News Strike: Kamalnath ने दिया Digvijay singh के दावे का जवाब, क्या दोनों नेताओं के बीच बढ़ेंगी दूरियां ?
Harish Divekar | Aug 26, 2025, 07:00 IST
Photograph: (The Sootr)
मध्यप्रदेश की सियासत में हाल ही में दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया की मुलाकात ने हंगामा मचा दिया। इस मुलाकात के बाद कमलनाथ ने दिग्विजय सिंह के दावे का खंडन किया, जिससे सियासी बातचीत में नए सवाल उठने लगे हैं।
कुछ तस्वीरें राजनीति में नया इतिहास रच देती हैं या फिर गड़े मुर्दे उखाड़ लाती हैं। हम उन तस्वीरों की बात कर रहे हैं जो किसी न किसी सियासी घटनाक्रम की गवाह होती हैं। मध्यप्रदेश में भी सियासत की एक नई तस्वीर कुछ दिन पहले नजर आई। दो धुर विरोधी ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह नेता एक साथ मुस्कुराते हुए चहलकदमी करते दिखाई दिए। ये तस्वीर क्या थी साहब बवंडर था।
इसने सियासत के प्याले में ऐसा तूफान ला दिया है कि अब पुरानी बातें बाहर निकलने लगी हैं। शिकवे हैं शिकायतें हैं या फिर कुछ पुराने राज खुलकर सामने आ रहे हैं। क्या इस मुलाकात के बाद दिग्विजय सिंह ने फिर पलटी मारी है। क्यों सरेआम कमलनाथ का दर्द छलक रहा है। क्या सिंधिया वाकई शिष्टता के नाते दिग्विजय सिंह से मिले थे या मकसद कुछ और था। चलिए समझने की कोशिश करते हैं।
आगे बात करने से पहले बशीर बद्र साहब का एक शेर पढ़िए। कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से, ये नए मिज़ाज का शहर है ज़रा फ़ासले से मिला करो। कितना सोच समझ कर बशीरजी ने ये शेर लिखा होगा। उनके इसी शेर की तर्ज पर हाथ मिलने के बाद सियासी शहर में रहने वाले लोगों का मिजाज जरा बदला-बदला सा हो गया है। लोकसभा चुनाव में हार के बाद से शांत चल रहे कांग्रेस नेता कमलनाथ ने अचानक साल 2020 में गिरी सरकार पर एक पोस्ट किया है।
ये भी पढ़ें... सरकार गिरने को लेकर अब कमलनाथ का खुलासा, ...और हमारी सरकार गिर गई
अगर आप ये सोच रहे हैं कि क्यों कमलनाथ को करीब पांच साल बाद अपनी सरकार गिरने पर सफाई देने की या कोई बात कहने की जरूरत पड़ गई। तो यकीन मानिए कि ये ढलती उम्र का कोई फ्रस्टेशन नहीं है। बल्कि सियासत के इस आला खिलाड़ी ने सोच समझ कर ये पोस्ट किया है जिसके तार एक इंटरव्यू से जुड़े हैं। और, शायद उस तस्वीर से भी जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता।
कुछ ही दिन पहले एक कार्यक्रम में ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह का आमना-सामना हुआ। दोनों की सियासी रंजिश किसी से छुपी नहीं है। अपने भाषणों में भी दोनों एक-दूसरे पर हमले बोलने से बाज नहीं आते। कार्यक्रम में भी उम्मीद थी कि ये तल्खी वहां भी नुमाया होगी, लेकिन हुआ उल्टा। सारी राजनीतिक और शाही ठसक भुलाकर महाराज खुद राजा के पास आए। हाथ पकड़ा और मंच तक ले गए। किसी को भी शायद ही इस बात की उम्मीद होगी कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ऐसा कर सकते हैं। खुद दिग्विजय सिंह को भी पहले पहल इस बात पर यकीन नहीं हो रहा होगा। पर ऐसा हुआ। यही वो मुलाकात थी जिसके बाद से सियासी मिजाज कुछ बदला बदला सा है।
ये भी पढ़ें... News Strike: CS अनुराग जैन को मिलेगा एक्सटेंशन या होंगे रिटायर? सस्पेंस बरकरार, जानिए कब खुलेगा राज?
