NEWS STRIKE: MP Poison Liquor Case: जहरीली शराब से मौतें, सियासत तेज... किसकी जिम्मेदारी?
Harish Divekar | Sept 10, 2026, 07:00 IST
Photograph: (THESOOTR)
सागर जहरीली शराब कांड के बाद मध्यप्रदेश में सियासत तेज है। मौतों, सरकारी दावों, आरोपियों के कनेक्शन और आबकारी व्यवस्था पर उठे सवालों की पूरी पड़ताल।
जहरीली शराब के कहर से बचने के लिए अगर आप सरकार के भरोसे हैं तो आप बड़े भ्रम में हैं। जहरीले पानी के बाद जहरीली शराब मप्र के लोगों पर कहर बनकर टूटी है।
ये मामला जितना चौंकाने वाला है जितना दर्द भरा है उससे ज्यादा हैरान करने वाली है सरकारी पोस्ट। जो आपको जहरीली शराब से बचाने का या शराब से दूर करने का दिलासा देती हुई नहीं दिखेगी बल्कि शराब की दुकान का पता बता रही है।
जब जिम्मेदारों से ऐसा जवाब मिलेगा तो आम जनता क्या उम्मीद रख सकती है। वो भी तब जब आरोपियों के तार सीधे सत्ताधारी बीजेपी से जुड़े रहे हैं।
इस वायरल, लेकिन ऑथेंटिक पोस्ट के साथ-साथ आपको बताते हैं कि इस मुद्दे पर अब तक क्या-क्या राजनीति हो चुकी है। जिसकी जद में प्रदेश सरकार से लेकर डबल इंजन सरकार तक आ चुकी है।
शराब को लेकर मप्र में सियासत अक्सर ही गर्मा जाती है। पिछले चुनाव से पहले पूर्व सीएम उमा भारती ने शराब बंदी की मांग उठा कर खूब बवाल काटा। मजबूर हो कर सरकार ने भी आबकारी से जुड़े कुछ ने नियम बनाए।
दावा ये होता रहा कि नए नियम काफी सख्त है, लेकिन एक घटना ने उन सारे दावों की कलई खोलकर रख दी है। सागर में जहरीली शराब के चलते 25 लोगों की मौत हो चुकी है। 2 सौ से ज्यादा अब भी जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।
ऐसी घटनाएं आमतौर पर तब ज्यादा होती हैं जब शराब बंदी हो। मप्र में तो शराब धड़ल्ले से बिकती है। खुलेआम बिकती है और दावे तो यही होते रहे हैं कि नियम और कायदे का ध्यान रखते हुए सही और लायसेंसी दुकानों पर ही बिकती है। फिर प्रदेश में जहरीली शराब कहां से आ गई। जब शराब आसानी से ठेकों पर उपलब्ध है तो आम लोगों तक जहरीली शराब कैसे पहुंची।
ये सवाल चिंताजनक है। उससे भी ज्यादा टेंशन इस बात पर होना चाहिए कि शराब फ्रेंडली स्टेट होने के बावजूद प्रदेश में जहरीली शराब का या अवैध शराब का नेटवर्क पनपा कैसे। जब ये नेटवर्क पनप रहा था तब जिम्मेदार क्या कर रहे थे।
क्या वो गहरी नींद में सो रहे थे या फिर आंखों पर ऐसी पट्टी बनी थी जिसकी वजह से उन्हें पता ही नहीं चला कि प्रदेश में जानलेवा शराब की एंट्री हो चुकी है। या डर इस बात का था कि नेटवर्क के सरगना की पहुंच सरकार तक है।
हालांकि, इसकी फिलहाल पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कुछ खबरों में ये दावा किया जा रहा है कि सागर के बंडा और विनायका थाने में जिन्हें आरोपी बताया गया है वो बीजेपी नेता के करीबी हैं।
मामले में करीब 30 आरोपी हैं। जिसमें से एक हैं सिद्धार्थ सिंह कुशवाहा। जो शराब ठेकेदार हैं और बीजेपी के पूर्व मंत्री के करीबी बताए जाते हैं। उनकी मां सागर जनपद पंचायत में उपाध्यक्ष भी हैं।
कुशवाहा के अलावा तररवाहा सरपंच चंदू सिंह ततरवाहा करणी सेना से जुड़ा बताया जा रहा है। इसके अलावा आरोपी रोहित शिवहरे, मनीष लोधी और यशवंत सिंह बरेठी के कनेक्शन भी बीजेपी के बड़े नेता या मंत्री से जुड़े बताए जा रहे हैं।
अगर ये सारे आरोप साबित हो जाते हैं तो मामला और भी ज्यादा संगीन हो जाएगा। सिर्फ आरोप ही लगने पर इस मुद्दे पर जमकर सियासत हो चुकी है। जिसमें सीधे राहुल गांधी भी कूद गए हैं।
इस घटना के बाद एसडीओपी प्रदीप वाल्मीकि और फिर एसडीएम आरती यादव को हटाया जा चुका है। 14 आरोपी पकड़े जा चुके हैं। 16 की तलाश जारी है।
