News Strike: अध्यक्ष बने हेमंत खंडेलवाल के सामने कितनी चुनौतियां, मिलेगी सिर्फ इतनी मोहलत ?
Harish Divekar | Jul 05, 2025, 07:00 IST
Photograph: (The Sootr)
हेमंत खंडेलवाल ने अध्यक्ष पद संभालते ही पार्टी के सख्त अनुशासन की दिशा में संकेत दिए हैं। हालांकि, उनके लिए आने वाली राह आसान नहीं होगी, क्योंकि उन्होंने एक सफल विरासत संभाली है।
अध्यक्ष पद की कमान संभालते ही हेमंत खंडेलवाल ने ये संकेत दे दिए हैं कि वो पार्टी लाइन का बहुत सख्ती से पालन करने और कराने वाले हैं। लेकिन क्या ये इतना आसान होगा। ये तय है कि खंडेलवाल के इस पद पर आने के बाद पार्टी में बदलाव की झड़ी लग जाएगी। पर खंडेलवाल के लिए भी आने वाली राह बहुत आसान नहीं है। उन्हें ऐसी विरासत मिली है जो बेहद कामयाब रही है। इसलिए किसी से चैलेंज लेने से पहले खंडेलवाल को खुद से चैलेंज लेना होगा। इसके अलावा भी कुछ चुनौतियां होंगी जिससे पार्टी के नए अध्यक्ष दो चार होंगे।
कोई बहुत चैलेंजिंग पॉजिशन मिलती है तो कहा जाता है कांटों से भरा ताज मिलना। लेकिन खंडेलवाल के लिए मामला उल्टा है। उन्हें मखमलों से भरा सिंहासन मिला है। कामयाबी के पंखों से सजा ताज मिला है और जीत के तमगों से भरा हार मिला है। इसके बाद भी खंडेलवाल के लिए चैन से बैठना आसान नहीं होगा। वो जहां भी जाएंगे यकीनन कार्यकर्ता उनके रास्तों में फूल बिछाएंगे। दिखने में तो वो गुलाब होंगे लेकिन खंडेलवाल को हर कदम पर कांटों की चुभन भी झेलनी ही पड़ेगी।
वीडी शर्मा के लंबे कार्यकाल के बाद हेमंत खंडेलवाल को ये पद संभालने का मौका मिला है। वो पर्सनली सीएम मोहन यादव की पसंद माने जाते हैं। इसके अलावा वो संघ के करीबी भी हैं। पार्टी को अच्छी तरह से समझते हैं। शायद इसलिए सबसे पहले यही अल्टीमेटम दिया है कि पार्टी की रीति नीति से जरा भी इधर उधर होना किसी के लिए भी अच्छा नहीं होगा। इसके अलावा भी कुछ कारण ऐसे हैं कि वो इस पद की रेस जीतने में कामयाब रहे।
दुर्गादास उइके, नरोत्तम मिश्रा जैसे धुरंधर उनसे ये रेस हार गए। इसके मोटे मोटे कारणों पर पहले बात कर लेते हैं। अक्सर सफेद शर्ट या सफेद कुर्ता पहनने वाले खंडेलवाल की छवि भी पार्टी में उनके कपड़ों की ही तरह बेदाग है। वो अमूमन विवादों से दूर ही रहे हैं इसलिए पार्टी ने उन्हें चुना है। दूसरा कारण है संगठन से जुड़ा पुराना अनुभव। वो बैतूल में जिलाध्यक्ष पद पर रहे हैं। कोषाध्यक्ष का पद भी संभाल चुके हैं। इन पदों पर रहते हुए भी वो हमेशा लो प्रोफाइल रहे। उनके नाम पर कोई ऐसे बयान भी दर्ज नहीं हैं जो विवादित हों या अभद्र हों।
ये भी पढ़ें... निर्विरोध प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चुने गए हेमंत खंडेलवाल, अनुशासन क्या होता है...कोई बीजेपी से सीखे
खंडेलवाल के बहाने बीजेपी ने जातिगत समीकरण और क्षेत्रीय समीकरण साधने की कोशिश की ही है। फिलहाल सीएम मोहन यादव मालवा से आते हैं। डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा भी मालवा के ही हैं। दूसरे डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला की वजह से विंध्य संभला हुआ है। महाकौशल और बुंदेलखंड से मंत्री बने हैं। अब खंडेलवाल के बहाने मध्य को साधा गया है। इसके अलावा ओबीसी वर्ग के सीएम तो सामान्य वर्ग के प्रदेशाध्यक्ष बनाकर बीजेपी ने जातिगत समीकरण भी साधे हैं। देखा जाए तो ये जोड़ी भी शिवराज और वीडी शर्मा की जोड़ी की तरह ही है जिसके जरिए ओबीसी और सामान्य दोनों ही वर्ग संभालना आसान हो जाता है।
एक कारण खंडेलवाल का संघ का करीबी होना भी है। उनके चयन में संघ की सहमति भी शामिल मानी जा रही है। बीजेपी ने भी इस बार सांसद की जगह विधायक को चुना। उसके पीछे सोच ये मानी जा रही है कि लोकल लीडर होने से कार्यकर्ताओं में ज्यादा उत्साह होगा और संगठन ज्यादा मजबूत होगा। बस पार्टी की इसी अपेक्षा के साथ खंडेलवाल के सामने चुनौतियां शुरू हो जाती हैं।
ये भी पढ़ें... News Strike: टेक होम राशन घोटाले में शिकायत दर्ज, पूर्व मुख्य सचिव पर कस सकता है शिकंजा
वैसे अभी चुनाव में तीन साल का वक्त है। इसका ये मतलब नहीं है कि खंडेलवाल के सामने बहुत ज्यादा समय है। जिस पद पर वो हैं, वहां तीन साल देखते देखते कब निकल जाएंगे इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता है। इन तीन साल में खंडेलवाल को सबसे पहले पार्टी की नई टीम तैयार करनी है। जिलाध्यक्षों की नियुक्ति के बाद हर जिला लेवल पर टीम बनानी है। कुछ और भी अहम काम हैं। जैसे निगम मंडलों में नियुक्ति करनी है। रूठे हुए नेताओं को मनाना है और बिदके हुए नेताओं को पार्टी लाइन पर वापस लाना है। चुनौतियां इतने पर ही खत्म नहीं होती।
वीडी शर्मा के अध्यक्ष बनने के बाद से बीजेपी का सफर लाजवाब रहा है। सबसे पहले 2020 में बड़ा फेरबदल हुआ और बीजेपी की सत्ता में वापसी हुई। उसके बाद बीजेपी ने उपचुनाव भी जीते और 2023 में हुए विधानसभा चुनाव भी तबियत से जीता। लोकसभा चुनाव में तो बीजेपी ने कांग्रेस का सूपड़ा ही साफ कर दिया। खंडेलवाल के सामने चुनौती होगी जीत के इस सफर का बरकरार रखने की। इसलिए हमने कहा था कि भले ही ताज कामयाबी से भरा हुआ मिला हो लेकिन उस कामयाबी को बरकरार रखना बड़ी चुनौती होगा। क्योंकि कांग्रेस भी सत्ता में वापसी के लिए पूरी ताकत लगा रही है।
ये भी पढ़ें... हेमंत खंडेलवाल के सिर पर सजा मध्य प्रदेश भाजपा का ताज, हो गई घोषणा
राहुल गांधी ने अपनी रणनीति में कई बदलाव किए हैं। कांग्रेस उसी तर्ज पर संगठन को मजबूत करने की राह पर चल पड़ी है। खंडेलवाल को भी तीन साल के भीतर नई टीम बनानी है। मंडल स्तर से लेकर जिला स्तर तक लोगों को तैनात करना है। इसके साथ ही आदिवासी वर्ग को साधना है। जो हार जीत पर काफी असर डालते हैं। कांग्रेस इस वर्ग की पहली पसंद रही है। आदिवासियों के खिलाफ एक छोटी सी घटना भी आग में घी का काम करती है इसलिए डैमेज कंट्रोल में भी जुटे रहना है। इसके अलावा कर्मचारी वर्ग, अनुसूचित जाति, दूसरे पिछड़े वर्ग को साधने के लिए भी रणनीति बनानी ही होगी।
