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NEWS IN DETAIL
अथर्व ने NEET में 530 अंक प्राप्त किए और बिना वकील के सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की।
मध्य प्रदेश के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में EWS आरक्षण न मिलने पर उनका एडमिशन रुक गया।
सुप्रीम कोर्ट ने Article 142 के तहत 'पूर्ण न्याय' की शक्ति का उपयोग कर फैसला सुनाया।
फरवरी 2026 में CJI की पीठ के सामने अथर्व ने 10 मिनट में अपनी बात रखी और जीत हासिल की।
कोर्ट ने NMC और सरकार को निर्देश दिया कि अथर्व जैसे छात्रों को MBBS में प्रोविजनल एडमिशन दिया जाए।
NEWS IN DETAIL
मध्य प्रदेश के जबलपुर वाले अथर्व ने मिसाल पेश कर दी है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में खुद अपनी लड़ाई लड़ी और जीती। अथर्व ने बिना वकील के अपनी बात जजों के सामने रखी। उन्होंने नीट परीक्षा में 530 अंक हासिल किए थे। वे ईडब्ल्यूएस कोटे से डॉक्टर बनने का सपना देख रहे हैं।
पहले उन्होंने हाई कोर्ट में अपनी जीत दर्ज की थी। फिर 10 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने भी मुहर लगा दी। नियम की देरी की वजह से उनका एडमिशन रुक गया था। सिस्टम की इस गलती को अथर्व ने अदालत (jabalpur highcourt) में चुनौती दी।
उन्होंने खुद कानूनी किताबें पढ़कर अपना केस तैयार किया। यह जीत लाखों गरीब और होनहार छात्रों की जीत है। अब अथर्व जैसे मेहनती युवाओं का डॉक्टर बनना आसान होगा।
क्या था पूरा विवाद?
अथर्व चतुर्वेदी का संघर्ष साल 2024 में शुरू हुआ था। उन्होंने नीट परीक्षा में 530 अंक हासिल किए थे। ईडब्ल्यूएस कैटेगरी में उनका नाम मेरिट लिस्ट में आया। लेकिन मध्य प्रदेश के प्राइवेट कॉलेजों में आरक्षण नहीं मिला।
सरकार ने प्राइवेट संस्थानों को इस कोटे से बाहर रखा। अथर्व ने हिम्मत नहीं हारी और दोबारा नीट दी। रिश्तेदारों से मदद लेकर उन्होंने अपनी कोचिंग पूरी की। हाईकोर्ट में उनकी याचिका समय की कमी बताकर खारिज हुई।
इसके बाद वे इंसाफ के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। उन्होंने खुद कानून की बारीकियों का गहराई से सीखा। एक छात्र के लिए इतनी मेहनत करना वाकई असाधारण है।
अथर्व ने किसी नामी वकील को फीस देने के बजाय खुद अपनी पैरवी करने का फैसला किया। उन्होंने जबलपुर से ही ऑनलाइन माध्यम से विशेष अनुमति याचिका (Special Leave Petition - SLP) दाखिल की।
सुप्रीम कोर्ट में वो 10 मिनट
फरवरी की एक दोपहर, जब सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही समाप्त होने वाली थी, अथर्व ने कोर्ट से अपनी बात रखने के लिए 10 मिनट का समय (वीडियो कांफ्रेंस के जरिए) मांगा। CJI सूर्यकांत की पीठ के सामने पेश हुए इस युवा छात्र के आत्मविश्वास ने सबको हैरान कर दिया।
जानें पूरी टाइमलाइन
जून 2025 में नीट का रिजल्ट आया।
10 जुलाई 2025 को हाईकोर्ट में याचिका दायर की
हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा की डिविजनल बेंच ने 16 नवंबर 2025 को आदेश जारी किया।
आदेश का परिपालन ना होने पर 1 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दर्ज की गई।
16 जनवरी से 10 फरवरी 2026 तक सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की कुल तीन बार सुनवाई हुई।
10 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी किया, (10 फरवरी को ही वीडियो कांफ्रेंस के जरिए अथर्व ने जज से 10 मिनट का समय मांगा था)
इसी दिन चीफ जस्टिस का जन्मदिन था और बेंच जल्दी उठने वाली थी।
आर्टिकल 142 का विशेष इस्तेमाल
कोर्ट ने देखा कि तकनीकी कमियों से छात्र का साल बर्बाद हो रहा है। इसके बाद अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल (Article 142 Utilization) किया। यह कानून सुप्रीम कोर्ट को विशेष शक्तियां प्रदान करता है। इसके जरिए जज किसी भी मामले में पूर्ण न्याय कर सकते हैं। भले ही नियम इसके लिए साफ तौर पर बने न हों।
अदालत ने छात्र के हक में यह बड़ा कदम उठाया। यह फैसला (MP News) गरीब छात्रों के लिए एक बड़ी उम्मीद बना है। इससे साबित हुआ कि न्याय के लिए कोई भी बाधा बड़ी नहीं है। छात्र को अब बिना रुकावट डॉक्टर बनने का मौका मिलेगा।
क्या है Article 142
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 142 सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) को "पूर्ण न्याय" (Complete Justice) सुनिश्चित करने की विशेष और असाधारण शक्ति देता है। यदि किसी मामले में मौजूदा कानून पर्याप्त न हों, तो कोर्ट इस अनुच्छेद का उपयोग कर ऐसा आदेश दे सकता है जो न्याय के लिए जरूरी हो।
यह शक्ति अयोध्या मामले और तलाक जैसे ऐतिहासिक फैसलों में इस्तेमाल हुई है, जो पूरे देश में कानून की तरह लागू होती है।
कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) और मध्य प्रदेश सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए:
अथर्व चतुर्वेदी और उनके जैसे अन्य योग्य EWS छात्रों को MBBS में प्रोविजनल प्रवेश (Provisional Admission) दिया जाए।
नियमों की व्याख्या के चक्कर में छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ न किया जाए।
निजी मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण की प्रक्रिया को स्पष्ट और सुव्यवस्थित किया जाए।
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