भोपाल कॉलेज प्लेसमेंट का सच: रोजगार मेला और उच्च शिक्षा विभाग के बाद भी 25 प्रतिशत को नौकरी नहीं?
Manya Jain | Sootr Creatives | Oct 02, 2026, 16:14 IST
भोपाल के कॉलेजों में प्लेसमेंट की कमजोर तस्वीर
भोपाल में पारंपरिक कॉलेजों में प्लेसमेंट की तस्वीर कमजोर है। उच्च शिक्षा विभाग की रोजगार योजनाओं में करीब 1.5 लाख विद्यार्थियों ने पंजीयन कराया। नौकरी पाने वाले 25 प्रतिशत से भी कम रहे। योजनाओं पर करीब 2.96 करोड़ रुपए खर्च हुए। इसके उलट IIIT Bhopal में प्लेसमेंट 89.33 प्रतिशत रहा। मेनिट भोपाल में कैंपस सिलेक्शन 85 से 90 प्रतिशत है।
समझें क्या है पूरा मामला
- रिपोर्ट के मुताबिक उच्च शिक्षा विभाग विद्यार्थियों को नौकरी नहीं दिला पा रहा।
- विभाग ने रोजगार मेला, प्रशिक्षण और प्लेसमेंट अधिकारियों की व्यवस्था की है।
- दो साल में करीब 1.5 लाख विद्यार्थियों ने पंजीयन कराया।
- इनमें नौकरी पाने वाले 25 प्रतिशत से भी कम रहे।
- इन योजनाओं पर करीब 2.96 करोड़ रुपए खर्च किए गए।
25 प्रतिशत को नौकरी नहीं , क्यों?
सोचिए एक बार। खर्च को 1.5 लाख विद्यार्थियों में बांटिए। हर विद्यार्थी पर औसतन करीब 197 रुपए आते हैं। क्या सिर्फ खर्च से नतीजा बदलेगा?
भोपाल कॉलेज प्लेसमेंट की हकीकत
राजधानी के प्रमुख कॉलेजों में इस बार कट ऑफ यानी प्रवेश के लिए न्यूनतम अंक 95 से 100 प्रतिशत रहा है।
इनमें नूतन (सरोजिनी नायडू, गर्ल्स कॉलेज) और गीतांजलि कॉलेज शामिल हैं। महारानी लक्ष्मीबाई गर्ल्स पीजी कॉलेज और मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय भी सूची में हैं।
ट्रिपल आईटी भोपाल प्लेसमेंट का आंकड़ा
कैंपस सिलेक्शन यानी कंपनियों का कैंपस में आकर विद्यार्थियों को चुनना। मैनिट (Maulana Azad National Institute of Technology) भोपाल का तकनीकी संस्थान है।
किस ब्रांच में कितने प्रतिशत प्लेसमेंट?
आईटी (Information Technology) में 88.46 प्रतिशत प्लेसमेंट हुआ, औसत पैकेज 17.13 लाख रुपए है। ईसीई (ECE) का प्लेसमेंट 82.97 प्रतिशत रहा। यहां औसत पैकेज 17.16 लाख रुपए है।
संस्थान का कुल औसत पैकेज 18.02 लाख रुपए है। सबसे बड़ा पैकेज 62 लाख रुपए का रहा।
134 विद्यार्थियों की इंटर्नशिप दर्ज हुई। सबसे ज्यादा इंटर्नशिप स्टाइपेंड 1.25 लाख रुपए रहा। स्टाइपेंड यानी इंटर्नशिप के दौरान मिलने वाली राशि।
छात्रों की पसंद बनी बड़ी चुनौती
छात्राओं में शहर के भीतर भी दूर की नौकरी को लेकर झिझक रहती है। इससे कंपनियों के पद और विद्यार्थियों की पसंद के बीच अंतर आता है।
रोजगार मेले में छोटी-मोटी कंपनियां बुलाई जाती हैं। ये कंपनियां मार्केटिंग, डिलीवरी बॉय और एजेंट टाइप की नौकरी ऑफर करती हैं।
शहर से बाहर नौकरी से बचते हैं विद्यार्थी
विद्यार्थियों को अच्छी कंपनियों में चयन के लिए साक्षात्कार की तैयारी कराई जाती है। कंपनियों को कैंपस में बुलाया जाता है, लेकिन बड़ी समस्या विद्यार्थियों की नौकरी को लेकर पसंद है। अधिकांश विद्यार्थी शहर से बाहर नहीं जाना चाहते और अपने शहर में भी दूर नौकरी करने से बचते हैं।
By: डॉ. उषा सोलंकी, ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट अधिकारी, स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन योजना प्रकोष्ठ
एक्सपर्ट की नजर में क्या है कमी?
करोड़ों रुपए का निवेश मुख्यतः इंफ्रास्ट्रक्चर पर हो रहा है, जबकि समान प्राथमिकता विद्यार्थियों की इंडस्ट्री रेडिनेस, स्किल डेवलपमेंट और व्यावहारिक प्रशिक्षण को मिलनी चाहिए। दूसरा, ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट ऑफिसर (टीपीओ) के पद नियमित नहीं हैं। अस्थायी या अतिरिक्त प्रभार पर काम करने वाले अधिकारी न तो कंपनियों से मजबूत संबंध बना पाते हैं और न ही जवाबदेह होते हैं। इंटर्नशिप और व्यावहारिक प्रशिक्षण भी कमजोर हैं। जब तक कॉलेज उद्योग से सीधा जुड़ाव नहीं बनाएंगे, तब तक करोड़ों खर्च के बावजूद नतीजे में सुधार नहीं आएगा।"
By: डॉ. अजय श्रीवास्तव, ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट अधिकारी, ट्रिपल आईटी
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FAQ
- पारंपरिक कॉलेजों में कितने विद्यार्थियों को नौकरी मिली?
रिपोर्ट के मुताबिक नौकरी पाने वाले 25 प्रतिशत से भी कम रहे। 2024-25 और 2025-26 में करीब 1.5 लाख विद्यार्थियों ने पंजीयन कराया। इन योजनाओं पर करीब 2.96 करोड़ रुपए खर्च हुए। - ट्रिपल आईटी में प्लेसमेंट कितना रहा?
ट्रिपल आईटी में कुल प्लेसमेंट 89.33 प्रतिशत रहा। सीएसई में यह 96.07 प्रतिशत है और कुल औसत पैकेज 18.02 लाख रुपए है। सबसे बड़ा पैकेज 62 लाख रुपए का रहा। - विद्यार्थी चयन के बाद नौकरी ज्वाइन क्यों नहीं कर पाते?
कॉलेज अधिकारियों के मुताबिक कई विद्यार्थी शहर से बाहर नौकरी नहीं करना चाहते। छात्राओं में शहर के भीतर भी दूर की नौकरी को लेकर झिझक रहती है। इससे कंपनियों के पद और विद्यार्थियों की पसंद के बीच अंतर आता है।
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