इस कार्रवाई को देखते हुए राहुल गांधी ने तंज कसा कि ऐसी त्रासदियों के बाद छोटी मोटी गिरफ्तारी होती हैं और निचले स्तर के अधिकारियों पर एक्शन होता है।
राहुल ने ये भी कहा कि मामले की तह तक जाने के बाद बड़े अधिकारी और सत्ता में बैठे लोगों की सांठगांठ पर भी कार्रवाई हो चाहिए। जब राहुल गांधी ही इस मामले पर एक्टिव हैं तो ये समझा ही जा सकता है कि बाकी कांग्रेस भी पूरी मुस्तैदी के साथ सरकार को घेरने में जुट गई होगी।
मामला संगीन है, लेकिन सरकारी महकमे की ही एक पोस्ट इस घटना की गंभीरता पर सवाल उठा रही है। अब जरा सोचिए, ऐसे मामले के बाद लोग यही जानना चाहेंगे कि वो कैसे जाने की जिस जाम को हाथ में थामा है वो जहर से भरा प्याला तो नहीं है।
शायद इस जानकारी के लिए उनकी उम्मीद सरकार की ही कोई गाइडलाइन होगी, लेकिन इस गाइडलाइन के नाम पर सरकारी महकमे ने क्या गजब किया है। वो भी देख लीजिए।
![mp poison liquor case]()
जनसंपर्क कटनी के ट्विटर हैंडल से ये पोस्ट हुआ है। जो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल है। इस पोस्ट में ये बताया जा रहा है कि असली शराब की पहचान कैसे करनी है। कहां से शराब खरीदनी चाहिए। किस तरह की बोटल को चुनना चाहिए।
ये जानकारी अगर इस पोस्टर को देखकर आप न समझ पाएं तो आप एक नंबर पर हाए यानी कि एचआई लिखकर भेज दें। उसके बाद सही मदिरा दुकान तक पहुंचने का रास्ता आपको खुद ब खुद मिल जाएगा।
ये पोस्ट ऐसे समय की गई है जब आम लोग शराब के मामले को लेकर काफी गंभीर है। ये घटना बिहार या गुजरात जैसे ड्राई स्टेट में होती तो मामला कुछ और होता, लेकिन मप्र में ऐसी घटना का होना कई सवाल खड़े करता है।
उन सवालों के जवाब देने की जगह सरकारी महकमे ने ये चिट्ठा पकड़ा दिया है। जिसे देखकर लगता है कि सही दुकान और शराब खुद ढूंढ लो।
एक और बात बता दें कि मप्र में आबकारी नीति बहुत सख्त है। यानी इस मुद्दे पर सख्त कार्रवाई में देर नहीं होनी चाहिए। साल 2021 में प्रदेश में एमपी एक्साइड अमेंडमेंट बिल पास हुआ था। जिसके तहत सरकार ने जहरीली शराब बेचने के अपराध को बेहद सख्त और गैर जमानती बना दिया था।
मकसद ये था कि अवैध शराब के कारोबारी अपने पैर न पसार सकें। उस दौर में में मंदसौर और इंदौर में इस तरह के मामले सामने आए थे और पचास से ज्यादा लोगों की जानें गई थीं जिसके बाद ये फैसला लिया गया था।
संशोधन के तहत अपराधियों को छह साल की कैद और एक लाख रुपए का जुर्माना देना तय किया गया था और दोबारा इसी अपराध में पकड़े जाने पर ये सजा दस साल की कैद और दस लाख के जुर्माने तक पहुंचना तय हुई थी।
संशोधन में ये भी तय हुआ कि जहरीली शराब से मौत होने पर उम्र कैद या फांसी भी हो सकती है और जुर्माने की रकम 20 लाख तक जा सकती है।
इसके बावजूद सरकार की आंखों के सामने जहरीली शराब का कहर बरसा। क्या वाकई इन सख्त नियमों के तहत कार्रवाई हो पाएगी। ये सवाल सिर्फ हमारा नहीं है। आप सबका भी है। जब नियम सख्त हैं तो सवाल पूछा जाना चाहिए। ताकि अपराधियों पर सख्त कार्रवाई हो और उन्हें शह देने वालों की भी अक्ल ठिकाने आ सके। News Strike | न्यूज स्ट्राइक
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ये मामला जितना चौंकाने वाला है जितना दर्द भरा है उससे ज्यादा हैरान करने वाली है सरकारी पोस्ट। जो आपको जहरीली शराब से बचाने का या शराब से दूर करने का दिलासा देती हुई नहीं दिखेगी बल्कि शराब की दुकान का पता बता रही है।
जब जिम्मेदारों से ऐसा जवाब मिलेगा तो आम जनता क्या उम्मीद रख सकती है। वो भी तब जब आरोपियों के तार सीधे सत्ताधारी बीजेपी से जुड़े रहे हैं।
इस वायरल, लेकिन ऑथेंटिक पोस्ट के साथ-साथ आपको बताते हैं कि इस मुद्दे पर अब तक क्या-क्या राजनीति हो चुकी है। जिसकी जद में प्रदेश सरकार से लेकर डबल इंजन सरकार तक आ चुकी है।
