NEWS STRIKE: BJP में अंदरूनी घमासान? सिंधिया बनाम पुराने संघी नेताओं की खुली खाई

Harish Divekar | Jun 30, 2026, 07:00 IST
Share
NEWS STRIKE (73)
Photograph: (THESOOTR)

BHOPAL. बीजेपी में सिंधिया और पुराने संघी नेताओं के बीच खाई लगातार बनी हुई है। सिंधिया समर्थकों के साथ पुराने भाजपाई एडजस्ट नहीं कर पा रहे हैं।

News Strike। न्यूज स्ट्राइक:बीजेपी की लाख कोशिशों के बावजूद पार्टी के ही कुछ खांटी नेता और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच खाई कम होने का नाम नहीं ले रही है। खासतौर से ऐसे नेता जो संघ की पृष्टभूमि से आते हैं। वो सिंधिया और उनके समर्थकों के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रहे हैं।

कुछ घटनाएं ये इशारा कर रही हैं कि सिंधिया समर्थकों के साथ पुराने भाजपाई एडजस्ट नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि, बीजेपी की तरफ से भी ऐसे नेताओं को समय-समय पर समझाइश दी जाती रही है। उसके बाद भी नेता हैं कि मानते नहीं।

ताजा उदाहरण है एक ऐसा विधायक जो कट्टर संघी है। सिंधिया समर्थकों की खिलाफत करता रहा है और अब लगता है कि खुलकर बगावत पर अमादा है, जबकि उसे पहले भी संगठन से वॉर्निंग मिल चुकी है।

सिंधिया के दौरे में नेता झुकते हैं

ज्योतिरादित्य सिंधिया का दौरा होता है तो ग्वालियर, गुना, शिवपुरी जैसे इलाकों के नेता उनके सामने नतमस्तक नजर आते हैं। कोई विधायक ये हिमाकत नहीं करता उनकी बैठकों को इग्नोर कर दे।

सिंधिया समर्थकों को तो आप उनके उत्साह से ही पहचान जाएंगे। कई बार विपक्षी विधायक या नेता भी आपको श्रीमंत की झलक पाने के लिए बेताब ही दिखाई देंगे।

हम अच्छे से जानते हैं कि श्रीमंत कहने पर कई बार ऑब्जेक्शन हो चुका है। खुद सिंधिया ये साफ कर चुके हैं कि उन्हें श्रीमंत न कहा जाए, लेकिन जिस तरह कथनी और करनी में अंतर होता है।

ठीक वैसे ही श्रीमंत बोलने न बोलने में अंतर है। ग्वालियर, गुना के कई इलाकों में सिंधिया घराना आज भी प्रजा के लिए श्रीमंत ही है। जिनके आगे सिर अपने आप ही झुक जाता है।

सिंधिया समर्थकों के लिए वो महाराज हैं। जिनके प्रभाव से उनका राजनीतिक औरा बुलंद है। इसलिए वो भी सिंधिया के दरबार में आदाब बजाते हैं। जिनके लिए सिंधिया ही सरकार है और राजनीतिक विचारधारा भी।

प्रद्युम्न सिंह तोमर, गोविंद सिंह राजपूत, इमरती देवी जैसे ढेरों नेता हैं जिनकी राजनीतिक सोच सिंधिया से शुरू होती है और सिंधिया पर खत्म हो जाती है। शायद इसलिए वो दल नहीं देखते महाराज को देखते हैं।

सिंधिया समर्थकों का बीजेपी में विरोध

कांग्रेस की गुट वाली राजनीति में सिंधिया की सियासत और दबदबा काफी सक्सेसफुल रहे, लेकिन बीजेपी में थोड़ा संघर्ष तो है। सिंधिया 2020 से भाजपाई हो चुके हैं।

मोदी सरकार में मंत्री भी बनते चले जा रहे हैं और उनके कुछ अति करीबी नेता को पद और प्रतिष्ठा दोनों हासिल है। लेकिन इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि सिंधिया के मंत्रियों और समर्थकों को अक्सर पुराने भाजपाइयों की नाराजगी का शिकार होना पड़ता है।

