अंबेडकर पर इंस्टाग्राम टिप्पणी.... हाईकोर्ट ने कहा चलेगा मुकदमा
Rajesh Lahoti | Aug 07, 2026, 19:56 IST
बाबा अंबेडकर पर आपत्तिजनक टिप्पणी
हाईकोर्ट ने इंस्टाग्राम पर डॉ. भीमराव अंबेडकर के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में आरोपी महिला को राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने महिला की एफआईआर और आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की याचिका खारिज कर दी।
Raipur. इंस्टाग्राम पर डॉ. भीमराव अंबेडकर के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में फंसी एक महिला को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है।
अदालत ने महिला के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी और आपराधिक मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि मामले में पहली नजर में पर्याप्त साक्ष्य दिखाई दे रहे हैं, इसलिए मुकदमे की सुनवाई जारी रहेगी।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। महिला ने अदालत से अपील की थी कि उसके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी और विशेष अदालत की ओर से तय किए गए आरोपों को रद्द कर दिया जाए।
अभियोजन पक्ष के अनुसार महिला ने इंस्टाग्राम पर डॉ. बी.आर. अंबेडकर के बारे में कथित तौर पर आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणियां पोस्ट की थीं।
इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच पूरी होने के बाद आरोप पत्र अदालत में पेश कर दिया। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराएं लगाई गई हैं।
महिला की ओर से कहा गया कि विशेष अदालत ने बिना पर्याप्त जांच पड़ताल के आरोप तय कर दिए। यह भी तर्क दिया गया कि मामले में लगाए गए आरोपों के लिए जरूरी कानूनी आधार मौजूद नहीं हैं।
अदालत ने कहा कि इस स्तर पर आरोपों की सच्चाई या झूठ की जांच नहीं की जा सकती। अदालत का काम मुकदमे की पूरी सुनवाई करना नहीं है। यदि शुरुआती जांच में अपराध के संकेत मिलते हैं, तो मामले को आगे बढ़ने दिया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, सोशल मीडिया पोस्ट और कथित टिप्पणियों के पीछे की मंशा जैसे मुद्दों की जांच मुकदमे के दौरान ही की जा सकती है।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि केवल इस आधार पर मामले को खत्म नहीं किया जा सकता कि विशेष अदालत के आदेश में कानून की सभी धाराओं का विस्तार से उल्लेख नहीं किया गया है। जब तक यह साबित नहीं हो जाता कि इससे आरोपी को किसी तरह की हानि हुई है, तब तक कार्यवाही जारी रहेगी।
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अदालत ने महिला के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी और आपराधिक मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि मामले में पहली नजर में पर्याप्त साक्ष्य दिखाई दे रहे हैं, इसलिए मुकदमे की सुनवाई जारी रहेगी।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। महिला ने अदालत से अपील की थी कि उसके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी और विशेष अदालत की ओर से तय किए गए आरोपों को रद्द कर दिया जाए।
क्या है पूरा मामला
इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच पूरी होने के बाद आरोप पत्र अदालत में पेश कर दिया। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराएं लगाई गई हैं।
महिला की ओर से कहा गया कि विशेष अदालत ने बिना पर्याप्त जांच पड़ताल के आरोप तय कर दिए। यह भी तर्क दिया गया कि मामले में लगाए गए आरोपों के लिए जरूरी कानूनी आधार मौजूद नहीं हैं।
हाई कोर्ट ने क्या कहा
अदालत की अहम टिप्पणी
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