IIT ड्रॉपआउट रिपोर्ट में इंदौर से राहत भरी खबर: 45% बढ़ी छात्रों की संख्या, तो देशभर में चार साल में इतने छात्रों ने छोड़ी आईआईटी

Arohi Raj | Sootr Creatives | Oct 04, 2026, 12:53 IST
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IIT इंदौर में 2022-23 के मुकाबले 2025-26 में छात्रों की संख्या 1,052 बढ़ी है। <br>
IIT इंदौर में 2022-23 के मुकाबले 2025-26 में छात्रों की संख्या 1,052 बढ़ी है।


देश के आईआईटी में पढ़ाई छोड़ने वाले विद्यार्थियों का आंकड़ा फिर चर्चा में है। NTF की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 से 2023 के बीच IIT में ड्रॉपआउट हुए हैं। इस दौरान एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के तीन हजार 542 विद्यार्थियों ने पढ़ाई छोड़ी है। इन आंकड़ों के बीच मध्य प्रदेश के लिए राहत की खबर सामने आई है।

एनटीएफ रिपोर्ट में क्या है

नेशनल टास्क फोर्स (NTF) रिपोर्ट देश के उच्च शिक्षा संस्थानों में विद्यार्थियों की स्थिति पर आई अंतरिम रिपोर्ट है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2018 से 2023 के बीच आईआईटी में एससी-एसटी और ओबीसी वर्ग के तीन हजार 542 छात्रों ने पढ़ाई छोड़ी है। यानी बीच में पढ़ाई छोड़ना यानी ड्रॉपआउट इन संस्थानों में एक गंभीर मुद्दा बनकर उभरा है।

इसके पीछे वजह क्या है

सरकार के बताए गए कारणों में दूसरे संस्थान या विभाग में प्रवेश मिलना शामिल है। वहीं, इसकी वजह पर्सनल इश्यू और दूसरी दिक्कतें भी बताई गई हैं। यानी हर विद्यार्थी का पढ़ाई छोड़ने के पीछे एक ही वजह शामिल नहीं है।

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मध्य प्रदेश में 80 हजार शिक्षकों की पुरानी पेंशन पर पेंच फंसा है। हाईकोर्ट ने 2018 में शामिल शिक्षकों को ओपीएस का हकदार माना था। तीन महीने बाद भी एमपी स्कूल शिक्षा विभाग ने कोई फैसला नहीं लिया है। अब विभाग इस फैसले के खिलाफ रिव्यू याचिका लगाने की तैयारी में है। 5 अक्टूबर को जबलपुर में वरिष्ठ अधिकारियों और वकीलों की बैठक होगी।
मध्य प्रदेश में 80 हजार शिक्षकों की पुरानी पेंशन पर पेंच फंसा है। हाईकोर्ट ने 2018 में शामिल शिक्षकों को ओपीएस का हकदार माना था। तीन महीने बाद भी एमपी स्कूल शिक्षा विभाग ने कोई फैसला नहीं लिया है। अब विभाग इस फैसले के खिलाफ रिव्यू याचिका लगाने की तैयारी में है। 5 अक्टूबर को जबलपुर में वरिष्ठ अधिकारियों और वकीलों की बैठक होगी।

IIT इंदौर में 45% बढ़ी छात्रों की संख्या

शैक्षणिक वर्षछात्र संख्या
2022-232,333
2023-24 (अगस्त तक)2,810
2024-25 (अगस्त तक)3,140
2025-26 (अगस्त तक)3,385
2022-23 की तुलना में 2025-26 में एक हजार 52 छात्र ज्यादा हैं। यानी चार साल में छात्रों की संख्या करीब 45% बढ़ी है। इंदौर में छात्रों की संख्या बढ़ना स्थानीय स्तर परपॉजिटिव रिस्पॉन्स है।

क्या इसका मतलब है कि ड्रॉपआउट नहीं हुआ

रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि संस्थान में ड्रॉपआउट नहीं है। छात्र संख्या बढ़ने का अर्थ नए प्रवेश बढ़ना हो सकता है। उसी समय कुछ विद्यार्थी पढ़ाई छोड़ भी सकते हैं।

आईआईटी इंदौर के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) प्रोफेसर सुनील कुमार के अनुसार, छात्र संख्या बढ़ना संस्थान के विस्तार की तस्वीर दिखाता है। उन्होंने कहा कि संस्थान कोशिश कर रहा है कि यहां से ड्रॉपआउट न हो।

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राजस्थान के 12 विश्वविद्यालयों ने पिछले तीन वर्षों में 52 मानद उपाधियाँ प्रदान की हैं, जबकि 14 विश्वविद्यालयों ने ऐसा कोई कार्य नहीं किया। ये उपाधियाँ उन विशिष्ट व्यक्तियों को दी जाती हैं जिन्होंने अपने क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान किया है। मानद उपाधियों का वितरण स्टैंडिंग कमेटी की स्वीकृति और कुलाधिपति की मंजूरी के बाद ही होता है।
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IIT इंदौर में ड्रॉपआउट की संख्या

