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Photograph: (the sootr)
NEWS IN SHORT
- अमित शाह ने बघेल सरकार पर नक्सलियों को संरक्षण देने का गंभीर आरोप लगाया।
- कांग्रेस ने पलटवार करते हुए शाह द्वारा की गई पुरानी तारीफ की याद दिलाई।
- संसद के आंकड़ों के अनुसार, बघेल राज में नक्सली हिंसा 36% तक कम हुई।
- कांग्रेस ने 'विश्वास, विकास और सुरक्षा' मॉडल को अपनी बड़ी सफलता करार दिया।
- शाह के बयान को कांग्रेस ने पूरी तरह राजनीतिक विद्वेष और चुनावी स्टंट बताया।
NEWS IN DETAIL
RAIPUR.छत्तीसगढ़ में एक बार फिर नक्सलवाद पर जुबानी जंग तेज हो गई है। प्रदेश के दौरे पर आए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस की भूपेश सरकार पर नक्सलियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया।
अमित शाह के बयान पर कांग्रेस ने पलटवार किया। कांग्रेस ने कहा कि 4 साल पहले अमित शाह ही नक्सल के मुद्दे पर तत्कालीन भूपेश सरकार की तारीफ कर चुके हैं। इतना ही नहीं लोकसभा में भी उस समय यह मुद्दा उठा था तब गृह राज्यमंत्री ने जवाब दिया था कि नक्सल मामले में 36 फीसदी की कमी आई है।
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अमित शाह ने यह दिया बयान
रायपुर में 8 फरवरी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर बड़ा हमला बोला। रायपुर में ऑर्गनाइजर के कॉनक्लेव में उन्होंने कहा कि मैं भूपेश बघेल के समय भी केंद्रीय गृह मंत्री रहा था। मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ यह कह सकता हूं कि बघेल सरकार ने माओवादी आतंक को प्रश्रय दिया था। मैं समझ नहीं पाता हूं कि कैसे कोई शासन किसी हथियारबंद समूह को संरक्षण दे सकता है।
कांग्रेस ने बताया झूठा बयान
नक्सलवाद को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बयानों पर कांग्रेस ने सवाल खड़े किए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि, नक्सलवाद के मुद्दे पर गृहमंत्री राजनीतिक विद्वेष के चलते तथ्यों से अलग बयान दे रहे हैं, जबकि चार साल पहले वे खुद भूपेश सरकार के कामकाज की सराहना कर चुके हैं। कांग्रेस का दावा है कि, जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी, तब नक्सली घटनाओं में लगातार कमी दर्ज की गई।
पार्टी ने याद दिलाया कि, 5 अप्रैल 2021 को छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान अमित शाह ने मीडिया से कहा था कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार के संयुक्त प्रयासों से नक्सलवाद को काफी हद तक पीछे धकेला गया है। नक्सली घटनाओं में करीब 80 फीसदी तक गिरावट आई है। उसी दौरान राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी नक्सलवाद के “पैकअप मोड” में होने की बात कही थी।
लोकसभा में भी हुई थी भूपेश सरकार की तारीफ
कांग्रेस ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद के बयान का ट्वीट जारी किया। इस ट्वीट में बताया कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने लोकसभा में बयान दिया था कि छत्तीसगढ़ में 2018 की तुलना में 2022 में नक्सलवाद से संबंधित हिंसा की घटनाओं में 36 प्रतिशत की कमी आई है।
इस दौरान उग्रवाद से संबंधित हिंसा की घटनाओं में 22 प्रतिशत, जबकि परिणामी मौतों की संख्या में 60 प्रतिशत की कमी आई है। वामपंथी उग्रवाद से संबंधित हिंसक घटनाओं की संख्या में 2010 की तुलना में 2022 में 76 प्रतिशत तक की कमी आई है।
कांग्रेस ने कहा कि, भूपेश सरकार के कार्यकाल में “विश्वास, विकास और सुरक्षा” के मॉडल पर काम हुआ। जिसका असर जमीन पर दिखा। दूरस्थ और नक्सल प्रभावित इलाकों में नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए। सड़क और पुलों का निर्माण हुआ।
अबूझमाड़ जैसे इलाकों में कनेक्टिविटी बेहतर की गई। कांग्रेस ने दावा किया कि, उनके कार्यकाल में 600 से अधिक गांव नक्सल मुक्त घोषित हुए। नक्सली गतिविधियां सीमित इलाकों तक सिमट गई थीं। सड़क निर्माण, रोजगार के साधन और प्रशासन की पहुंच बढ़ने से नक्सलियों की पकड़ कमजोर पड़ी।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि, आज वही प्रयासों को नजरअंदाज कर राजनीतिक बयानबाजी की जा रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि नक्सलवाद पर नियंत्रण के पीछे पूर्ववर्ती सरकार की नीतियों की बड़ी भूमिका रही है।
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