इसका एक ताजा उदाहरण फिर से देखने को मिला। जिसने ये भी साफ कर दिया कि बीजेपी के पुराने और संघ के करीबी नेता सिंधिया समर्थकों को दिल से एक्सेप्ट नहीं कर सकते। इसका एक उदारण हैं बीजेपी विधायक पन्नालाल शाक्य। जो शायद सिंधिया और उनके समर्थकों के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक चुके हैं।

सिंधिया की बैठक से शाक्य नदारद

आमतौर पर सिंधिया के अपनी लोकसभा सीट में रहने के दौरान सभी विधायक, अफसर और दूसरे नेता मौजूद रहते हैं, लेकिन शाक्य उनके कार्यक्रमों से नदारद रहे।

सिंधिया के चार दिवसीय दौरे के दौरान ये बैठक बेहद अहम मानी जाती है जिसमें कलेक्टर भी मौजूद होते हैं और लोकसभा सीट से जुड़े सारे मंत्री भी, लेकिन पन्नालाल शाक्य और चांचौड़ा बीजेपी विधायक प्रियंका मीना पैंची इस बैठक से गायब रहे, जबकि कांग्रेस के बमोरी विधायक ऋषि अग्रवाल बैठक का हिस्सा बनें। जिसके बाद बीजेपी विधायकों की गैर मौजूदगी और ज्यादा चर्चा में आ गई।

शाक्य बैठक से गायब, तस्वीर से पोल खुला

मजेदार बात ये है कि शाक्य बैठक से गायब रहने के मामले में गोलमोल जवाब देते रहे। कभी उन्होंने कहा कि वो भोपाल जा रहे हैं। कभी किसी रिश्तेदार की शादी का बहाना बनाया। पोल तो तब खुली जब उन्होंने खुद फेसबुक पर एक तस्वीर पोस्ट की।

जिस वक्त सिंधिया का कार्यक्रम चल रहा था ठीक उसी वक्त शाक्य अपने ऑफिस में बैठ कर पीएम मोदी की मन की बात सुन रहे थे। अब शाक्य गलती से तस्वीर अपलोड कर गए। या उन्होंने जानबूझ कर ऐसा किया ये तो शाक्य ही बेहतर बता सकते हैं।

अब अगर आप शाक्य को ऐसा ही कोई विधायक समझ रहे हैं तो बता दें कि वो संघ की पृष्टभूमी से आने वाले विधायक हैं। साल 2023 में गुना सीट से कई नाम सामने आए।

ये सिंधिया के दखल की सीट है, लेकिन बीजेपी ने ये साफ कर दिया था कि इस सीट पर संघ का करीबी ही टिकट हासिल करेगा। आखिरी तीन नामों की पैनल में शाक्य का नाम जीत गया और उन्हें टिकट मिल गया। वो जीते भी। अब एक और किस्सा सुन लीजिए। शाक्य वही विधायक हैं जो सिंधिया के करीबी मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को नौटंकीबाज और नकारा तक बता चुके हैं।

शाक्य का तेवर सिंधिया और संगठन के लिए चुनौती

गुना के प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत हैं। राजपूत भी सिंधिया के करीबी हैं। उन्हें भी शाक्य सरेआम भाड़ में जा कर चुके हैं। उन्होंने ये भी कह दिया था कि मैं किसी की खैरात से चुनाव जीतकर नहीं आया हूं। इसके बाद बीजेपी संगठन ने उन्हें ताकीद भी किया, लेकिन शाक्य के तेवर देखकर ये साफ पता चलता है कि संघ का हाथ सिर पर है क्या इसलिए वो महाराज की परवाह नहीं करते।

हालांकि, शाक्य का ये रवैया सिंधिया के लिए जरूर चिंताजनक हो सकता है। गुना लोकसभा सीट का सियासी समीकरण समझेंगे तो आप मेरी बात का मतलब भी समझ जाएंगे। वैसे तो शिवपुरी गुना सीट पर सिंधिया फेक्टर ही सबसे बड़ा फेक्टर है। यहां के अधिकांश मतदाता आज भी महाराज के नाम पर वोट दे देते हैं।

