुधार किए जाएंगे।

गड़बड़ी सुधारने के लिए बुलाई गई बड़ी एजेंसियां

विवाद को बढ़ता देख शिक्षा मंत्रालय ने एक हाई-लेवल बैठक बुलाई है। शिक्षा मंत्री ने बताया कि 40 करोड़ पेजों की डिजिटल चेकिंग में आई गड़बड़ियों को सुधारने के लिए देश की बेहतरीन टेक्निकल टीमों को काम पर लगाया गया है।

सीबीएसई ने कई अच्छी और प्रतिष्ठित तकनीकी एजेंसियों को इस री-इवैल्युएशन (CBSE Revaluation) प्रक्रिया में शामिल किया है। इनमें भारत सरकार की तकनीक को प्रमाणित और सर्टिफाई करने वाली टॉप एजेंसियां भी शामिल हैं। ये सभी एजेंसियां मिलकर छात्रों के डेटा का मिलान कर रही हैं ताकि रिजल्ट को पूरी तरह एरर-फ्री बनाया जा सके।

राहुल गांधी के आरोपों पर सरकार का तीखा पलटवार

इस डिजिटल मार्किंग सिस्टम (Digital Evaluation) पर अब राजनीति भी पूरी तरह गरमा गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि ऑन स्क्रीन मार्किंग का ठेका जानबूझकर उस विवादित कंपनी को दिया गया, जिसने पहले तेलंगाना की परीक्षा में गड़बड़ी की थी।

इन आरोपों पर पलटवार करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि सीबीएसई इस मुद्दे पर पहले ही अपना लिखित स्पष्टीकरण दे चुका है। कंपनी को यह टेंडर पूरी तरह भारत सरकार के नियमों और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत दिया गया था। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि जांच में कोई भी गड़बड़ी या भ्रष्टाचार पाया गया, तो हम किसी भी दोषी को माफ नहीं करेंगे।

आखिर OSM को लेकर क्यों भड़के हैं छात्र?

12वीं के छात्रों और उनके माता-पिता का गुस्सा केवल कम नंबर मिलने तक सीमित नहीं है। असली विवाद तब शुरू हुआ जब छात्रों ने अपनी कॉपियों की स्कैन कॉपी ऑनलाइन डाउनलोड की।

छात्रों ने कॉपियों में कई हैरान करने वाली कमियां उजागर की हैं:

  • खराब स्कैनिंग (Poor Scanning Quality): कई कॉपियों में अक्षर इतने धुंधले हैं कि उन्हें पढ़ना भी मुश्किल है।
  • पन्ने गायब होना (Missing Pages): कुछ आंसर शीट से बीच के पूरे-पूरे पन्ने ही गायब मिले हैं।
  • गलत कॉपियों की डिलीवरी (Wrong Answer Sheets): सबसे गंभीर आरोप यह है कि कई छात्रों को उनकी जगह किसी दूसरे छात्र की कॉपी थमा दी गई है।
इन्हीं गड़बड़ियों के कारण सोशल मीडिया पर अब पुराने मैन्युअल मार्किंग सिस्टम को वापस लागू करने की मांग बहुत तेजी से उठने लगी है।

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