आज का इतिहास: आज ही के दिन संविधान बनाने की रखी गई थी नींव, संविधान सभा ने प्रारूप समिति का किया था गठन

भारतीय संविधान का निर्माण एक ऐतिहासिक प्रक्रिया थी, जिसमें डॉ. बीआर अंबेडकर का नेतृत्व अहम था। यह संविधान भारतीय लोकतंत्र का आधार बना है। संविधान सभा ने प्रारूप समिति (Drafting Committee) का गठन किया

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Dablu Kumar
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भारतीय संविधान का निर्माण एक ऐतिहासिक और जटिल प्रक्रिया थी। इस प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण कदम 29 अगस्त, 1947 को उठाया गया, जब भारतीय संविधान सभा ने संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए एक प्रारूप समिति (Drafting Committee) का गठन किया।

इस समिति की अध्यक्षता डॉ. बीआर अंबेडकर ने की थी, जिन्हें उनके अद्वितीय ज्ञान, दूरदर्शिता और अथक प्रयासों के कारण "भारतीय संविधान का जनक" (Father of the Indian Constitution) कहा जाता है।

Making of the Constitution संविधान का निर्माण | KNOWLEDGE CITY

ड्राफ्टिंग कमेटी का फॉर्मेशन 

भारत की स्वतंत्रता के बाद यह आवश्यक था कि देश के लिए एक मजबूत और न्यायसंगत संविधान बनाया जाए जो सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करे और देश को एक लोकतांत्रिक ढांचा प्रदान करे।

संविधान सभा ने संविधान के विभिन्न पहलुओं पर काम करने के लिए कई समितियों का गठन किया था। इन समितियों की सिफारिशों को एक सुसंगत और कानूनी रूप से मान्य दस्तावेज़ में बदलने के लिए एक केंद्रीय समिति की आवश्यकता थी।

इसी जरूरतों को पूरा करने के लिए 29 अगस्त, 1947 को एक संकल्प पास करके ड्राफ्टिंग समिति का गठन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य संविधान का एक डिटेल्ड ड्राफ्ट को तैयार करना था, जिसमें विभिन्न समितियों की रिपोर्टों और संविधान सभा की बहसों के निष्कर्षों को शामिल किया जा सके।

संविधान निर्माण में यह महीना (अगस्त 1947): संविधान सभा ने प्रारूप समिति की  नियुक्ति की - भारत का संविधान

ड्राफ्टिंग कमेटी के मेंबर्स

ड्राफ्टिंग कमेटी में कुल सात सदस्य थे, जिन्हें उनके कानूनी ज्ञान और सार्वजनिक जीवन के अनुभव के आधार पर चुना गया था। प्रत्येक सदस्य का योगदान अमूल्य था:

  • डॉ. बी.आर. अंबेडकर (अध्यक्ष): वे एक महान विद्वान, अर्थशास्त्री, समाज सुधारक और कानूनी विशेषज्ञ थे। उनकी गहरी समझ और दृढ़ संकल्प ने समिति के काम को दिशा दी। उन्होंने विभिन्न देशों के संविधानों का गहन अध्ययन किया था और भारतीय संदर्भ में सबसे उपयुक्त प्रावधानों को शामिल करने का प्रयास किया।

  • एन. गोपालस्वामी आयंगर: वे एक कुशल एडमिनिस्ट्रेटर और मद्रास प्रेसीडेंसी के पूर्व प्रधानमंत्री थे। उन्होंने अनुच्छेद 370 को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

  • अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर: वे एक प्रख्यात वकील और मद्रास के एडवोकेट जनरल थे। उनका कानूनी ज्ञान बहुत गहरा था, जिसने मसौदे को कानूनी रूप से मजबूत बनाया।

  • डॉ. के.एम. मुंशी: वे एक प्रतिष्ठित वकील, लेखक और इतिहासकार थे। वे भारतीय विद्या भवन के संस्थापक भी थे और उन्होंने समिति में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

  • सैयद मोहम्मद सादुल्ला: वे असम के एक प्रसिद्ध वकील और राजनेता थे। उन्होंने समिति में मुस्लिम समुदाय का रिप्रजेंटेशन किया।