इस मुलाकात के बाद दिग्विजय सिंह का एक इंटरव्यू वायरल हुआ जिसमें उन्होंने कमलनाथ सरकार गिरने से जुड़े बड़े राज खोले। अब तक अगर आप सरकार गिरने का जिम्मेदार ज्योतिरादित्य सिंधिया को मानते रहे हों तो आप गलत हो सकते हैं। कई बार ये भी कहा और सुना गया कि कमलनाथ नाम के सीएम थे असल सरकार दिग्विजय सिंह चला रहे थे। अब खुद दिग्विजय सिंह ने इस बारे में खुलकर बात की है और कुछ कसक भी जाहिर की। उन्होंने कहा कि उन पर अक्सर ये इल्जाम लगे कि उनकी वजह से कमलनाथ सरकार गिर गई क्योंकि उनके रिश्ते ज्योतिरादित्य सिंधिया से खराब थे जबकि असल बात कुछ और थी।
दिग्विजय सिंह ने उस दौर की डिनर पॉलिटिक्स का भी खुलासा किया जिसके बारे में अब तक कोई नहीं जानता था। ये डिनर एक बिजनेसमैन के घर में हुआ जिसके बाद से असल पॉलिटिक्स शुरू हुई। बकौल दिग्विजय सिंह इस डिनर में कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया तीनों मौजूद थे। इस डिनर में ग्वालियर चंबल से जुड़े कुछ मुद्दों पर ध्यान देने का फैसला हुआ। जो भी समझौता हुआ था उससे जुड़े दस्तावेजों पर दिग्विजय सिंह ने भी साइन किए थे लेकिन बैठक के बाद उस पर अमल नहीं हुआ और फिर सरकार गिर गई। दिग्विजय सिंह ने ये भी साफ कर दिया कि सिंधिया और उनके बीच कोई व्यक्तिगत लड़ाई नहीं थी। ये सिर्फ सियासी मनमुटाव था।
ये भी पढ़ें... News Strike: Jabalpur में सबसे बड़े फ्लाईओवर का विरोध क्यों, BJP के एक फैसले ने खोल दी अंदरूनी गुटबाजी की कलई!
इस इंटरव्यू को कई लोगों ने सुनकर छोड़ दिया होगा, लेकिन सियासी गलियारों के गड़े मुर्दे जब उखड़े तो गुबार इस कदर उड़ा कि कमलनाथ को जवाब देने पर मजबूर होना पड़ा। कमलनाथ ने इस पर ट्वीट किया कि प्रदेश में उनके नेतृत्व वाली सरकार को लेकर कुछ बयानबाजियां तेजी से हो रही हैं। उन्होंने भी ये सुझाव दिया कि पुरानी बातें उखाड़ने से कोई फायदा नहीं है। लेकिन ये सच है कि व्यक्तिगत महत्वकांक्षा के अलावा ज्योतिरादित्य सिंधिया को लगता था कि सरकार दिग्विजय सिंह चला रहे हैं। इसी नाराजगी में उन्होंने कांग्रेस के विधायकों को तोड़ा और सरकार गिराई।
इस ट्वीट के बाद ये सवाल उठना भी लाजमी हैं कि क्या कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की दोस्ती में वाकई दरार आ गई है। सरकार गिरने के ऐतिहासिक घटनाक्रम पर दिग्विजय सिंह ने खुद को क्लीनचिट देने की कोशिश की है। लेकिन कमलनाथ से एक ट्वीट से वापस ठीकरा दिग्विजय सिंह पर ही फोड़ दिया है। खास बात ये है कि इस पूरे सियासी बवाल में सिंधिया पर कोई लांछन ही नहीं है। पुरानी आग को हवा देकर वो बहुत आसानी से गायब हो गए हैं। और, आमने-सामने आ गए हैं दिग्विजय सिंह और कमलनाथ। क्या दो दिग्गजों के बीच पनपी इस कड़वाहट से क्या कांग्रेस को फर्क पड़ेगा या फिर अब बुजुर्ग नेताओं के बीच की इस कलह से कांग्रेस अछूती ही रहेगी।
