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Raipur. छत्तीसगढ़ में राजनीति के अहम किरदार रहे अमित जोगी ने दो साल की खामोशी के बाद अपनी चुप्पी तोड़ी है। सियासत के बाद से मंद पड़ी उनकी चाल में तेजी की आहट आने लगी है। छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस जे के प्रमुख और प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी की सक्रियता ने राजनीतिक गरमाहट ला दी है।
वे न सिर्फ अलग अलग जगह जाकर लोगों से मिल रहे हैं बल्कि हाल ही के राजनीतिक घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं। वे रेडियो पर युवाओं से अपील भी कर रहे हैं कि आइए कॉफी पीयें और बातें करें क्योंकि मैं कॉफी बातें दोनों बहुत अच्छी बनाता हूं। आखिर इस सक्रियता के क्या मायने हैं। क्या छत्तीसगढ़ में तीसरी पार्टी की फिर से ताकत से मौजूदगी की तैयारी है या फिर कांग्रेस में विलय की कोशिशें रंग लाएंगी।
फिर से सक्रिय हुए अमित जोगी :
छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस जे के अध्यक्ष अमित जोगी फिर से सक्रिय हो गए हैं। उनकी सोशल मीडिया एकाउंट को देखें या फिर मीडिया में मौजूदगी को, दोनों प्लेटफॉर्म पर वो फॉर्म में नजर आ रहे हैं। 2023 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद अमित जोशी खामोशी से चिंतन मंथन में जुटे थे और सार्वजनिक मौजूदगी से कमोबेश पूरी तरह परहेज बरत लिया था।
अब वे फिर सक्रिय हो गए हैं। वे न सिर्फ युवाओं से कॉफी पीने की बात करते हैं बल्कि कांग्रेस एमएलए संदीप साहू की माताजी से मिलने अस्पताल जाते हैं। विधायक देवेंद्र यादव के भिलाई स्टील प्लांट के विरोध चल रहे आंदोलन का समर्थन करते हैं। रसोइयों के धरने में पत्नी समेत टिफिन लेकर पहुंचते हैं और उनको खाना खिलाते हैं।
एनएमडीसी के निजीकरण के विरोध में खुलकर सामने आते हैं। साय सरकार और बीजेपी के खिलाफ खुलकर बोलते हैं। अब तो उनका दौरा कार्यक्रम भी जारी होने लगा है। इन सब बातों से साफ लगता है कि अमित जोगी अब सक्रिय हो गए हैं।
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जारी होने लगा कार्यक्रम :
अमित जोगी के ताजा कार्यक्रम के तहत वे 13 जनवरी को कोरबा जाएंगे। इस दौरान वे पार्टी संगठन को मजबूती देने के साथ-साथ जनहित के मुद्दों को लेकर प्रदेश की बड़ी औद्योगिक कंपनी बालको (वेदांता) के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे। जानकारी के अनुसार अमित जोगी 13 जनवरी को दोपहर 1:30 बजे सड़क मार्ग से कोरबा पहुंचेंगे।
दोपहर 2:00 बजे वे कोरबा के निहारिका क्षेत्र में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के नए जिला कार्यालय का उद्घाटन करेंगे। पार्टी के स्थानीय नेता अजय कुमार के नेतृत्व में इस कार्यक्रम की तैयारियां जोरों पर हैं। कार्यालय उद्घाटन के माध्यम से पार्टी जिले में अपनी सक्रियता बढ़ाने की रणनीति बना रही है। राजनीतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ अमित जोगी सामाजिक कार्यों में भी शामिल होंगे।
दोपहर 2:30 बजे वे स्थानीय कुष्ठ आश्रम पहुंचेंगे, जहां जरूरतमंदों को कंबल वितरित कर उनसे मुलाकात करेंगे। इसके पश्चात दोपहर 3:00 बजे वे कोरबा प्रेस क्लब में पत्रकारों से चर्चा कर प्रदेश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति और स्थानीय समस्याओं पर अपनी बात रखेंगे।
कांग्रेस में शामिल होने की कोशिश :
अमित जोगी ने हाल ही में मीडिया से बातचीत में यह साफ किया है कि वे बिना शर्त कांग्रेस में शामिल होने को तैयार हैं। आखिर मुश्किल क्या है, इस पर अमित कहते हैं कि वे बार बार नंबर डायल कर रहे हैं लेकिन कांग्रेस में कोई फोन नहीं उठा रहा। अमित स्वीकार करते हैं कि उनसे कुछ गल्तियां हुई होंगी लेकिन उनको छोड़कर वे आगे बढ़ने को तैयार हैं क्योंकि सब मिलकर ही बीजेपी से मुकाबला कर पाएंगे।
अमित ने कहा कि भूपेश बघेल, चरणदास महंत, टीएस सिंहदेव ये सभी मेरे पिता के साथ के हैं और मेरे पिता समान ही हैं, पता नहीं फिर क्यों इनकों मेरे शामिल होने से दिक्कत है। मैं सोनिया गांधी के पास जाकर छत्तीसगढ़ में पैराशूट लैंडिंग नहीं करना चाहता, मुझे इन सब लोगों के साथ ही काम करना है। अगर कोई कहे कि मेरे सामने नाक रगड़ो तो मैं आत्म सम्मान से सौदा नहीं करुंगा।
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चैतन्य की जमानत पर बयान :
हाल ही में भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य की जमानत पर भी अमित जोगी ने खुलकर अपनी बात रखी। अमित जोगी ने कहा कि आजकल समाचार पत्र खोलते ही केवल जेल और बेल की ही खबरें दिखाई देती हैं, जबकि असली सवाल यह है, कि जेल और बेल के बीच जो राजनीतिक खेल चल रहा है, उस पर गंभीर चर्चा क्यों नहीं हो रही।
अमित जोगी ने कहा, चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी के समय भी उन्होंने यह बात कही थी कि राजनीति को इतना भी नहीं गिराना चाहिए कि विरोध का बदला परिवार के सदस्यों से लिया जाए। अमित जोगी ने कहा, किसी से राजनीति के मैदान में मतभेद है तो वह राजनीति तक सीमित रहना चाहिए, न की उसके बेटे, पत्नी या परिवार के अन्य सदस्यों को निशाना बनाया जाना चाहिए।
पूरा मामला कोर्ट में चल रहा है इसलिए मैं ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा। लेकिन इतना तय है कि केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए किया जा रहा है, विपक्ष को दबाने के लिए. अपने राजनीतिक फायदे के लिए किसी के परिवार को निशाना बनाना गलत है।
घर का जोगी जोगड़ा :
एक कहावत है कि घर का जोगी जोगड़ा आन गांव का सिद्ध। यानी घर के लोगों का महत्व कम होता है जबकि बाहरी की ज्यादा पूछ परख होती है। कांग्रेस में भी कुछ इसी तरह का माहौल है। मूल कांग्रेस अमित जोगी का पार्टी में प्रवेश नहीं हो रहा और दूसरी पार्टी या अपनी ही पार्टी के अनुशासनहीनता में बाहर हुए नेताओं को वापस लिया जा रहा है। हालांकि ये कांग्रेस की अंदर की बात है। भूपेश बघेल और जोगी परिवार की पुरानी अदावत है, जब तक इस अदावत की आग को बुझाया नहीं जाता तब तक तो यह मिलन होने की संभावना नजर नहीं आती।
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