  • बी.एल. मित्तर: स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने जल्द ही इस्तीफा दे दिया और उनके स्थान पर एन. माधव राव को नियुक्त किया गया।

  • डी.पी. खेतान: 1948 में उनकी आकस्मिक मृत्यु हो गई, जिसके बाद टी.टी. कृष्णमाचारी को उनकी जगह नियुक्त किया गया।

इन सदस्यों ने कई महीनों तक लगातार कड़ी मेहनत की, देश के लिए एक ऐसा संविधान तैयार करने के लिए जो मजबूत, न्यायसंगत और समावेशी हो।

File:Dr. Babasaheb Ambedkar Chairman, Drafting Committee of the Indian  Constitution with other members on Aug. 29, 1947.jpg - Wikimedia Commons

ड्राफ्टिंग कमेटी में डॉ. अंबेडकर का लीड

ड्राफ्टिंग कमेटी ने संविधान सभा की विभिन्न समितियों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्टों का अध्ययन किया और एक एकीकृत मसौदा तैयार करने का काम शुरू किया। समिति की पहली बैठक 30 अगस्त, 1947 को हुई। उन्होंने कुल 141 दिनों तक बैठकें कीं।

21 फरवरी, 1948 को समिति ने संविधान का पहला मसौदा संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद को प्रस्तुत किया। यह मसौदा सार्वजनिक चर्चा और सुझावों के लिए प्रकाशित किया गया था।

जनता और विभिन्न संगठनों से लगभग 8 महीने तक प्रतिक्रियाएँ प्राप्त हुईं। इन सुझावों के आधार पर, समिति ने दूसरा मसौदा तैयार किया।

भारतीय संविधान का जनक डॉ. अंबेडकर

  • कानूनी विशेषज्ञता: डॉ. अंबेडकर मसौदे को कानूनी रूप से पुख्ता बनाने के लिए हर प्रावधान का बारीकी से विश्लेषण किया। उनके भाषणों और बहसों में उनके ज्ञान की गहराई स्पष्ट रूप से दिखाई देती थी।

  • सामाजिक न्याय पर जोर: डॉ. अंबेडकर ने यह सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास किए कि संविधान सामाजिक और आर्थिक न्याय की नींव पर आधारित हो। उन्होंने अस्पृश्यता को समाप्त करने, दलितों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं के लिए आरक्षण और समान अवसर प्रदान करने वाले प्रावधानों पर जोर दिया।

  • बहसों का कुशल प्रबंधन: संविधान सभा में मसौदे पर हुई लंबी और कठिन बहसों के दौरान, डॉ. अंबेडकर ने एक-एक कर सभी आपत्तियों का जवाब दिया और प्रावधानों के पीछे के तर्क को स्पष्ट किया। उनका धैर्य और तार्किक क्षमता अद्वितीय थी।

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कांस्टीट्यूशन का ड्राफ्ट और उसका प्रभाव

समिति द्वारा तैयार किया गया संविधान का अंतिम ड्राफ्ट 4 नवंबर, 1948 को संविधान सभा में प्रस्तुत किया गया। इस ड्राफ्ट पर तीन चरणों में व्यापक चर्चा हुई। कुल मिलाकर, लगभग 2,473 संशोधनों पर चर्चा की गई और उनमें से कई को स्वीकार किया गया।

अंतिम रूप से, 26 नवंबर, 1949 को भारतीय संविधान को संविधान सभा द्वारा अपनाया गया और 26 जनवरी, 1950 को इसे लागू किया गया।

संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी और डॉ. बी.आर. अंबेडकर का योगदान भारत के इतिहास में एक मील का पत्थर है। उन्होंने एक ऐसे देश के लिए एक समावेशी और लोकतांत्रिक ढांचा तैयार किया जो सदियों से असमानता और उत्पीड़न से जूझ रहा था।

उनके प्रयासों के कारण ही आज भारत का संविधान न केवल एक कानूनी दस्तावेज है बल्कि सामाजिक परिवर्तन, न्याय और समानता का एक पावरफुल सिंबल भी है।