ये भी पढ़ें... News Strike: सिंधिया राजघराने की अगली पीढ़ी की तैयारी, महानआर्यमन संभालेंगे ये अहम पद
इस नियमित कॉलम न्यूज स्ट्राइक (News Strike) के लेखक हरीश दिवेकर (Harish Divekar) मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं
इसने सियासत के प्याले में ऐसा तूफान ला दिया है कि अब पुरानी बातें बाहर निकलने लगी हैं। शिकवे हैं शिकायतें हैं या फिर कुछ पुराने राज खुलकर सामने आ रहे हैं। क्या इस मुलाकात के बाद दिग्विजय सिंह ने फिर पलटी मारी है। क्यों सरेआम कमलनाथ का दर्द छलक रहा है। क्या सिंधिया वाकई शिष्टता के नाते दिग्विजय सिंह से मिले थे या मकसद कुछ और था। चलिए समझने की कोशिश करते हैं।
आगे बात करने से पहले बशीर बद्र साहब का एक शेर पढ़िए। कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से, ये नए मिज़ाज का शहर है ज़रा फ़ासले से मिला करो। कितना सोच समझ कर बशीरजी ने ये शेर लिखा होगा। उनके इसी शेर की तर्ज पर हाथ मिलने के बाद सियासी शहर में रहने वाले लोगों का मिजाज जरा बदला-बदला सा हो गया है। लोकसभा चुनाव में हार के बाद से शांत चल रहे कांग्रेस नेता कमलनाथ ने अचानक साल 2020 में गिरी सरकार पर एक पोस्ट किया है।
ये भी पढ़ें... सरकार गिरने को लेकर अब कमलनाथ का खुलासा, ...और हमारी सरकार गिर गई
सोच-समझकर किया गया पोस्ट
कुछ ही दिन पहले एक कार्यक्रम में ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह का आमना-सामना हुआ। दोनों की सियासी रंजिश किसी से छुपी नहीं है। अपने भाषणों में भी दोनों एक-दूसरे पर हमले बोलने से बाज नहीं आते। कार्यक्रम में भी उम्मीद थी कि ये तल्खी वहां भी नुमाया होगी, लेकिन हुआ उल्टा। सारी राजनीतिक और शाही ठसक भुलाकर महाराज खुद राजा के पास आए। हाथ पकड़ा और मंच तक ले गए। किसी को भी शायद ही इस बात की उम्मीद होगी कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ऐसा कर सकते हैं। खुद दिग्विजय सिंह को भी पहले पहल इस बात पर यकीन नहीं हो रहा होगा। पर ऐसा हुआ। यही वो मुलाकात थी जिसके बाद से सियासी मिजाज कुछ बदला बदला सा है।
ये भी पढ़ें... News Strike: CS अनुराग जैन को मिलेगा एक्सटेंशन या होंगे रिटायर? सस्पेंस बरकरार, जानिए कब खुलेगा राज?
दिग्विजय ने खोले थे बड़े राज
समझौतों पर नहीं हुआ अमल
ये भी पढ़ें... News Strike: Jabalpur में सबसे बड़े फ्लाईओवर का विरोध क्यों, BJP के एक फैसले ने खोल दी अंदरूनी गुटबाजी की कलई!
जवाब देने को मजबूर हुए कमलनाथ
सियासी बवाल में सिंधिया पर लांछन नहीं
ये भी पढ़ें... News Strike: सिंधिया राजघराने की अगली पीढ़ी की तैयारी, महानआर्यमन संभालेंगे ये अहम पद
इस नियमित कॉलम न्यूज स्ट्राइक (News Strike) के लेखक हरीश दिवेकर (Harish Divekar) मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari