News strike: 3 कांग्रेसियों को प्रदेश से पकड़ा, जमानत के बाद भी हिरासत में रखा, फटकार के बाद कहा सॉरी
Harish Divekar | May 02, 2026, 07:00 IST
Photograph: (thesootr)
राजस्थान पुलिस ने तीन कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को गलती माना। उन्हें जमानत मिल गई, फिर भी हिरासत में रखा। मामले में हाई कोर्ट ने हस्तक्षेप किया।
News Strike | न्यूज स्ट्राइक:कितना आसान है न बस सॉरी बोलो और सारी गलती माफ। किसी को उठाकर जेल में डाल दो कह दो सॉरी। किसी पर मामला दर्ज कर लो। गिरफ्तार कर लो और कह दो सॉरी। मध्यप्रदेश में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है।
राजस्थान से पुलिस आई तीन कांग्रेसियों को उठाकर ले गई। पूछताछ भी की। जब कुछ हाथ नहीं लगा तो कह दिया सॉरी। राजस्थान की पूर्व सीएम और बीजेपी नेता के नाम से एक लेटर वायरल हुआ और लपेटे में आ गए मप्र कांग्रेस के नेता। आपको बताते हैं वायरल लेटर से लेकर कांग्रेसियों की गिरफ्तारी और फिर राजस्थान पुलिस के सॉरी कहने की ये पूरी कहानी।
महिला आरक्षण बिल के संशोधन पर देशभर में खूब बवाल कटा। इस पर कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने लोकसभा में खिलाफ में वोट किया। संशोधन विधेयक गिर गया। उसके बाद से पूरी बीजेपी सड़कों पर उतर आई।
कांग्रेस समेत दूसरे विपक्षी दलों को महिला विरोधी बताने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कहीं आक्रोश रैली निकली तो कहीं विरोध प्रदर्शन हुए। इस बीच एक लेटर वायरल हुआ। ये लेटर राजस्थान की पूर्व सीएम और बीजेपी नेता वसुंधरा राजे सिंधिया का। उन्होंने 15 अप्रैल को एक ट्विटर पर उसे साझा किया। जिसमें नारी शक्ति वंदन विधेयक 2023 को दोबारा सदन में लाने पर सवाल उठाए थे।
ये सवाल उनकी अपनी ही सरकार के खिलाफ थे। उनका ये पोस्ट तेजी से वायरल हुआ। जिसकी चर्चा राजस्थान से लेकर मध्यप्रदेश में हुई। इस ट्वीट को 18 अप्रैल को खुद वसुंधरा राजे के अकाउंट से डिलीट कर दिया गया।
ये कहकर कि ये फर्जी पत्र है, लेकिन तब तक मामला काफी आगे बढ़ चुक था। उनके उस पोस्ट को भोपाल कांग्रेस आईटी सेल के कार्यकर्ताओं ने शेयर कर दिया था। बात इतनी बढ़ी कि राजस्थान पुलिस ही भोपाल आ गई और आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। जिसके बाद विवाद गहराने लगा।
कांग्रेस नेता और कानूनी जानकार विवेक तन्खा इस मामले पर काफी मुखर भी नजर आए। तीन कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने पर पूरा कांग्रेस संगठन नाराज और एकजुट भी नजर आया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद कांग्रेस नेता विरोध में उतरे। पार्टी का एक प्रतिनिधि मंडल भोपाल स्थित एमपी नगर थाने पहुंचा और इस पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल भी उठाए।
कांग्रेस का तर्क था कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही सामग्री को लेकर कुछ चुनिंदा लोगों को निशाना बनाना गलत भी है अनुचित भी। विवेक तन्खा ने इस मामले में ट्वीट किया कि पिछले 27 घंटों से एमबी साइबर पुलिस भोपाल ने कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओँ को बिना किसी वाजिब कारण के हिरासत में रखा है।
इस हरकत पर आश्चर्य और निराशा हो रही है। उन्होंने ये भी लिखा कि पूर्व सीएम के ट्वीट को लाखों लोगों ने देखा और शेयर भी किया। उन्होंने ये भी चेतावनी दी कि वो जबलपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के सामने इस गिरफ्तारी को चुनौती भी देंगे। विवेक तन्खा के ये ट्वीट 21 अप्रैल के हैं।
ये खबर भी पढ़ें...
News Strike: ब्राह्मण नेताओं पर निशाना, कथावाचकों की खिलाफत, कैसे दलितों का चेहरा और Gen Z का फेवरेट बन रहे दामोदर यादव!