जहरीली शराब ने खोली आबकारी दावों की पोल
दावा ये होता रहा कि नए नियम काफी सख्त है, लेकिन एक घटना ने उन सारे दावों की कलई खोलकर रख दी है। सागर में जहरीली शराब के चलते 25 लोगों की मौत हो चुकी है। 2 सौ से ज्यादा अब भी जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।
खुले ठेकों के बीच जहरीली शराब का सवाल
ये सवाल चिंताजनक है। उससे भी ज्यादा टेंशन इस बात पर होना चाहिए कि शराब फ्रेंडली स्टेट होने के बावजूद प्रदेश में जहरीली शराब का या अवैध शराब का नेटवर्क पनपा कैसे। जब ये नेटवर्क पनप रहा था तब जिम्मेदार क्या कर रहे थे।
क्या वो गहरी नींद में सो रहे थे या फिर आंखों पर ऐसी पट्टी बनी थी जिसकी वजह से उन्हें पता ही नहीं चला कि प्रदेश में जानलेवा शराब की एंट्री हो चुकी है। या डर इस बात का था कि नेटवर्क के सरगना की पहुंच सरकार तक है।
आरोपियों के राजनीतिक कनेक्शन पर सवाल
मामले में करीब 30 आरोपी हैं। जिसमें से एक हैं सिद्धार्थ सिंह कुशवाहा। जो शराब ठेकेदार हैं और बीजेपी के पूर्व मंत्री के करीबी बताए जाते हैं। उनकी मां सागर जनपद पंचायत में उपाध्यक्ष भी हैं।
कुशवाहा के अलावा तररवाहा सरपंच चंदू सिंह ततरवाहा करणी सेना से जुड़ा बताया जा रहा है। इसके अलावा आरोपी रोहित शिवहरे, मनीष लोधी और यशवंत सिंह बरेठी के कनेक्शन भी बीजेपी के बड़े नेता या मंत्री से जुड़े बताए जा रहे हैं।
अगर ये सारे आरोप साबित हो जाते हैं तो मामला और भी ज्यादा संगीन हो जाएगा। सिर्फ आरोप ही लगने पर इस मुद्दे पर जमकर सियासत हो चुकी है। जिसमें सीधे राहुल गांधी भी कूद गए हैं।
इस घटना के बाद एसडीओपी प्रदीप वाल्मीकि और फिर एसडीएम आरती यादव को हटाया जा चुका है। 14 आरोपी पकड़े जा चुके हैं। 16 की तलाश जारी है।
राहुल के बयान से गरमाई सियासत
राहुल ने ये भी कहा कि मामले की तह तक जाने के बाद बड़े अधिकारी और सत्ता में बैठे लोगों की सांठगांठ पर भी कार्रवाई हो चाहिए। जब राहुल गांधी ही इस मामले पर एक्टिव हैं तो ये समझा ही जा सकता है कि बाकी कांग्रेस भी पूरी मुस्तैदी के साथ सरकार को घेरने में जुट गई होगी।
सरकारी पोस्ट ने बढ़ाई नई चिंता
शायद इस जानकारी के लिए उनकी उम्मीद सरकार की ही कोई गाइडलाइन होगी, लेकिन इस गाइडलाइन के नाम पर सरकारी महकमे ने क्या गजब किया है। वो भी देख लीजिए।
mp poison liquor case
शराब पहचानने की सरकारी गाइड वायरल
ये जानकारी अगर इस पोस्टर को देखकर आप न समझ पाएं तो आप एक नंबर पर हाए यानी कि एचआई लिखकर भेज दें। उसके बाद सही मदिरा दुकान तक पहुंचने का रास्ता आपको खुद ब खुद मिल जाएगा।
ये पोस्ट ऐसे समय की गई है जब आम लोग शराब के मामले को लेकर काफी गंभीर है। ये घटना बिहार या गुजरात जैसे ड्राई स्टेट में होती तो मामला कुछ और होता, लेकिन मप्र में ऐसी घटना का होना कई सवाल खड़े करता है।
उन सवालों के जवाब देने की जगह सरकारी महकमे ने ये चिट्ठा पकड़ा दिया है। जिसे देखकर लगता है कि सही दुकान और शराब खुद ढूंढ लो।
सख्त कानून के बावजूद सवाल कायम
मकसद ये था कि अवैध शराब के कारोबारी अपने पैर न पसार सकें। उस दौर में में मंदसौर और इंदौर में इस तरह के मामले सामने आए थे और पचास से ज्यादा लोगों की जानें गई थीं जिसके बाद ये फैसला लिया गया था।
संशोधन के तहत अपराधियों को छह साल की कैद और एक लाख रुपए का जुर्माना देना तय किया गया था और दोबारा इसी अपराध में पकड़े जाने पर ये सजा दस साल की कैद और दस लाख के जुर्माने तक पहुंचना तय हुई थी।
संशोधन में ये भी तय हुआ कि जहरीली शराब से मौत होने पर उम्र कैद या फांसी भी हो सकती है और जुर्माने की रकम 20 लाख तक जा सकती है।
सख्त कानून, फिर भी कार्रवाई पर सवाल
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