नक्सल इलाकों के लिए दिल्ली से आया शाही प्लान, शिक्षा,स्वास्थ्य और आजीविका पर 250 करोड़ खर्च
Arun Tiwari | Sept 03, 2025, 16:32 IST
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रायपुर : केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जब से नक्सल खात्मे की डेडलाइन तय की है तबसे छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित जिलों के लोगों की बेहतरी के लिए नया प्लान तैयार किया है।
रायपुर : केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जब से नक्सल खात्मे की डेडलाइन तय की है तबसे छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित जिलों के लोगों की बेहतरी के लिए नया प्लान तैयार किया है। सड़क,बिजली,पानी और मोबाइल टॉवर के अलावा इस प्लान में शिक्षा,स्वास्थ्य और आजीविका पर खास फोकस किया गया है। अमित शाह ने छत्तीसगढ़ सरकार को इस प्लान के साथ 250 करोड़ रुपए दिए हैं।
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इस फंड को नक्सल प्रभावित 9 जिलों में शिक्षा,स्वास्थ्य और रोजगार पर खर्च किया जा रहा है। इसमें से सबसे ज्यादा पैसा बस्तर,दंतेवाड़ा,बीजापुर,सुकमा,नारायणपुर और कांकेर जिलों में खर्च किया जा रहा है। यह वे जिले हैं जो नक्सल के कारण सबसे पिछड़े और गरीब हैं। शाह ने सबसे पहले इन जिलों की चिंता की है।
छत्तीसगढ़ में नक्सल के खात्मे की डेडलाइन मार्च 2026 तय की गई है। लेकिन नक्सल से उजड़े गांवों को संवारने के लिए सबसे पहले उनकी बुनियादी जरुरतों को पूरा करना है। इसीके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय से छत्तीसगढ़ सरकार को एक प्लान दिया गया है। इस प्लान में नक्सल प्रभावित 9 जिलों के लिए शिक्षा,स्वास्थ्य और आजीविका की कार्ययोजना बताई गई है।
इसके लिए केंद्र सरकार ने 250 करोड़ रुपए पहली किस्त के रुप में दिए हैं। इस फंड से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोगों की पढ़ाई,लिखाई,दवाई और रोजगार का इंतजाम करना है। सबसे ज्यादा पैसा नक्सलियों के कोर इलाके रहे बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर और कांकेर जिलों के लिए है।
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केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय कहते हैं कि जो डेडलाइन तय की है उस पर माओवाद खात्मा तय है। नक्सल प्रभावित जिलों के लिए सरकार अब तक तीन हजार करोड़ से ज्यादा का खर्च कर चुकी है। सरकार का फोकस इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ ही शिक्षा,स्वास्थ्य और आजीविका के साधनों पर है।
छत्तीसगढ़ नक्सल डेडलाइन | नक्सलवाद | CG News
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इस फंड को नक्सल प्रभावित 9 जिलों में शिक्षा,स्वास्थ्य और रोजगार पर खर्च किया जा रहा है। इसमें से सबसे ज्यादा पैसा बस्तर,दंतेवाड़ा,बीजापुर,सुकमा,नारायणपुर और कांकेर जिलों में खर्च किया जा रहा है। यह वे जिले हैं जो नक्सल के कारण सबसे पिछड़े और गरीब हैं। शाह ने सबसे पहले इन जिलों की चिंता की है।
पढ़ाई,लिखाई,दवाई का प्लान :
इसके लिए केंद्र सरकार ने 250 करोड़ रुपए पहली किस्त के रुप में दिए हैं। इस फंड से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोगों की पढ़ाई,लिखाई,दवाई और रोजगार का इंतजाम करना है। सबसे ज्यादा पैसा नक्सलियों के कोर इलाके रहे बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर और कांकेर जिलों के लिए है।
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इन जिलों में इतना खर्च :
- बीजापुर - 35 करोड़
- सुकमा - 33 करोड़
- बस्तर - 31 करोड़
- दंतेवाड़ा - 39 करोड़
- कांकेर - 33 करोड़
- नारायणपुर - 35 करोड़
- मोहेला मानपुर - 12 करोड़
- गरियाबंद - 10 करोड़
- राजनांदगांव - 8 करोड़
इन्फ्रास्ट्रक्चर पर इतना काम :
- सड़कें - 3535 किलोमीटर
- मोबाइल टॉवर - 1420
- एकलव्य स्कूल - 36
- आईटीआई - 09
- पोस्ट ऑफिस - 1382
- बैंक शाखाएं - 297
- एटीएम - 268
- बैंकिंग कोरेस्पोंडेंट - 5044
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय कहते हैं कि जो डेडलाइन तय की है उस पर माओवाद खात्मा तय है। नक्सल प्रभावित जिलों के लिए सरकार अब तक तीन हजार करोड़ से ज्यादा का खर्च कर चुकी है। सरकार का फोकस इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ ही शिक्षा,स्वास्थ्य और आजीविका के साधनों पर है।
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