एक तरफ कांग्रेस अपने कार्यकर्ताओं को छुड़ाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रही थी। तो वहीं दूसरी तरफ जयपुर पुलिस इस मामले पर अपनी पीठ थपथपा रही थी। इसे पुलिस की बड़ी सफलता के तौर पर प्रोजेक्ट किया गया था।
बताया गया कि जयपुर पुलिस की डीसीपी साउथ ने तकनीकि साक्ष्यों का पीछा करते हुए मप्र और पंजाब में छापेमारी की। जिसके बाद पंजाब से निखिल, बिलाल खान और इनाम अहमद को हिरासत में लिया गया, जबकि पंजाब से अमृता धुमाल को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के हवाले से ये खबरें भी आईं कि इन आरोपियों से कड़ी पूछताछ की जा रही है।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में पुलिस के हवाले से ये भी दावा किया गया कि पुलिस जांच में इस पूरे प्रकरण को एक सुनियोजित यानी कि सोची समझी साजिश माना गया है। आरोपियों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के नाम से फर्जी पत्र तैयार किया। साथ ही वसुंधरा राजे का नाम भी गलत तरीके से इस्तेमाल किया। इस पुलिस ने डीपपेक वीडियो की संज्ञा भी दी और कहा कि ये देखने में बिलकुल असली लग रहा था।
ये खबर भी पढ़ें...
News Strike: मोहन कैबिनेट के सीनियर मंत्री ने अफसर को घर बुलाया, धमकाया और गालियां भी दी, क्या एकजुट होगी IAS एसोसिएशन?
पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल के नाम से कुछ मीडिया रिपोर्ट्स सामने आई कि उन सारे सॉफ्टेवेयर और टूल्स की जांच की जा रही है जिनके जरिए ऐसा डीपफेक कंटेंट तैयार किया गया। पुलिस ने इसे एक संगठित नेटवर्क का काम बताने में भी कोई कोताही नहीं की। जो चुनाव को प्रभावित करने का काम कर रहे हैं। डिजिटल ट्रेल को पकड़ने के लिए हिरासत में लिए गए लोगों के लैपटॉप और मोबाइल की भी पड़ताल की गई।
दूसरी तरफ कांग्रेस भी अपनी कोशिश में जुटी रही। जबलपुर हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई थी। जिसमें युवकों को अवैध रूप से हिरासत में लेने के बारे में भी लिखा गया था। इस मामले में हाईकोर्ट ने तीनों आरोपियों को पेश करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद राजस्थान पुलिस ने तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश नहीं किया।
इसके बाद हाईकोर्ट चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की बैंच ने राजस्थान पुलिस को फटकार लगाई और 29 अप्रैल तक तीनों युवकों को पेश करने के निर्देश दिए।
इस मामले में याचिकाकर्ता ने ये तक कहा कि पुलिस की पूरी कहानी झूठी और मनगढ़ंत है। इसके बाद अदालत ने पुलिस कमिश्नर भोपाल, एसएचओ साइबर क्राइण ब्रांच भोपाल और राजस्थान के ज्योति नगर पुलिस थाने के एसएचओ सच्चन सिंह को भी नोटिस जारी किया और उसका जवाब मांगा।
ये खबर भी पढ़ें...
News Strike: भर्ती परीक्षा को लेकर सीएम की अहम घोषणा ही भूले अफसर! कब खत्म होगा लाखों युवाओं का इंतजार?
इसके बाद चंद घंटे पहले इस पूरी कहानी में बड़ा ट्विस्ट आया है। तीनों कांग्रेसियों की गिरफ्तारी को राजस्थान की पुलिस ने बड़ी गलती मान लिया है। हाई कोर्ट के निर्देश पर तीनों कांग्रेसियों को अदालत में पेश किया गया। राजस्थान पुलिस ने बताया कि 22 अप्रैल को तीनों को मजिस्ट्रेट के सामने पेश भी किया गया था।
जयपुर की अदालत से ही उन्हें जमानत भी मिल गई थी। उसके बाद भी उन्हें हिरासत में रखा गया क्योंकि वो जमानत की शर्ते पूरी नहीं कर पा रहे थे। इस मामले में मप्र और राजस्थान दोनों जगह की पुलिस ने अलग-अलग दावे किए, जिन्हें कांग्रेसियों ने गलत करार भी दिया। इस पूरे मामले को समझने के बाद हाईकोर्ट ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जबलपुर को ये निर्देश दिए हैं कि तीन अधिकारियों को नियुक्त कर तीनों के अलग अलग बयान दर्ज हो।
इस पूरे मामले में राजस्थान पुलिस तो सॉरी कहकर फारिग हो गई, लेकिन वो तीन कांग्रेसी युवा कानूनी पचड़े में उलझ गए हैं। उनके जितने दिन हिरासत में बेवजह गुजरे। जिस मेंटल टेंशन और स्ट्रेस से वो लोग दो चार हुए और जिस सोशल ट्रॉमा का सामना उनके परिवार ने किया। उसकी जवाबदेही किसकी है। क्या पुलिस की सॉरी से इतने दिनों की तकलीफ कम हो सकती है।
ये खबर भी पढ़ें...
News Strike: सख्त एक्शन के नाम पर क्या प्रीतम लोधी का सफाई देना काफी है? विधायक का अब क्या होगा?
चलते-चलते एक मामला और बता देते हैं। जब तक हम आपको एमपी में कांग्रेसियों का हाल बता रहे थे तब तक राजस्थान में एक और कांग्रेसी पुलिस थाने में बदसलूकी का शिकार हो गया है। ये मामला अजमेर का है। जहां पुलिस थाने के अंदर ही कांग्रेस नेता पीयूष सुराणा पर स्याही फेंकने का मामला सामने आया है।
सुराणा को इसलिए गिरफ्तार किया गया क्योंकि उन्होंने सीएम रेखा गुप्ता की फेसबुक वॉल पर कोई टिप्पणी की थी। जिसे आपत्तिजनक मानते हुए सुराणा को हिरासत में लिया गया। आपत्तिजनक टिप्पणी करना बेशक गलत है। हम इसकी पैरवी नहीं करते, लेकिन थाने में पुलिस वालों के सामने एक बंदी पर स्याही फेंकना भी सही करार नहीं दिया जा सकता।
राजस्थान से पुलिस आई तीन कांग्रेसियों को उठाकर ले गई। पूछताछ भी की। जब कुछ हाथ नहीं लगा तो कह दिया सॉरी। राजस्थान की पूर्व सीएम और बीजेपी नेता के नाम से एक लेटर वायरल हुआ और लपेटे में आ गए मप्र कांग्रेस के नेता। आपको बताते हैं वायरल लेटर से लेकर कांग्रेसियों की गिरफ्तारी और फिर राजस्थान पुलिस के सॉरी कहने की ये पूरी कहानी।
वसुंधरा राजे का ट्वीट विवाद में
कांग्रेस समेत दूसरे विपक्षी दलों को महिला विरोधी बताने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कहीं आक्रोश रैली निकली तो कहीं विरोध प्रदर्शन हुए। इस बीच एक लेटर वायरल हुआ। ये लेटर राजस्थान की पूर्व सीएम और बीजेपी नेता वसुंधरा राजे सिंधिया का। उन्होंने 15 अप्रैल को एक ट्विटर पर उसे साझा किया। जिसमें नारी शक्ति वंदन विधेयक 2023 को दोबारा सदन में लाने पर सवाल उठाए थे।
ये सवाल उनकी अपनी ही सरकार के खिलाफ थे। उनका ये पोस्ट तेजी से वायरल हुआ। जिसकी चर्चा राजस्थान से लेकर मध्यप्रदेश में हुई। इस ट्वीट को 18 अप्रैल को खुद वसुंधरा राजे के अकाउंट से डिलीट कर दिया गया।
ये कहकर कि ये फर्जी पत्र है, लेकिन तब तक मामला काफी आगे बढ़ चुक था। उनके उस पोस्ट को भोपाल कांग्रेस आईटी सेल के कार्यकर्ताओं ने शेयर कर दिया था। बात इतनी बढ़ी कि राजस्थान पुलिस ही भोपाल आ गई और आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। जिसके बाद विवाद गहराने लगा।
कांग्रेस के पुलिस कार्रवाई पर सवाल
कांग्रेस का तर्क था कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही सामग्री को लेकर कुछ चुनिंदा लोगों को निशाना बनाना गलत भी है अनुचित भी। विवेक तन्खा ने इस मामले में ट्वीट किया कि पिछले 27 घंटों से एमबी साइबर पुलिस भोपाल ने कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओँ को बिना किसी वाजिब कारण के हिरासत में रखा है।
इस हरकत पर आश्चर्य और निराशा हो रही है। उन्होंने ये भी लिखा कि पूर्व सीएम के ट्वीट को लाखों लोगों ने देखा और शेयर भी किया। उन्होंने ये भी चेतावनी दी कि वो जबलपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के सामने इस गिरफ्तारी को चुनौती भी देंगे। विवेक तन्खा के ये ट्वीट 21 अप्रैल के हैं।
पिछले २७ घंटों से MP साइबर पुलिस भोपाल ने @INCMP IT cell के ३ कार्यकर्ताओं को बिना किसी वाजिब कारण के हिरासत में रखा है। मुझे आश्चर्य और निराशा होती है एमपी पुलिस की इस हरकत से @CMMadhyaPradesh @DGP_MP. @VasundharaBJP ji की तथाकथित ट्वीट जो लाखो लोगो ने देखी है और शेयर की १/२
— Vivek Tankha (@VTankha) April 21, 2026
News Strike: ब्राह्मण नेताओं पर निशाना, कथावाचकों की खिलाफत, कैसे दलितों का चेहरा और Gen Z का फेवरेट बन रहे दामोदर यादव!