वर्गड्रॉपआउट विद्यार्थियों की संख्या
एसटी3
एससी6
ओबीसी8
एससी, एसटी और ओबीसी कुल17
अन्य श्रेणियां33
कुल50

दोनों आंकड़ों की तुलना क्यों नहीं हो सकती

रिपोर्ट के अनुसार, ये आंकड़े NTF की 2018-23 की राष्ट्रीय रिपोर्ट से अलग हैं। इसलिए इंदौर के पच्चास और देश के तीन हजार 542 की सीधी तुलना संभव नहीं है। दोनों आंकड़े अलग-अलग समय और संदर्भ के हैं।

व्यवस्था भी बढ़े

आईआईटी इंदौर में छात्र संख्या बढ़ने के साथ ही हेल्प सपोर्ट का महत्व भी बढ़ जाता है। इसमें अकादमिक सपोर्ट, काउंसलिंग, फाइनेंशियल सपोर्ट और छात्रों की समस्याओं की समय पर पहचान शामिल है। यही पढ़ाई बीच में छोड़ने के जोखिम को घटाने में मदद कर सकती है।

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एनटीएफ सर्वे में क्या मिला

नेशनल टास्क फोर्स के सर्वे में जवाब देने वाले 70% से ज्यादा संस्थानों में फुल टाइम मेंटल हेल्थ सर्विस देने वाले लोग नहीं थे। वहीं, 4% से भी कम संस्थानों ने सुसाइड जोखिम प्रबंधन प्रोटोकॉल होने की जानकारी दी है। यानी बड़े शिक्षा संस्थानों में भी मानसिक स्वास्थ्य सहायता का ढांचा पर्याप्त नहीं दिखता है। यह आंकड़ा उन संस्थानों का है जिन्होंने सर्वे में जवाब दिया है।

आगे क्या देखना होगा

अब देखना होगा कि आईआईटी इंदौर और बाकी आईआईटी सहायता व्यवस्था को कैसे मजबूत करते हैं। यह भी देखना होगा कि संस्थान इंदौर के हालिया ड्रॉपआउट के आंकड़े सार्वजनिक करते हैं या नहीं। एनटीएफ की अंतरिम रिपोर्ट के बाद अंतिम रिपोर्ट में क्या आता है, इस पर भी नजर रहेगी।

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किसी के लिए 5 हजार 329 करोड़, तो किसी की सुनने वाला कोई नहीं। ऐसी दो तस्वीरें आपको मध्यप्रदेश में देखने को मिल जाएंगी। यहां मोहन सरकार ने 76 हजार से ज्यादा अतिथि शिक्षकों के लिए 5 हजार 329 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। ये फंड आने वाले 5 सालों यानी 2030-31 तक के लिए दिया गया है। इसी फंड से अतिथि शिक्षकों को मानदेय दिया जाएगा।

यह खबर क्यों जरूरी है

आईआईटी में एडमिशन लेना काफी चुनौतिपूर्ण होता है। वहां पढ़ाई बीच में छूटना विद्यार्थी, परिवार और देश के संसाधनों तीनों के लिए बड़ा नुकसान है। खासकर एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के विद्यार्थियों के आंकड़े समान अवसर के सवाल से जुड़ते हैं। मेंटल हेल्थ सर्विस की कमी की बात बताती है कि विद्यार्थियों को समय पर मदद देने की व्यवस्था कमजोर है। इंदौर और मध्य प्रदेश के पेरेंट्स और छात्र के लिए यह जानकारी अहम है।

FAQs

  1. सवाल: एनटीएफ रिपोर्ट के मुताबिक आईआईटी में कितने विद्यार्थियों ने पढ़ाई छोड़ी?
    जवाब: रिपोर्ट के अनुसार 2018 से 2023 के बीच देश के आईआईटी में एससी-एसटी और ओबीसी वर्ग के 3542 विद्यार्थियों ने पढ़ाई बीच में छोड़ी।
  2. सवाल: आईआईटी इंदौर में छात्र संख्या कितनी बढ़ी?
    जवाब: 2022-23 में 2333 विद्यार्थी थे, जो 2025-26 में अगस्त तक बढ़कर 3385 हो गए। यह 1052 विद्यार्थियों या 45% की बढ़ोतरी है। इसे ड्रॉपआउट नहीं होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता है।
  3. सवाल: एनटीएफ के सर्वे में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं पर क्या मिला?
    जवाब: सर्वे में जवाब देने वाले 70% से ज्यादा संस्थानों में फुल टाइम मानसिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता नहीं था। 4% से भी कम संस्थानों ने आत्महत्या जोखिम प्रबंधन प्रोटोकॉल होने की जानकारी दी है।
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