29 अगस्त के इतिहास की 10 बड़ी घटनाओं की सूची

  • 29 अगस्त 1831: ब्रिटिश वैज्ञानिक माइकल फैराडे ने पहली बार विद्युत ट्रांसफार्मर (विद्युत परिवर्तित्र) का प्रदर्शन किया, जो आधुनिक विद्युत प्रौद्योगिकी की नींव बना।

  • 29 अगस्त 1833: ब्रिटिश साम्राज्य में दास प्रथा को समाप्त करने के लिए ब्रिटिश दास उन्मूलन अधिनियम कानून बन गया।

  • 29 अगस्त 1842: पहले अफीम युद्ध (First Opium War) को समाप्त करने के लिए ग्रेट ब्रिटेन और चीन के बीच नानकिंग की संधि पर हस्ताक्षर हुए।

  • 29 अगस्त 1905: भारतीय हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद का जन्म हुआ, जिनकी जयंती को भारत में राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है।

  • 29 अगस्त 1932: नीदरलैंड की राजधानी एम्सटर्डम में अंतर्राष्ट्रीय युद्ध-विरोधी समिति का गठन हुआ, जिसका उद्देश्य विश्व शांति स्थापित करना था।

  • 29 अगस्त 1947: भारत में डॉ. बी.आर. अंबेडकर की अध्यक्षता में भारतीय संविधान सभा द्वारा संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए एक प्रारूप समिति (Drafting Committee) का गठन किया गया।

  • 29 अगस्त 1949: सोवियत संघ ने अपने पहले परमाणु बम का गुप्त परीक्षण किया, जिसे "फर्स्ट लाइटनिंग" या "जो-1" नाम दिया गया। इसने शीत युद्ध को एक नया आयाम दिया।

  • 29 अगस्त 1957: अमेरिकी कांग्रेस ने नागरिक अधिकार अधिनियम (Civil Rights Act of 1957) पारित किया, जिसका उद्देश्य नस्लीय भेदभाव को समाप्त करना था।

  • 29 अगस्त 1974: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की अध्यक्षता में लोकदल पार्टी की स्थापना हुई।

  • 29 अगस्त 2009: संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 29 अगस्त को परमाणु परीक्षण विरोधी अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में घोषित किया, ताकि परमाणु हथियारों के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाई जा सके।

29 अगस्त को क्यों याद रखा जाना चाहिए

भारत के नजरिए से:

  • राष्ट्रीय खेल दिवस: 29 अगस्त को महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के जन्मदिन के रूप में "राष्ट्रीय खेल दिवस" मनाया जाता है। इस दिन देश भर में खेलों को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों को सम्मानित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। ध्यानचंद को "हॉकी का जादूगर" कहा जाता था और उनके नेतृत्व में भारतीय टीम ने 1928, 1932 और 1936 के ओलंपिक में लगातार तीन स्वर्ण पदक जीते थे।

  • संविधान का निर्माण: 1947 में इसी दिन डॉ. बी.आर. अंबेडकर की अध्यक्षता में संविधान की प्रारूप समिति का गठन हुआ था, जिसने स्वतंत्र भारत के संविधान की नींव रखी। यह घटना भारत के लोकतांत्रिक भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण थी।

विश्व के नजरिए से:

  • वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति: 1831 में माइकल फैराडे द्वारा ट्रांसफार्मर का प्रदर्शन आधुनिक युग के लिए एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि थी।

  • मानव अधिकारों की प्रगति: 1833 में ब्रिटिश साम्राज्य में दास प्रथा का अंत और 1957 में अमेरिका में नागरिक अधिकार अधिनियम का पारित होना, ये दोनों ही घटनाएं विश्व में मानव अधिकारों और सामाजिक न्याय की दिशा में बड़े कदम थे।

  • वैश्विक शांति का आह्वान: 1949 में सोवियत संघ द्वारा पहले परमाणु परीक्षण ने शीत युद्ध की शुरुआत की, जिसने दुनिया को परमाणु हथियारों की दौड़ के खतरे से परिचित कराया। इसी के कारण, 2009 में संयुक्त राष्ट्र ने 29 अगस्त को "परमाणु परीक्षण विरोधी अंतर्राष्ट्रीय दिवस" घोषित किया, जो वैश्विक शांति और निरस्त्रीकरण की आवश्यकता पर जोर देता है।

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