कौन हैं अरुणाचलम मुरुगनाथम? जिन्हें नोबेल शांति पुरस्कार 2026 के लिए किया गया है नॉमिनेट
Anjali Dwivedi | May 04, 2026, 18:13 IST
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भारत के पैडमैन अरुणाचलम मुरुगनाथम को साल 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है। सस्ती सैनिटरी पैड मशीन बनाने वाले मुरुगनाथम दुनिया के 287 दिग्गजों की रेस में शामिल हैं।
भारत के लिए एक गौरवशाली क्षण सामने आया है। महिलाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता के क्षेत्र में क्रांति लाने वाले सोशल एंटरप्रेन्योर अरुणाचलम मुरुगनाथम, जिन्हें दुनिया पैडमैन के नाम से जानती है।
अब वो विश्व के सबसे बड़े सम्मान की दौड़ में शामिल हो गए हैं। रविवार 3 मई को मुरुगनाथम ने खुद यह जानकारी साझा की है कि उन्हें साल 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है।
तमिलनाडु के एक छोटे से गांव से अपनी यात्रा शुरू करने वाले मुरुगनाथम ने कभी नहीं सोचा था कि उनका काम उन्हें नोबेल समिति तक ले जाएगा। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्हें इस उपलब्धि पर भरोसा ही नहीं हुआ।
मुरुगनाथम के मुताबिक, पुडुचेरी के अरविंद आई हॉस्पिटल के एक डीन और वहां काम करने वाली अमेरिकी टीमों ने उनके नाम का प्रस्ताव भेजा था। हैरानी की बात यह रही कि नोबेल कमेटी ने महज 24 घंटे के भीतर इस नामांकन को स्वीकार कर लिया।
अक्सर लोगों को लगता है कि नोबेल के लिए आवेदन किया जा सकता है, लेकिन मुरुगनाथम ने इस भ्रम को दूर किया। उन्होंने बताया कि इस पुरस्कार के लिए कोई व्यक्ति खुद का, अपने परिवार का या दोस्तों का नाम नहीं भेज सकता।
यह हमेशा किसी तीसरे पक्ष द्वारा ही किया जाना चाहिए। उनके मामले में भी विशेषज्ञों की एक टीम ने उनके काम के प्रभाव को देखते हुए यह कदम उठाया।
साल 2026 के शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize) के लिए मुकाबला काफी कड़ा होने वाला है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस साल कुल 287 उम्मीदवारों को नामांकित किया गया है, जिनमें 208 व्यक्ति और 79 संगठन शामिल हैं। मुरुगनाथम का नाम इस सूची में शामिल होना ही अपने आप में उनके काम की वैश्विक स्वीकृति को दर्शाता है।
नामांकन तो सिर्फ पहली सीढ़ी है, असली चुनौती इसके बाद शुरू होती है। नोबेल समिति की मूल्यांकन प्रक्रिया बेहद जटिल होती है। किसी भी नाम पर मुहर लगाने से पहले दुनिया भर के बड़े विशेषज्ञों और शिक्षाविदों से राय ली जाती है।
समिति उम्मीदवार के रिसर्च पेपर, लेख और समाज पर पड़े प्रभाव की बारीकी से समीक्षा करती है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पुरस्कार का हकदार सबसे योग्य व्यक्ति ही हो।
तमिलनाडु के रहने वाले मुरुगनाथम एक साधारण व्यक्ति हैं, जिन्होंने असाधारण काम किया। उन्होंने देखा कि ग्रामीण इलाकों में महिलाएं स्वच्छता के अभाव में बीमारियों का शिकार हो रही हैं।
इसके बाद उन्होंने एक ऐसी सस्ती मशीन विकसित की, जिससे कम कीमत पर सैनिटरी पैड बनाए जा सकते हैं। उनके इस आविष्कार ने न केवल महिलाओं को स्वास्थ्य दिया, बल्कि हजारों को रोजगार भी उपलब्ध कराया।
मुरुगनाथम की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है, इसीलिए साल 2018 में डायरेक्टर आर. बाल्की ने उनके जीवन पर आधारित फिल्म पैडमैन (Padman) बनाई। इसमें अक्षय कुमार ने मुरुगनाथम का किरदार निभाया था।
इस फिल्म ने समाज में पीरियड्स और पैड से जुड़ी वर्जनाओं को तोड़ने का काम किया और नेशनल अवार्ड भी जीता। आज वही असली नायक दुनिया के सबसे बड़े मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रहा है।
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अब वो विश्व के सबसे बड़े सम्मान की दौड़ में शामिल हो गए हैं। रविवार 3 मई को मुरुगनाथम ने खुद यह जानकारी साझा की है कि उन्हें साल 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है।
नोबेल शांति पुरस्कार की रेस में भारत के पैडमैन
मुरुगनाथम के मुताबिक, पुडुचेरी के अरविंद आई हॉस्पिटल के एक डीन और वहां काम करने वाली अमेरिकी टीमों ने उनके नाम का प्रस्ताव भेजा था। हैरानी की बात यह रही कि नोबेल कमेटी ने महज 24 घंटे के भीतर इस नामांकन को स्वीकार कर लिया।
कैसे होता है नामांकन?
यह हमेशा किसी तीसरे पक्ष द्वारा ही किया जाना चाहिए। उनके मामले में भी विशेषज्ञों की एक टीम ने उनके काम के प्रभाव को देखते हुए यह कदम उठाया।
287 दिग्गजों के बीच भारत का पैडमैन
एक्सपर्ट्स करेंगे आकलन
समिति उम्मीदवार के रिसर्च पेपर, लेख और समाज पर पड़े प्रभाव की बारीकी से समीक्षा करती है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पुरस्कार का हकदार सबसे योग्य व्यक्ति ही हो।
कौन हैं अरुणाचलम मुरुगनाथम?
इसके बाद उन्होंने एक ऐसी सस्ती मशीन विकसित की, जिससे कम कीमत पर सैनिटरी पैड बनाए जा सकते हैं। उनके इस आविष्कार ने न केवल महिलाओं को स्वास्थ्य दिया, बल्कि हजारों को रोजगार भी उपलब्ध कराया।
अक्षय कुमार ने निभाया मुरुगनाथम का रोल
इस फिल्म ने समाज में पीरियड्स और पैड से जुड़ी वर्जनाओं को तोड़ने का काम किया और नेशनल अवार्ड भी जीता। आज वही असली नायक दुनिया के सबसे बड़े मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रहा है।
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