भारत ने बनाया रिकॉर्ड : देश में शिक्षकों की संख्या 1 करोड़ पार, लेकिन अब भी कई स्कूलों में शिक्षक

भारत के शिक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि, शैक्षणिक सत्र 2024-25 में शिक्षकों की संख्या पहली बार 1 करोड़ पार। हालांकि, अब भी कई स्कूलों में शिक्षक व नामांकन की कमी जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं।

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Manya Jain
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शिक्षा किसी भी समाज की रीढ़ होती है। एक बेहतर भविष्य वही देश गढ़ सकता है, जहाँ हर बच्चे को पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक हों और स्कूलों में मौकों की कमी न हो।

भारत के लिए यह गर्व की बात है कि शैक्षणिक सत्र 2024-25 में पहली बार शिक्षकों की संख्या 1 करोड़ से अधिक पहुँच गई है।

यह उपलब्धि बताती है कि शिक्षा व्यवस्था धीरे-धीरे सही दिशा में आगे बढ़ रही है, हालांकि अभी भी कई चुनौतियाँ मौजूद हैं।

👩‍🏫 महिला शिक्षकों की बढ़ती भागीदारी

पिछले एक दशक में महिला शिक्षकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

  • 2014-15 में पुरुष शिक्षक 45.46 लाख और महिला 40.16 लाख थीं।

  • 2024-25 तक पुरुष संख्या मामूली बढ़कर 46.41 लाख हुई, जबकि महिला शिक्षक 54.81 लाख तक पहुँच गईं।

यानी बीते 10 सालों में महिला शिक्षकों का अनुपात लगातार बढ़ा है। इसका मुख्य कारण नई भर्तियों में महिलाओं की हिस्सेदारी है—2014 से अब तक हुई 51.36 लाख भर्तियों में से 61% महिलाओं की रही हैं।

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📉 ड्रॉपआउट रेट और रिटेंशन में सुधार

अच्छे शिक्षक तभी सार्थक हैं, जब बच्चे पढ़ाई पूरी करें। ताजा आंकड़े बताते हैं कि:

  • सेकंडरी स्तर पर ड्रॉपआउट रेट 2023-24 में 10.9% था, जो घटकर 8.2% रह गया।

  • मिडिल स्तर पर यह 5.2% से घटकर 3.5% और प्राथमिक स्तर पर 3.7% से घटकर 2.3% हो गया।

सिर्फ यही नहीं, रिटेंशन रेट यानी बच्चों का लगातार स्कूल में बने रहना भी बेहतर हुआ है। प्राथमिक स्तर पर यह 85.4% से बढ़कर 92.4%, मिडिल पर 78% से बढ़कर 82.8% और सेकंडरी पर 45.6% से बढ़कर 47.2% पहुँच गया है।

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👨‍👩‍👧 पीपुल-टीचर रेश्यो में सकारात्मक बदलाव

कभी एक शिक्षक पर 30 से ज्यादा छात्र होते थे, जिससे व्यक्तिगत ध्यान देना मुश्किल था। अब यह स्थिति बदली है।

  • मिडिल स्तर पर एक शिक्षक पर औसतन 17 छात्र।

  • सेकंडरी स्तर पर एक शिक्षक पर 21 छात्र।

स्पष्ट है कि अब शिक्षक छात्रों को अधिक समय और ध्यान दे पा रहे हैं। यह बदलाव गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में अहम कदम है।

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⚖️ असमानताओं की तस्वीर

हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर प्रगति दिख रही है, लेकिन राज्यों के बीच अंतर अब भी गहरा है।

  • झारखंड में हायर सेकंडरी पर एक शिक्षक औसतन 47 छात्रों को पढ़ाता है।

  • सिक्किम में यही अनुपात सिर्फ 7 है।

  • चंडीगढ़ में प्रति स्कूल औसतन 1222 छात्र हैं, जबकि लद्दाख में यह संख्या मात्र 59 है।

इसी तरह, ग्रॉस एनरोलमेंट रेश्यो (GER) में बिहार सबसे निचले स्तर पर है—अपर प्राइमरी 69%, सेकंडरी 51% और हायर सेकंडरी 38%। इसके उलट, चंडीगढ़ का प्रदर्शन सबसे अच्छा है, जहाँ GER 100% से भी ऊपर है।

🏫 चुनौतियाँ अब भी बाकी

देश में अभी भी 1,04,125 स्कूल ऐसे हैं जिनमें सिर्फ एक ही शिक्षक है। साथ ही, 7,993 स्कूल पूरी तरह खाली हैं, यानी उनमें कोई नामांकन नहीं है।

ये आंकड़े बताते हैं कि शिक्षा का संतुलन अभी भी सभी जगह समान रूप से नहीं पहुँचा है।

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