जातिगत समीकरण कुछ हद तक असर जरूर डालते हैं। जिसका उदाहरण 2018 का लोकसभा चुनाव था। जब सिंधिया केपी यादव से चुनाव हार गए थे। इस सीट पर अनुसूचित जनजाति की तादाद सबसे ज्यादा 2 लाख 30 हजार से ज्यादा है।

अनुसूचित जाति 1 लाख से ज्यादा, कुशवाह- 60 हजार, रघुवंशी- 32 हजार, यादव- 73 हजार, ब्राह्मण- 80 हजार, मुस्लिम- 20 हजार, वैश्य जैन- 20 हजार है। सीट पर सबसे ज्यादा असर अनुसूचित जाति का है। शाक्य अनुसूचित जाति से ही आते हैं और गुना भी एससी सीट ही है।

शाक्य-यादव का असर सिंधिया की जीत पर

उन्हें 2018 में हराने वाले केपी यादव को पार्टी ने दोबारा टिकट तो नहीं दिया, लेकिन उनका ओहदा भी कम नहीं होने दिया। सिंधिया ने कभी खुलकर उनका विरोध तो नहीं किया पर जिस तरह से पार्टी ने उन्हें नागरिक आपूर्ति निगम का पद दिया है। उसे देखकर कहा जा सकता है कि सिंधिया को चुनौती देने वालों को बीजेपी एकदम डाउन करने के मूड में भी नहीं हैं।

केपी यादव गुना चंबल के यादव वोटबैंक में बड़ा जनाधार रखते हैं। इसी तरह शाक्य एससी वोटर्स का बैलेंस साधे हुए हैं। इसलिए बीजेपी के लिए दोनों जरूरी हैं और सिंधिया की जीत के लिए भी।

अब मान लीजिए शाक्य की नाराजगी यूं ही बरकरार रहती है और यादव का तो सिंधिया खेमे में शामिल होना तकरीबन नामुमकिन है तो सिंधिया की जीत पर क्या असर पड़ेगा। सिंधिया को करीब पौने लाख वोटर्स का घाटा हो सकता है। जो किसी भी लोकसभा सीट की जीत पर असर डाल सकता है।

सिंधिया समर्थकों के खिलाफ बीजेपी में नाराजगी

सिर्फ शाक्य ही नहीं कुछ और भी बीजेपी नेता हैं जो सिंधिया समर्थकों की खिलाफत पर उतर आते हैं। शिवपुरी नगर पालिका में कुच महीने पहले हुए बीजेपी पार्षदों के इस्तीफे ही ले लीजिए।

सिंधिया समर्थक अध्यक्ष गायत्री शर्मा के खिलाफ भाजपाइयों ने मोर्चा खोल दिया था। कांग्रेस और निर्दलीय पार्षद भी उनसे नाराज थे, लेकिन बीजेपी पार्षदों की नाराजगी बड़ी बात थी।

ऐसी कई घटनाएं हैं जो सिंधिया समर्थक और पुराने भाजपाइयों की नाराजगी सामने लाती रहती है। बीजेपी लगातार कोशिश में है कि ये फासला मिट सके खाई पट सके। क्योंकि महाराज तो यहां टिकने आए हैं और रम भी चुके हैं, लेकिन कार्यकर्ता और समर्थकों के लेवल पर जंग अब भी जारी है।

ये खबरें भी पढ़ें...

News Strike: इंदौर में 500 करोड़ जमीन विवाद या सिस्टम की चुप्पी? पुलिस पर हमला, रसूखदारों पर सवाल

NEWS STRIKE : BJP नेताओं के बयान पर बड़ा सवाल। सखलेचा, विजय शाह, देवड़ा के बयान क्या बताते हैं ?

News Strike: गांव में चोरी हुए विकास के राज; सरपंच का करप्शन कैसे रोकें? पंचायत चुनाव 2027 गाइड

News Strike: NEET के बाद अब UPSC पर सवाल! क्या सबसे सुरक्षित परीक्षा भी लीक हुई?

Tags:
  • बीजेपी
  • ज्योतिरादित्य सिंधिया
  • News Strike
  • न्यूज स्ट्राइक
  • पन्नालाल शाक्य
  • केपी यादव
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा