सिंहासन छत्तीसी : एक अफसर पर सरकार की गजब मेहरबानी, छत्तीसगढ़ के एक शहर पर क्यों है दिग्गजों की नजर
Arun Tiwari | Feb 08, 2026, 12:15 IST
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छत्तीसगढ़ के राजनीतिक गलियारों में एक रिटायर्ड अफसर को मिले एक्सटेंशन और बिलासपुर में सत्ता के दिग्गजों के बीच वर्चस्व की लड़ाई ने हलचल पैदा कर दी है। आज के सिंहासन छत्तीसी में जानें क्या है पर्दे के पीछे की कहानी...
Raipur. छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारे एक बार फिर गर्म हैं। एक अफसर ऐसे हैं जिन पर विभाग इतना मेहरबान है कि रिटायरमेंट के बाद भी इन्हें छोड़ा नहीं गया। आखिर अफसर ने ऐसी कौन सी तिकड़म भिड़ाई है कि रिटायरमेंट के बाद संविदा नियुक्ति और फिर उस पर भी एक्सटेंशन मिला। अफसर हो तो ऐसा।
वहीं, छत्तीसगढ़ का एक शहर ऐसा है जिस पर दिग्गजों की नजर है। इस शहर से कई दिग्गज आते हैं, इसलिए यहां पर दंगल चलता ही रहता है। छत्तीसगढ़ की ऐसी ही राजनीतिक और प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़िए द सूत्र का साप्ताहिक कॉलम सिंहासन छत्तीसी।
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छत्तीसगढ़ सरकार ने तय किया था कि अब किसी को न तो एक्सटेंशन दिया जाएगा और न संविदा नियुक्ति। लेकिन इस पर सरकार कायम न रह सकी। जल संसाधन विभाग के एक अफसर को रिटायर होने के बाद जुलाई 2025 में उसी पद पर छह महीने की संविदा नियुक्ति मिली थी।
खबर अब यह भी है कि उन्हें अब एक्सटेंशन मिल गया है। ऐसा नहीं कि वहां इस का कोई दावेदार नहीं था। एक अधिकारी ने इस नियुक्ति के खिलाफ कोर्ट में याचिका लगाई, तो पर्दे के पीछे पता नहीं क्या चक्कर घुमाए गए कि उन्होंने अपनी अर्जी वापस ले ली।
बताया जा रहा है कि अधिकारी को पुरानी फाइल खोलने की धमकी दी गई ताकि वे अर्जी वापस ले लें। विभाग ने अफसर को उपकृत करने के लिए ऐसा ताना-बाना बनाया कि एसई का सालों तक प्रमोशन नहीं हुआ। ताकि, उन्हें कोई रिप्लेस न कर पाए। अब ये जादू है या बाजीगरी, लेकिन अफसर की तो मौज हो गई।
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छत्तीसगढ़ की सियासत में बिलासपुर का सिक्का चलता रहा है। बीजेपी के भीतर ही बिलासपुर में वर्चस्व की लड़ाई छिड़ गई है। एक विधायक हैं जो यहां पर अंगद की पैर की तरह जमे हैं। तो वहीं डिप्टी सीएम की नजर भी इस शहर पर पड़ गई है। वे अपनी ताकत दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ते।
वहीं केंद्रीय मंत्री भी इसी शहर से आते हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर नेता प्रतिपक्ष और विधानसभा अध्यक्ष रह चुके एक विधायक भी यहीं से हैं। दो और विधायक हैं जो इसी इलाके से आते हैं। इस दंगल को रोकने के लिए अब खुद सीएम अंपायर बन गए हैं।
शहरों के विकास की बात आई तो सीएम ने रायपुर से पहले बिलासपुर की मीटिंग ली। इस बार 26 जनवरी को उन्होंने झंडा भी बिलासपुर में ही फहराया। 23 साल बाद बिलासपुर में किसी मुख्यमंत्री ने गणतंत्र दिवस को झंडा फहराया। सीएम का फोकस बढ़ा है, तो हो सकता है इस दंगल में मंगल शुरु हो जाए।
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सरकार के एक बड़े फैसले पर ब्रेक लग गया है। यह बात सब जानते हैं कि जमीनों के डायवर्सन के लिए लोगों को अधिकारियों को चढ़ावा चढ़ाना पड़ता था। सरकार ने आम आदमी को सहूलियत देने के लिए एसडीएम के जमीनों के डायवर्सन के अधिकार को समाप्त कर दिया। डायवर्सन को ऑनलाइन किया गया।
कोई भी आदमी खुद ही ऑनलाइन एसडीएम के यहां एप्लाई करेगा और 15 दिन में अगर कोई एक्शन नहीं हुआ तो उसे स्वतः डायवर्टेड मान लिया जाएगा। 13 दिसंबर को नोटिफिकेशन राजपत्र में प्रकाशित भी हो गया। मगर इसके बाद राजस्व विभाग का अमला हरकत में आया।
डिप्टी कलेक्टर्स और तहसीलदारों का एक प्रतिनिधिमंडल मंत्री के यहां पहुंच गया। इसका नतीजा यह हुआ कि इस महत्वपूर्ण सुधार के क्रियान्वयन पर ब्रेक लग गया। आखिर क्यों लगा ब्रेक, इसकी बू तो सबको आ रही है।
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आखिर वह कौन सी चिट्ठी आई है, जिसने एक मंत्री को मुश्किल में डाल दिया है और क्यों पुलिस कमिश्नरी की चमक फीकी पड़ गई?
