सीयूईटी यूजी 2027 में बदलाव: वन स्टूडेंट वन डे एग्जाम की तैयारी, एक ही दिन में होगी पूरी परीक्षा, जानें कैसे
Manya Jain | Sootr Creatives | Oct 04, 2026, 23:11 IST
सीयूईटी यूजी 2027 का नया नियम जारी
सीयूईटी यूजी 2027 में एक छात्र की परीक्षा सिर्फ एक दिन में पूरी हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक एनटीए हर विषय का पेपर 60 मिनट से घटाकर 40 से 45 मिनट का करने की तैयारी में है। सवाल भी कम हो सकते हैं। पीजी कोर्स दाखिला में कम आवेदन वाले विषयों में परीक्षा नहीं होगी। जानिए सीयूईटी परीक्षा पैटर्न के नए बदलाव की पूरी जानकारी।
समझें क्या है पूरा मामला
- सूत्रों के मुताबिक 2027 से एक छात्र की परीक्षा एक ही दिन में पूरी हो सकती है।
- परीक्षा की 12-15 दिन की विंडो में से छात्र को सिर्फ एक दिन का स्लॉट मिलेगा।
- हर विषय का पेपर 60 मिनट की जगह 40-45 मिनट का करने की तैयारी है।
- सवालों की संख्या 50 से घटकर 35 से 40 हो सकती है।
- चार विषयों का विकल्प देने पर भी विचार चल रहा है।
वन स्टूडेंट वन डे एग्जाम क्या है?
सीयूईटी यूजी 2026 में 15 लाख 68 हजार 866 छात्रों ने आवेदन किया था। सूत्रों के मुताबिक 2027 में इतने ही बड़े वर्ग पर यह बदलाव लागू होगा।
सीयूईटी का नया पैटर्न : समय और सवाल कितने घटेंगे?
पेपर का समय घटेगा तो सवाल भी कम होंगे। सूत्रों के मुताबिक सवालों की संख्या 35 से 40 के बीच रह सकती है। हर विषय का पेपर 40 से 45 मिनट का होगा।
एक दिन में कितना समय लगेगा?
शिक्षा सचिव की अध्यक्षता में बैठक हुई है। इसमें यूजीसी, एनटीए और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। बैठक में यह संभावना तलाशने को कहा गया कि पांच की जगह चार विषयों का विकल्प दिया जा सकता है या नहीं।
अभी कई छात्र चार विषयों की परीक्षा देते ही हैं।
जनरल टेस्ट पर क्या होगा असर?
चार विषयों का विकल्प मिला तो सभी यूनिवर्सिटीज को जनरल टेस्ट मानना होगा। यूजीसी से कहा गया है कि दाखिले के मानकों में ज्यादा फर्क न हो।
CUET PG 2027 में क्या बदलेगा?
मान लीजिए किसी कोर्स में 500 सीटें हैं। अगर आवेदन 500 से भी कम आए, तो टेस्ट नहीं होगा। पिछले कुछ वर्षों में 30 से ज्यादा विषय ऐसे मिले हैं, जिनमें आवेदन कम आते हैं।
आगे क्या होगा?
इस वक्त बदलाव सिर्फ सूत्रों की जानकारी पर है। छात्र किसी भी कोचिंग या वेबसाइट के दावे पर भरोसा करने से पहले एनटीए की वेबसाइट देखें। सूचना बुलेटिन आने पर ही पैटर्न पक्का माना जाएगा।
नया पैटर्न आने से पहले तैयारी रोकने की जरूरत नहीं है। विषयों का चुनाव और पाठ्यक्रम के पुराने ढांचे में अचानक बदलाव की जानकारी नहीं है। असली तस्वीर गाइडलाइंस आने पर ही साफ होगी।
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