खूबसूरती के लिए चेहरे पर बरसाए जाते हैं हथौड़े और मुक्के, क्या है लिम्फैटिक तकनीक?
Anjali Dwivedi | May 09, 2026, 19:19 IST
Photograph: (THESOOTR)
चेहरे की सूजन घटाने के लिए लोग 35 हजार रुपए खर्च कर पिटाई करवा रहे हैं। जापान की 'कोगाओ क्यूसेई' तकनीक से चेहरा स्लिम बनाया जाता है। 2.20 लाख करोड़ का है यह दर्दनाक ब्यूटी ट्रीटमेंट बाजार।
आधुनिक जीवनशैली (lifestyle) में ब्लॉटेड चेहरा एक ऐसा अभिशाप बन गया है, जिसे हम नजरअंदाज नहीं कर सकते। भारी गाल और सूजी हुई आंखें अक्सर स्नैक्स, प्रदूषण या कम नींद का नतीजा होती हैं। आज की दुनिया में लोग इस सूजन से मुक्ति पाने के लिए अरबों डॉलर खर्च कर रहे हैं।
चेहरे को स्लिम और तराशा हुआ बनाने की चाहत ने एक विशाल बाजार खड़ा कर दिया है। इसी उम्मीद में लेखिका एमी वॉन्ग टोक्यो के एक मशहूर फेस करेक्शन क्लिनिक में जा पहुंचीं।
टोक्यो के इन क्लीनिकों में कोगाओ क्यूसेई नामक एक अनोखी और दर्दनाक प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसका शाब्दिक अर्थ छोटे चेहरे का सुधार है, लेकिन यह प्रक्रिया काफी डरावनी महसूस होती है। उपचार के दौरान एमी को लगा जैसे कोई उनके चेहरे को आटा समझकर जोर से गूंथ रहा हो।
चेहरे पर मुक्कों, थप्पड़ों और लकड़ी के हथौड़ों से प्रहार करना इस ट्रीटमेंट का हिस्सा है। थेरेपिस्ट ने उनके कानों को इतनी शक्ति से खींचा कि उन्हें कान उखड़ने का डर सताने लगा।
पश्चिम में इसी तरह की प्रक्रिया को ड्रेनेज लिम्फैटिक तकनीक के नाम से जाना जाता है। यह शरीर के अपशिष्ट तरल पदार्थों को बाहर निकालकर चेहरे की सूजन कम करने का तरीका है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह सनक केवल सुंदरता के लिए नहीं बल्कि अशुद्धियों से मुक्ति की छटपटाहट है। लोग प्रोसेस्ड फूड और माइक्रोप्लास्टिक्स के दुष्प्रभावों को अपने शरीर से पूरी तरह मिटाना चाहते हैं। इसके लिए वे जेड रोलर, माइक्रोकरंट डिवाइस और फेसजिम जैसे महंगे उपकरणों का सहारा ले रहे हैं।
इस दर्दनाक ब्यूटी ट्रीटमेंट का बाजार आज दुनिया भर में बहुत तेजी से फैल रहा है। एक बार के उपचार पर लोग करीब 20 से 35 हजार रुपए खर्च कर रहे हैं। वर्तमान में इस उद्योग का वैश्विक बाजार लगभग 2.20 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। यह बाजार हर साल 16.7% की भारी विकास दर के साथ आगे बढ़ रहा है। लोग खुद को सजा देकर भी उस आदर्श चेहरे को पाने की दौड़ में शामिल हैं।
एमी वॉन्ग बताती हैं कि इतनी पिटाई सहने के बाद जब उन्होंने आईना देखा तो हैरान रह गईं। उनका चेहरा पूरी तरह गायब नहीं हुआ था, लेकिन पहले से काफी ज्यादा बदल चुका था।
पुरानी सूजन हटने के बाद उनके चेहरे की हड्डियों की बनावट अब साफ नजर आ रही थी। उन्हें लगा जैसे किसी मूर्तिकार ने पत्थर को तराश कर भीतर छिपी हुई मूरत निकाल दी हो। यह अनुभव दर्दनाक होने के बावजूद अंत में उन्हें एक नई खुशी दे गया।
एस्थेटिक्स एक्सपर्ट जिया टोलेंटिनो के अनुसार, यह पूरा खेल असल में नियंत्रण पाने की कोशिश है। जब दुनिया हमारे काबू से बाहर होती है, तब हम अपने शरीर पर नियंत्रण चाहते हैं। हवा जहरीली है और तकनीक हमें हर पल ट्रैक कर रही है, जिससे मानसिक तनाव बढ़ता है।
अपने चेहरे को उंगलियों से कुचलवाकर लोग महसूस करते हैं कि वे खुद को सुधार रहे हैं। इस अनिश्चित दौर में तराशा हुआ चेहरा ही शायद सुरक्षा का अंतिम किला महसूस होता है।
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चेहरे को स्लिम और तराशा हुआ बनाने की चाहत ने एक विशाल बाजार खड़ा कर दिया है। इसी उम्मीद में लेखिका एमी वॉन्ग टोक्यो के एक मशहूर फेस करेक्शन क्लिनिक में जा पहुंचीं।
छोटे चेहरे का जापानी और अनोखा उपचार
चेहरे पर मुक्कों, थप्पड़ों और लकड़ी के हथौड़ों से प्रहार करना इस ट्रीटमेंट का हिस्सा है। थेरेपिस्ट ने उनके कानों को इतनी शक्ति से खींचा कि उन्हें कान उखड़ने का डर सताने लगा।
शरीर की गंदगी बाहर निकालने की जिद
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह सनक केवल सुंदरता के लिए नहीं बल्कि अशुद्धियों से मुक्ति की छटपटाहट है। लोग प्रोसेस्ड फूड और माइक्रोप्लास्टिक्स के दुष्प्रभावों को अपने शरीर से पूरी तरह मिटाना चाहते हैं। इसके लिए वे जेड रोलर, माइक्रोकरंट डिवाइस और फेसजिम जैसे महंगे उपकरणों का सहारा ले रहे हैं।
लाखों करोड़ों का वैश्विक बाजार
दर्द के बाद मिलता है आदर्श चेहरा
पुरानी सूजन हटने के बाद उनके चेहरे की हड्डियों की बनावट अब साफ नजर आ रही थी। उन्हें लगा जैसे किसी मूर्तिकार ने पत्थर को तराश कर भीतर छिपी हुई मूरत निकाल दी हो। यह अनुभव दर्दनाक होने के बावजूद अंत में उन्हें एक नई खुशी दे गया।
एस्थेटिक्स एक्सपर्ट जिया टोलेंटिनो के अनुसार, यह पूरा खेल असल में नियंत्रण पाने की कोशिश है। जब दुनिया हमारे काबू से बाहर होती है, तब हम अपने शरीर पर नियंत्रण चाहते हैं। हवा जहरीली है और तकनीक हमें हर पल ट्रैक कर रही है, जिससे मानसिक तनाव बढ़ता है।
अपने चेहरे को उंगलियों से कुचलवाकर लोग महसूस करते हैं कि वे खुद को सुधार रहे हैं। इस अनिश्चित दौर में तराशा हुआ चेहरा ही शायद सुरक्षा का अंतिम किला महसूस होता है।
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