17 KM पैदल सफर; एंबुलेंस न मिली, बिगड़ी हालत, अफसर बोले कॉल नहीं आया

thesootr Desk | Mar 19, 2026, 14:26 IST
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17 KM Walk No Ambulance Available Patient Condition Worsens
17 KM Walk No Ambulance Available Patient Condition Worsens

बुजुर्ग को स्ट्रोक आने पर पैदल और खाट में 17 किलोमीटर अस्पताल तक ले जाना पड़ा, क्योंकि एंबुलेंस उपलब्ध नहीं थी। यह घटना मैनपुर क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर लापरवाही और पहाड़ी इलाकों में आपातकालीन सेवाओं की कमी को उजागर करती है।

NEWS IN SHORT

  • मैनपुर में बुजुर्ग मरीज को खाट पर ले गए अस्पताल
  • खाट में 17 किलोमीटर तक ले जाना पड़ा पैदल
  • पहाड़ी इलाकों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं नहीं
  • मनू राम केस: प्रशासन की अनदेखी ने बढ़ाया मरीजों का खतरा
  • लोग मांग रहे त्वरित सुधार और आपातकालीन सेवाएँ

NEWS IN DETAIL

Gariaband : मैनपुर क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की खराब स्थिति ने एक बार फिर ग्रामीणों की दैनिक जरूरतों के मुद्दों को उजागर किया है। कमार जनजाति के 60 वर्षीय बुजुर्ग की हालत बिगड़ने पर उन्हें पैदल और खाट में लादकर लगभग 17 किलोमीटर दूर पहाड़ों से नीचे उतारना पड़ा, लेकिन पंचायत मुख्यालय तक भी एंबुलेंस सेवा उपलब्ध नहीं हो सकी। आखिरकार परिजनों को निजी वाहन से उन्हें मैनपुर सरकारी अस्पताल ले जाना पड़ा, जहां से उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया।

खाट में लादकर मरीज को पहुंचाया अस्पताल

घटना बुधवार सुबह की बताई गई, जब मनू राम अचानक बेसुध होकर गिर पड़े। उनके परिजनों ने करीब डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें कुल्हाडीघाट मुख्यालय तक पहुँचाया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों से एंबुलेंस की मांग की, लेकिन स्वास्थ्य सेवा की असुविधाजनक स्थिति के चलते किसी तरह की मदद नहीं मिल सकी। जिसके बाद मरीज को खाट में लादकर पहाड़ी रास्तों से नीचे लाया गया। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

बीएमओ ने कहा मामले की जानकारी नहीं

मैनपुर के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) गजेन्द्र ध्रुव से इस घटना की पुष्टि के लिए संपर्क किया गया। उन्होंने प्रारंभ में कहा कि उन्हें इस घटना की कोई जानकारी नहीं है क्योंकि वह कल वहाँ नहीं थे। आधे घंटे बाद वापस कॉल कर उन्होंने बताया कि मरीज को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या थी और उन्हें पैरालिसिस अटैक हुआ। उनका कहना था कि परिजनों ने एंबुलेंस के लिए कॉल नहीं किया होगा, इसलिए कुल्हाड़ीघाट से कोई मदद नहीं मिल पाई।

क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंता जनक

जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों ने बताया कि मनू राम को लगभग डेढ़ बजे दोपहर में भर्ती किया गया। उनका मामला स्ट्रोक का था और दाहिने साइड लकवा मार चुका था। चिकित्सकों की टीम मरीज को उचित उपचार प्रदान कर रही है, लेकिन स्वास्थ्य सेवा की देरी और आपातकालीन व्यवस्था की कमी ने क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।

स्वास्थ्य व्यवस्था से नाराज ग्रामीण

स्थानीय लोग स्वास्थ्य व्यवस्था की इस लचर स्थिति से नाराज हैं। उनका कहना है कि पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। मनू राम की घटना इस बात का उदाहरण है कि छोटे गांवों और जनजातीय क्षेत्रों में गंभीर स्वास्थ्य मामलों में भी त्वरित और प्रभावी मदद नहीं मिल पा रही है।

स्थानीय समुदाय ने प्रशासन से मांग की है कि पहाड़ी क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में एंबुलेंस और प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ तैनात किए जाएँ, ताकि आपातकालीन स्थिति में समय पर इलाज मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं का सीधा असर ग्रामीण जीवन और उनकी सुरक्षा पर पड़ता है।

विशेषज्ञ सुझाव

ऐसे क्षेत्रों में मोबाइल स्वास्थ्य सेवाएं होनी चाहिए
24 घंटे उपलब्ध आपातकालीन सेवाओं का प्रावधान होनी चाहिए
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था होनी चाहिए

जनता की राय में, जब आपातकालीन सेवा उपलब्ध नहीं होती और मरीज को खाट में लादकर पहाड़ी रास्तों से ले जाना पड़ता है, तो यह न केवल व्यक्तिगत बल्कि सामूहिक स्वास्थ्य संकट का संकेत है।

निष्कर्ष

मैनपुर में 60 वर्षीय मनू राम को स्ट्रोक आने पर पैदल और खाट में 17 किलोमीटर अस्पताल तक ले जाना पड़ा। पंचायत मुख्यालय तक भी एंबुलेंस नहीं मिली, स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह फेल रही। स्थानीय लोग प्रशासन से पहाड़ी क्षेत्रों में आपातकालीन सेवाओं की त्वरित सुधार की मांग कर रहे हैं। यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर लापरवाही और सुधार की तत्काल आवश्यकता को उजागर करती है।

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