16 साल की उम्र में कॉलेज और 40 की उम्र में वर्ल्ड रिकॉर्ड, मिलिए मैथ्स की जादूगर नलिनी से

Anjali Dwivedi | Mar 09, 2026, 13:25 IST
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गणितज्ञ नलिनी अनंतरामन ने क्वांटम कैओस और एर्गोडिक थ्योरी जैसे जटिल विषयों में महारत हासिल कर दुनिया में भारत का नाम रोशन किया है। जानिए उनके बचपन से लेकर अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों तक का सफर।

Education news. गणित को अक्सर संख्याओं और फॉर्मूलों का एक उबाऊ जाल माना जाता है। एक भारतीय - फ्रांसीसी गणितज्ञ नलिनी अनंतरामन के लिए Mathsएक रचनात्मक कैनवास की तरह है। आज दुनिया उन्हें गणित की जादूगर कह रही है। जटिल विषयों जैसे क्वांटम कैओस और एर्गोडिक थ्योरी में उनके शोध ने उन्हें ग्लोबल लेवल पर एक नई पहचान दी है।

नलिनी का काम मुख्य रूप से ज्योमेट्री एनालिसिस और मैथेमेटिकल फिजिक्स के बीच के फासले को मिटाता है। उनकी सफलता की कहानी केवल समीकरणों के बारे में नहीं है, बल्कि खुद की जिज्ञासा और आत्मविश्वास पर भरोसा करने की है।

पेरिस से ऑरलियंस तक का सफर

नलिनी अनंतरामन का जन्म 26 फरवरी 1976 को फ्रांस की राजधानी पेरिस में हुआ था। उनके माता-पिता दोनों ही गणितज्ञ थे और ऑरलियंस यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के तौर पर कार्यरत थे। नलिनी का बचपन ऑरलियंस शहर में बीता, जहां घर के माहौल ने ही उनके मन में गणित के बीज बो दिए थे।

नलिनी ने गणित को रटने के बजाय एक आर्टिस्टिक और क्रिएटिव फील्ड के रूप में देखा। बचपन की यही सीख कि हर सवाल में एक नया रास्ता छिपा होता है, उनके भविष्य की नींव बनी।

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स्कूल टीचर के चैलेंज जिसने बदल दी जिंदगी

फ्रेंच नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च (CNRS) के मुताबिक, नलिनी को शुरुआती प्रेरणा तो परिवार से मिली। लेकिन उनकी प्रतिभा को धार देने का काम उनकी स्कूल टीचर ने किया। उनकी टीचर जानबूझकर उन्हें गणित की सबसे कठिन समस्याएं हल करने के लिए देती थीं। इन चुनौतियों ने नलिनी के भीतर की झिझक को खत्म किया और उन्हें मोटिवेट किया कि वे मुश्किल रास्तों से डरे नहीं।

16 साल की उम्र में कॉलेज

जिस समय विज्ञान और गणित (STEM) के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बहुत कम थी, नलिनी ने अपनी प्रतिभा से सबको हैरान कर दिया। महज 16 साल की उम्र में उन्होंने पेरिस के मशहूर संस्थान एकोल नॉर्मेल सुपेरियर (ENS) में दाखिला ले लिया। उस समय इस संस्थान में महिलाओं की संख्या 20% से भी कम थी। मुश्किल हालात और कम प्रतिनिधित्व के बावजूद, नलिनी ने अपनी मेहनत से गणित की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई।

रिसर्च का सफर और प्रोफेसर की जिम्मेदारी

साल 2000 में नलिनी ने यूनिवर्सिटी पियरे एट मैरी क्यूरी से अपनी डॉक्टरेट (PhD) पूरी की। उनकी रिसर्च का मुख्य केंद्र डायनामिकल सिस्टम और जियोडेसिक फ्लो की ज्योमेट्री था। इसके बाद उनका एकेडमिक सफर काफी शानदार रहा।

साल 2006 में उन्होंने हैडमार्ड जैसी प्रतिष्ठित प्रोफेसरशिप संभाली। 2009 में वे यूनिवर्सिटी ऑफ पेरिस-सूद में फुलटाइम प्रोफेसर बनीं। इतना ही नहीं, उन्होंने बर्कले और प्रिंसटन जैसे दुनिया के सबसे बड़े संस्थानों में भी विजिटिंग प्रोफेसर के तौर पर समय बिताया।

ग्लोबल मंच पर पुरस्कारों की बौछार

नलिनी के शोध ने यह समझने में मदद की कि जटिल प्रणालियों में व्यवस्था और अनियमितता कैसे एक साथ काम करते हैं। उनके इस योगदान के लिए उन्हें कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले।

  • 2011: सलेम प्राइज और ग्रैंड प्रिक्स जैक्स हर्ब्रांड।
  • 2012: मैथेमेटिकल फिजिक्स के लिए प्रतिष्ठित हेनरी पोंकारे प्राइज (Henri Poincaré Prize)।
  • 2018: रियो डी जेनेरियो में इंटरनेशनल कांग्रेस ऑफ मैथमेटिशियंस में प्लेनरी स्पीकर।
  • 2018: क्वांटम कैओस के लिए इंफोसिस प्राइज।
  • 2020: मैथमेटिक्स में नेमर्स प्राइज (Nemours Prize)।
नलिनी खुद को फ्री इलेक्ट्रॉन कहती हैं, क्योंकि वे लीक से हटकर सोचना पसंद करती हैं। उनका जीवन संदेश स्पष्ट है। खुद को चुनौती दें और वह लक्ष्य चुनें जिसे पहले किसी ने न चुना हो।

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