पुलिस ने किया साजिश का पर्दाफाश
बताया गया कि जयपुर पुलिस की डीसीपी साउथ ने तकनीकि साक्ष्यों का पीछा करते हुए मप्र और पंजाब में छापेमारी की। जिसके बाद पंजाब से निखिल, बिलाल खान और इनाम अहमद को हिरासत में लिया गया, जबकि पंजाब से अमृता धुमाल को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के हवाले से ये खबरें भी आईं कि इन आरोपियों से कड़ी पूछताछ की जा रही है।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में पुलिस के हवाले से ये भी दावा किया गया कि पुलिस जांच में इस पूरे प्रकरण को एक सुनियोजित यानी कि सोची समझी साजिश माना गया है। आरोपियों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के नाम से फर्जी पत्र तैयार किया। साथ ही वसुंधरा राजे का नाम भी गलत तरीके से इस्तेमाल किया। इस पुलिस ने डीपपेक वीडियो की संज्ञा भी दी और कहा कि ये देखने में बिलकुल असली लग रहा था।
ये खबर भी पढ़ें...
News Strike: मोहन कैबिनेट के सीनियर मंत्री ने अफसर को घर बुलाया, धमकाया और गालियां भी दी, क्या एकजुट होगी IAS एसोसिएशन?
पुलिस और कांग्रेस के बीच विवाद गहराया
दूसरी तरफ कांग्रेस भी अपनी कोशिश में जुटी रही। जबलपुर हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई थी। जिसमें युवकों को अवैध रूप से हिरासत में लेने के बारे में भी लिखा गया था। इस मामले में हाईकोर्ट ने तीनों आरोपियों को पेश करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद राजस्थान पुलिस ने तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश नहीं किया।
इसके बाद हाईकोर्ट चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की बैंच ने राजस्थान पुलिस को फटकार लगाई और 29 अप्रैल तक तीनों युवकों को पेश करने के निर्देश दिए।
इस मामले में याचिकाकर्ता ने ये तक कहा कि पुलिस की पूरी कहानी झूठी और मनगढ़ंत है। इसके बाद अदालत ने पुलिस कमिश्नर भोपाल, एसएचओ साइबर क्राइण ब्रांच भोपाल और राजस्थान के ज्योति नगर पुलिस थाने के एसएचओ सच्चन सिंह को भी नोटिस जारी किया और उसका जवाब मांगा।
ये खबर भी पढ़ें...
News Strike: भर्ती परीक्षा को लेकर सीएम की अहम घोषणा ही भूले अफसर! कब खत्म होगा लाखों युवाओं का इंतजार?
कांग्रेसियों की गिरफ्तारी में नया मोड़
जयपुर की अदालत से ही उन्हें जमानत भी मिल गई थी। उसके बाद भी उन्हें हिरासत में रखा गया क्योंकि वो जमानत की शर्ते पूरी नहीं कर पा रहे थे। इस मामले में मप्र और राजस्थान दोनों जगह की पुलिस ने अलग-अलग दावे किए, जिन्हें कांग्रेसियों ने गलत करार भी दिया। इस पूरे मामले को समझने के बाद हाईकोर्ट ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जबलपुर को ये निर्देश दिए हैं कि तीन अधिकारियों को नियुक्त कर तीनों के अलग अलग बयान दर्ज हो।
राजस्थान पुलिस की माफी, कांग्रेसी उलझे
ये खबर भी पढ़ें...
News Strike: सख्त एक्शन के नाम पर क्या प्रीतम लोधी का सफाई देना काफी है? विधायक का अब क्या होगा?
अजमेर में कांग्रेस नेता पर स्याही हमला
सुराणा को इसलिए गिरफ्तार किया गया क्योंकि उन्होंने सीएम रेखा गुप्ता की फेसबुक वॉल पर कोई टिप्पणी की थी। जिसे आपत्तिजनक मानते हुए सुराणा को हिरासत में लिया गया। आपत्तिजनक टिप्पणी करना बेशक गलत है। हम इसकी पैरवी नहीं करते, लेकिन थाने में पुलिस वालों के सामने एक बंदी पर स्याही फेंकना भी सही करार नहीं दिया जा सकता।
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
By Neel Tiwari
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava