भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की रिपोर्ट में यह अधिकारी दोषी, MIC को क्लीन चिट
Sanjay Gupta | Aug 29, 2026, 16:05 IST
bhagirathpura water case report
भागीरथपुरा दूषित पानी कांड पर मप्र हाईकोर्ट कमेटी की रिपोर्ट गोपनीय है। लेकिन द सूत्र को मिली पुख्ता जानकारी में इस रिपोर्ट के अहम बिंदु सामने आ गए हैं। मुआवजा राशि 20 लाख की अनुशंसा हुई है।
इंदौर में दिसंबर 2025 में सामने आए भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की रिपोर्ट रजिस्ट्रार के पास संबंधित याचिकाकर्ता के वकील देख सकते हैं। यह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होगी। लेकिन द सूत्र को मिली पुख्ता जानकारी के आधार पर द सूत्र इस रिपोर्ट के अहम बिंदु सार्वजनिक कर रहा है।
हाईकोर्ट ने 27 जनवरी को रिटायर जस्टिस सुशील गुप्ता का एक सदस्यीय जांच दल बनाया था। यह रिपोर्ट सात दिन पहले सबमिट हुई थी। जांच में अधिकारियों को मुख्य रूप से दोषी माना गया है जिन्होंने पाइप लाइन काम में देरी की। हालांकि एमआईसी को क्लीन चिट दी गई है और किसी जनप्रतिनिधि को इसमें दोषी नहीं माना गया है।
जांच कमीशन ने जांच के बाद पाया कि इस घटना के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी अधिकारियों की रही है। टेंडर प्रक्रिया में देरी के कारण यह घटना हुई है। यदि समय पर लाइन बदल जाती तो दूषित पानी की वजह नहीं होती। इसके लिए रिपोर्ट में बार-बार मुख्य कार्यपालन यंत्री जल विभाग संजीव श्रीवास्तव का नाम आया है। इनके द्वारा भारी लापरवाही की गई है।
इसके साथ ही इसमें तत्कालीन अपर आयुक्त आईएएस रोहित सिसोनिया द्वारा टेंडर में देरी की भी बात रिपोर्ट में हैं
- इसके साथ ही कुछ तत्कालीन अपर आयुक्त की भी लापरवाही की बात रिपोर्ट में है।। साथ ही एस. प्रजापति व अन्य द्वारा की गई लापरवाही की भी बात रिपोर्ट में कही गई है। रिपोर्ट में पूर्व निगमायुक्त दिलीप यादव, शिवम वर्मा को क्लीन चिट दी गई है।
उधर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और याचिकाकर्ता प्रमोद द्विवेदी व महेश गर्ग के अधिवक्ता ने इंटरविनर याचिका दायर की है। साथ ही अधिवक्ता रितेश इनानी ने भी याचिका लगाई है। इसमें अन्य याचिकाओं से इन याचिका को अलग करने, लाइव स्ट्रीमिंग शुरू करने, रिपोर्ट को सार्वजनिक करने और कापी देने की मांग रखी गई है। इस पर अगली सुनवाई में जिरह होगी।
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मुआवजा
हाईकोर्ट ने 27 जनवरी को रिटायर जस्टिस सुशील गुप्ता का एक सदस्यीय जांच दल बनाया था। यह रिपोर्ट सात दिन पहले सबमिट हुई थी। जांच में अधिकारियों को मुख्य रूप से दोषी माना गया है जिन्होंने पाइप लाइन काम में देरी की। हालांकि एमआईसी को क्लीन चिट दी गई है और किसी जनप्रतिनिधि को इसमें दोषी नहीं माना गया है।
इन अधिकारियों की मानी गई भूमिका
इसके साथ ही इसमें तत्कालीन अपर आयुक्त आईएएस रोहित सिसोनिया द्वारा टेंडर में देरी की भी बात रिपोर्ट में हैं
- इसके साथ ही कुछ तत्कालीन अपर आयुक्त की भी लापरवाही की बात रिपोर्ट में है।। साथ ही एस. प्रजापति व अन्य द्वारा की गई लापरवाही की भी बात रिपोर्ट में कही गई है। रिपोर्ट में पूर्व निगमायुक्त दिलीप यादव, शिवम वर्मा को क्लीन चिट दी गई है।
अधिवक्ताओं ने लगाई याचिका
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