MP के NEET छात्र अथर्व चतुर्वेदी ने बिना वकील SC में जीता केस, अब मिलेगा एडमिशन
Manya Jain | Feb 14, 2026, 20:02 IST
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मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले अथर्व ने सुप्रीम कोर्ट में खुद पैरवी कर नीट एडमिशन का केस जीत लिया है। उन्होंने बिना वकील के अपनी बात रखी।
NEWS IN DETAIL
- अथर्व ने NEET में 530 अंक प्राप्त किए और बिना वकील के सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की।
- मध्य प्रदेश के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में EWS आरक्षण न मिलने पर उनका एडमिशन रुक गया।
- सुप्रीम कोर्ट ने Article 142 के तहत 'पूर्ण न्याय' की शक्ति का उपयोग कर फैसला सुनाया।
- फरवरी 2026 में CJI की पीठ के सामने अथर्व ने 10 मिनट में अपनी बात रखी और जीत हासिल की।
- कोर्ट ने NMC और सरकार को निर्देश दिया कि अथर्व जैसे छात्रों को MBBS में प्रोविजनल एडमिशन दिया जाए।
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पहले उन्होंने हाई कोर्ट में अपनी जीत दर्ज की थी। फिर 10 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने भी मुहर लगा दी। नियम की देरी की वजह से उनका एडमिशन रुक गया था। सिस्टम की इस गलती को अथर्व ने अदालत (jabalpur highcourt) में चुनौती दी।
उन्होंने खुद कानूनी किताबें पढ़कर अपना केस तैयार किया। यह जीत लाखों गरीब और होनहार छात्रों की जीत है। अब अथर्व जैसे मेहनती युवाओं का डॉक्टर बनना आसान होगा।
क्या था पूरा विवाद?
सरकार ने प्राइवेट संस्थानों को इस कोटे से बाहर रखा। अथर्व ने हिम्मत नहीं हारी और दोबारा नीट दी। रिश्तेदारों से मदद लेकर उन्होंने अपनी कोचिंग पूरी की। हाईकोर्ट में उनकी याचिका समय की कमी बताकर खारिज हुई।
इसके बाद वे इंसाफ के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। उन्होंने खुद कानून की बारीकियों का गहराई से सीखा। एक छात्र के लिए इतनी मेहनत करना वाकई असाधारण है।
अथर्व ने किसी नामी वकील को फीस देने के बजाय खुद अपनी पैरवी करने का फैसला किया। उन्होंने जबलपुर से ही ऑनलाइन माध्यम से विशेष अनुमति याचिका (Special Leave Petition - SLP) दाखिल की।
सुप्रीम कोर्ट में वो 10 मिनट
जानें पूरी टाइमलाइन
- जून 2025 में नीट का रिजल्ट आया।
- 10 जुलाई 2025 को हाईकोर्ट में याचिका दायर की
- हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा की डिविजनल बेंच ने 16 नवंबर 2025 को आदेश जारी किया।
- आदेश का परिपालन ना होने पर 1 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दर्ज की गई।
- 16 जनवरी से 10 फरवरी 2026 तक सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की कुल तीन बार सुनवाई हुई।
- 10 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी किया, (10 फरवरी को ही वीडियो कांफ्रेंस के जरिए अथर्व ने जज से 10 मिनट का समय मांगा था)
- इसी दिन चीफ जस्टिस का जन्मदिन था और बेंच जल्दी उठने वाली थी।
आर्टिकल 142 का विशेष इस्तेमाल
अदालत ने छात्र के हक में यह बड़ा कदम उठाया। यह फैसला (MP News) गरीब छात्रों के लिए एक बड़ी उम्मीद बना है। इससे साबित हुआ कि न्याय के लिए कोई भी बाधा बड़ी नहीं है। छात्र को अब बिना रुकावट डॉक्टर बनने का मौका मिलेगा।
क्या है Article 142
यह शक्ति अयोध्या मामले और तलाक जैसे ऐतिहासिक फैसलों में इस्तेमाल हुई है, जो पूरे देश में कानून की तरह लागू होती है।
कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश
- अथर्व चतुर्वेदी और उनके जैसे अन्य योग्य EWS छात्रों को MBBS में प्रोविजनल प्रवेश (Provisional Admission) दिया जाए।
- नियमों की व्याख्या के चक्कर में छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ न किया जाए।
- निजी मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण की प्रक्रिया को स्पष्ट और सुव्यवस्थित किया जाए।
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