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वहीं, छत्तीसगढ़ का एक शहर ऐसा है जिस पर दिग्गजों की नजर है। इस शहर से कई दिग्गज आते हैं, इसलिए यहां पर दंगल चलता ही रहता है। छत्तीसगढ़ की ऐसी ही राजनीतिक और प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़िए द सूत्र का साप्ताहिक कॉलम सिंहासन छत्तीसी।
अफसर की तिकड़म
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छत्तीसगढ़ सरकार ने तय किया था कि अब किसी को न तो एक्सटेंशन दिया जाएगा और न संविदा नियुक्ति। लेकिन इस पर सरकार कायम न रह सकी। जल संसाधन विभाग के एक अफसर को रिटायर होने के बाद जुलाई 2025 में उसी पद पर छह महीने की संविदा नियुक्ति मिली थी।
खबर अब यह भी है कि उन्हें अब एक्सटेंशन मिल गया है। ऐसा नहीं कि वहां इस का कोई दावेदार नहीं था। एक अधिकारी ने इस नियुक्ति के खिलाफ कोर्ट में याचिका लगाई, तो पर्दे के पीछे पता नहीं क्या चक्कर घुमाए गए कि उन्होंने अपनी अर्जी वापस ले ली।
बताया जा रहा है कि अधिकारी को पुरानी फाइल खोलने की धमकी दी गई ताकि वे अर्जी वापस ले लें। विभाग ने अफसर को उपकृत करने के लिए ऐसा ताना-बाना बनाया कि एसई का सालों तक प्रमोशन नहीं हुआ। ताकि, उन्हें कोई रिप्लेस न कर पाए। अब ये जादू है या बाजीगरी, लेकिन अफसर की तो मौज हो गई।
सियासी वर्चस्व की लड़ाई
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छत्तीसगढ़ की सियासत में बिलासपुर का सिक्का चलता रहा है। बीजेपी के भीतर ही बिलासपुर में वर्चस्व की लड़ाई छिड़ गई है। एक विधायक हैं जो यहां पर अंगद की पैर की तरह जमे हैं। तो वहीं डिप्टी सीएम की नजर भी इस शहर पर पड़ गई है। वे अपनी ताकत दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ते।
वहीं केंद्रीय मंत्री भी इसी शहर से आते हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर नेता प्रतिपक्ष और विधानसभा अध्यक्ष रह चुके एक विधायक भी यहीं से हैं। दो और विधायक हैं जो इसी इलाके से आते हैं। इस दंगल को रोकने के लिए अब खुद सीएम अंपायर बन गए हैं।
शहरों के विकास की बात आई तो सीएम ने रायपुर से पहले बिलासपुर की मीटिंग ली। इस बार 26 जनवरी को उन्होंने झंडा भी बिलासपुर में ही फहराया। 23 साल बाद बिलासपुर में किसी मुख्यमंत्री ने गणतंत्र दिवस को झंडा फहराया। सीएम का फोकस बढ़ा है, तो हो सकता है इस दंगल में मंगल शुरु हो जाए।
बड़े फैसले पर ब्रेक
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सरकार के एक बड़े फैसले पर ब्रेक लग गया है। यह बात सब जानते हैं कि जमीनों के डायवर्सन के लिए लोगों को अधिकारियों को चढ़ावा चढ़ाना पड़ता था। सरकार ने आम आदमी को सहूलियत देने के लिए एसडीएम के जमीनों के डायवर्सन के अधिकार को समाप्त कर दिया। डायवर्सन को ऑनलाइन किया गया।
कोई भी आदमी खुद ही ऑनलाइन एसडीएम के यहां एप्लाई करेगा और 15 दिन में अगर कोई एक्शन नहीं हुआ तो उसे स्वतः डायवर्टेड मान लिया जाएगा। 13 दिसंबर को नोटिफिकेशन राजपत्र में प्रकाशित भी हो गया। मगर इसके बाद राजस्व विभाग का अमला हरकत में आया।
डिप्टी कलेक्टर्स और तहसीलदारों का एक प्रतिनिधिमंडल मंत्री के यहां पहुंच गया। इसका नतीजा यह हुआ कि इस महत्वपूर्ण सुधार के क्रियान्वयन पर ब्रेक लग गया। आखिर क्यों लगा ब्रेक, इसकी बू तो सबको आ रही है।
द सूत्र पर पढ़िए सिंहासन छत्तीसी के अन्य कॉलम...
मेडम पर मेहरबान हैं साहब, लड़कियों की सेहत सप्लाई कर रही है टेबल कुर्सी बनाने वाली कंपनी
आखिर वह कौन सी चिट्ठी आई है, जिसने एक मंत्री को मुश्किल में डाल दिया है और क्यों पुलिस कमिश्नरी की चमक फीकी पड़ गई?
ईडी की जद में आने वाले हैं कौन से माननीय, पुलिस की नई व्यवस्था पर उठ रहे सवाल, ऐसी कैसी कमिश्नरी
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