UGC ने एलाइड हेल्थकेयर डिग्री में किए बड़े बदलाव, अब स्पेशलाइजेशन के साथ होंगे MPT और MOT
Manya Jain | Sept 20, 2026, 18:50 IST
MPT और MOT करने वाले छात्रों को झटका
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग- UGC ने स्वास्थ्य सेवा में डिग्री कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण परिवर्तन करने का निर्णय लिया है। ये परिवर्तन शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होंगे, जिसमें मास्टर डिग्री को वश् प्रदान किया जाएगा। बैचलर डिग्री की अवधि को 4.5 साल से बढ़ाकर 5 साल कर दिया गया है। इस बदलाव का प्रभाव वर्तमान छात्रों पर नहीं पड़ेगा। विश्वविद्यालयों को अपने पाठ्यक्रमों का पुनर्गठन करना आवश्यक होगा। पढ़ें पूरी डिटेल
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC ने एलाइड एंड हेल्थकेयर डिग्री से जुड़े कार्यक्रमों की संरचना में कुछ बदलाव किए हैं, जो शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू किए गए हैं। इन बदलावों में मास्टर ऑफ फिजियोथेरेपी (MPT) और मास्टर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी (MOT) से जुड़े कार्यक्रम शामिल हैं। अब इन पाठ्यक्रमों को सामान्य डिग्री के तौर पर नहीं, बल्कि विशिष्ट विशेषज्ञताओं के साथ ही ऑफर किया जाएगा।
UGC की तरफ से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक केंद्र सरकार की स्वीकृति के बाद यह बदलाव 27 अगस्त 2026 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित किए गए। अब छात्रों को MPT और MOT डिग्री विशिष्ट विशेषताओं यानी स्पेशलाइजेशन के साथ हासिल करनी होगी। इसके तहत कई नई विशेषज्ञताएं भी जोड़ी गई हैं। आयोग ने नोटिफिकेशन में इन कार्यक्रमों के अंतर्गत नई डिग्रियों के नाम और विशेषज्ञताओं की पूरी जानकारी दी है। यह बदलाव मौजूदा छात्रों पर लागू नहीं होगा।
अब विशेष योग्यताओं के साथ ही MPT और MOT डिग्री प्रदान की जाएगी। नए स्ट्रक्चर के तहत विश्वविद्यालयों को अपने मौजूदा कार्यक्रमों का पुनर्गठन भी करना होगा।
इस बदलाव के तहत बैचलर ऑफ ऑप्टोमेट्री की न्यूनतम अवधि 4 साल से बढ़ाकर 5 साल कर दी गई है। बैचलर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी की अवधि साढ़े 4 साल से बढ़ाकर 5 साल की गई है। इसी तरह बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी की अवधि भी साढ़े 4 साल से बढ़ाकर 5 साल कर दी गई है। वहीं मास्टर्स प्रोग्राम की अवधि पहले की तरह 2 साल ही रहेगी।
UGC ने नोटिफिकेशन में कई नई विशिष्ट डिग्रियों की जानकारी भी दी है। इस सूची में बैचलर ऑफ मेडिकल लैबोरेट्री साइंस, मेडिकल बायोकेमिस्ट्री में मास्टर ऑफ मेडिकल लैबोरेट्री साइंस, मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी में मास्टर्स ऑफ मेडिकल लैबोरेट्री साइंस, हेमेटोलॉजी और ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन में मास्टर्स ऑफ मेडिकल लैबोरेट्री साइंस, हिस्टोलॉजी और साइटोपैथोलॉजी में मास्टर्स ऑफ मेडिकल लैबोरेट्री साइंस जैसी डिग्रियां शामिल हैं।
इसके अलावा बैचलर ऑफ इमरजेंसी मेडिकल टेक्नोलॉजिस्ट पैरामेडिक्स, रेडिएशन थेरेपी टेक्नोलॉजी में मास्टर्स ऑफ एडवांस्ड केयर पैरामेडिक्स जैसी डिग्रियां भी इस सूची में जोड़ी गई हैं। पूरी सूची आधिकारिक नोटिफिकेशन में देखी जा सकती है।
MPT यानी मास्टर ऑफ फिजियोथेरेपी की सूचीबद्ध विशेषज्ञताओं में मस्कुलोस्केलेटल साइंसेज, पीडियाट्रिक्स, न्यूरोसाइंसेज, मेंटल हेल्थ, कार्डियोवैस्कुलर और रिहैबिलिटेशन जैसी शाखाएं शामिल हैं।
वहीं MOT यानी मास्टर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी कार्यक्रमों में न्यूरोसाइंसेज, कार्डियो-पल्मोनरी साइंसेज, स्पोर्ट्स साइंसेज, पीडियाट्रिक्स एंड नियोनेटल साइंसेज, ऑन्कोलॉजी साइंसेज और कम्युनिटी रिहैबिलिटेशन साइंसेज जैसी विशेषज्ञताएं शामिल की गई हैं।
UGC की तरफ से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक केंद्र सरकार की स्वीकृति के बाद यह बदलाव 27 अगस्त 2026 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित किए गए। अब छात्रों को MPT और MOT डिग्री विशिष्ट विशेषताओं यानी स्पेशलाइजेशन के साथ हासिल करनी होगी। इसके तहत कई नई विशेषज्ञताएं भी जोड़ी गई हैं। आयोग ने नोटिफिकेशन में इन कार्यक्रमों के अंतर्गत नई डिग्रियों के नाम और विशेषज्ञताओं की पूरी जानकारी दी है। यह बदलाव मौजूदा छात्रों पर लागू नहीं होगा।
विश्वविद्यालयों को करना होगा कार्यक्रमों का पुनर्गठन
इस बदलाव के तहत बैचलर ऑफ ऑप्टोमेट्री की न्यूनतम अवधि 4 साल से बढ़ाकर 5 साल कर दी गई है। बैचलर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी की अवधि साढ़े 4 साल से बढ़ाकर 5 साल की गई है। इसी तरह बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी की अवधि भी साढ़े 4 साल से बढ़ाकर 5 साल कर दी गई है। वहीं मास्टर्स प्रोग्राम की अवधि पहले की तरह 2 साल ही रहेगी।
कई नई विशेष डिग्रियां भी जोड़ी गईं
इसके अलावा बैचलर ऑफ इमरजेंसी मेडिकल टेक्नोलॉजिस्ट पैरामेडिक्स, रेडिएशन थेरेपी टेक्नोलॉजी में मास्टर्स ऑफ एडवांस्ड केयर पैरामेडिक्स जैसी डिग्रियां भी इस सूची में जोड़ी गई हैं। पूरी सूची आधिकारिक नोटिफिकेशन में देखी जा सकती है।
MPT और MOT में कौन-कौन सी विशेषज्ञताएं शामिल
वहीं MOT यानी मास्टर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी कार्यक्रमों में न्यूरोसाइंसेज, कार्डियो-पल्मोनरी साइंसेज, स्पोर्ट्स साइंसेज, पीडियाट्रिक्स एंड नियोनेटल साइंसेज, ऑन्कोलॉजी साइंसेज और कम्युनिटी रिहैबिलिटेशन साइंसेज जैसी विशेषज्ञताएं शामिल की गई हैं।
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