सत्ता और संगठन में तालमेल बनाने के साथ ही उन्हें ऐसे नेताओं को संभालना है जो अपनी नाराजगी जाहिर करने में जरा भी देर नहीं करते। ट्विटर से लेकर मीडिया के कैमरे तक उनके गुस्सा का गवाह बन जाते हैं। ऐसे कुछ सीनियर लीडर्स के साथ उन्हें ऐसे लीडर्स को भी संभालना है जो गैर वाजिब बयानबाजी के लिए मशहूर हो चुके हैं। कुंवर विजय शाह इसका सबसे ताजा उदाहरण हैं। ग्वालियर चंबल के हिस्सों में उन्हें पुरानी भाजपा और महाराज भाजपा के अंतर को भी पाटना है। देखना ये है कि खंडेलवाल इन चुनौतियों के साथ बीजेपी की जीत का सफर कितना जारी रख पाते हैं।
ये भी पढ़ें... BJP प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की चाहत गुटबाजी नहीं हो, लेकिन इंदौर में पोस्टर की राजनीति शुरू
इस नियमित कॉलम News Strike के लेखक हरीश दिवकेर मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं
न्यूज स्ट्राइक | न्यूज स्ट्राइक हरीश दिवेकर | हरीश दिवेकर | News Strike Harish Divekar | Hemant Khandelwal | बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष
कोई बहुत चैलेंजिंग पॉजिशन मिलती है तो कहा जाता है कांटों से भरा ताज मिलना। लेकिन खंडेलवाल के लिए मामला उल्टा है। उन्हें मखमलों से भरा सिंहासन मिला है। कामयाबी के पंखों से सजा ताज मिला है और जीत के तमगों से भरा हार मिला है। इसके बाद भी खंडेलवाल के लिए चैन से बैठना आसान नहीं होगा। वो जहां भी जाएंगे यकीनन कार्यकर्ता उनके रास्तों में फूल बिछाएंगे। दिखने में तो वो गुलाब होंगे लेकिन खंडेलवाल को हर कदम पर कांटों की चुभन भी झेलनी ही पड़ेगी।
पार्टी को अच्छी तरह समझते हैं खंडेलवाल
विवादों से रहे हैं दूर
ये भी पढ़ें... निर्विरोध प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चुने गए हेमंत खंडेलवाल, अनुशासन क्या होता है...कोई बीजेपी से सीखे
कई समीकरण साधने की कवायद
खंडेलवाल के सामने होंगी ये चुनौतियां
ये भी पढ़ें... News Strike: टेक होम राशन घोटाले में शिकायत दर्ज, पूर्व मुख्य सचिव पर कस सकता है शिकंजा
तैयार करनी है नई टीम
वीडी शर्मा का कामयाबी भरा कार्यकाल
ये भी पढ़ें... हेमंत खंडेलवाल के सिर पर सजा मध्य प्रदेश भाजपा का ताज, हो गई घोषणा
कांग्रेस से मिलने वाली है टक्कर
बड़बोले और तुनकमिजाज नेताओं को होगा संभालना
ये भी पढ़ें... BJP प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की चाहत गुटबाजी नहीं हो, लेकिन इंदौर में पोस्टर की राजनीति शुरू
इस नियमित कॉलम News Strike के लेखक हरीश दिवकेर मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं
न्यूज स्ट्राइक | न्यूज स्ट्राइक हरीश दिवेकर | हरीश दिवेकर | News Strike Harish Divekar | Hemant Khandelwal | बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती
By VINAY VERMA
नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता
By Sanjay Gupta, Sandeep Kumar
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
By Neel Tiwari