साय सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज, सीएम बोले झूठ में पीएचडी है कांग्रेस
Harrison Masih | Jul 18, 2026, 12:38 IST
अविश्वास प्रस्ताव खारिज 2026
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज हो गया। नेता प्रतिपक्ष महंत ने सरकार पर भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और जनहित की अनदेखी के आरोप लगाए। मुख्यमंत्री साय ने आरोपों का जवाब देते हुए कांग्रेस पर पलटवार किया।
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन कांग्रेस द्वारा भाजपा सरकार के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज हो गया। इस प्रस्ताव पर सदन में 14 घंटे 30 मिनट तक चर्चा चली। सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
चर्चा के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया और कहा कि जनता ने झूठ और भ्रष्टाचार की राजनीति को पहले ही नकार दिया है। इसके बाद अविश्वास प्रस्ताव को सदन ने अस्वीकार कर दिया।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने अविश्वास प्रस्ताव पेश करते हुए राज्य सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लोकतांत्रिक परंपराओं की अनदेखी हो रही है। कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी है और सरकार जन कल्याणकारी योजनाओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही है।
महंत ने किसानों, युवाओं और आम जनता से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि यदि झूठ बोलने और भ्रष्टाचार करने में कोई पीएचडी होती तो कांग्रेस सबसे आगे होती।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार आदिवासियों, किसानों, महिलाओं और युवाओं के हित में लगातार काम कर रही है। प्रधानमंत्री जनमन योजना समेत कई योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।
साय ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में प्रदेश भ्रष्टाचार का केंद्र बन गया था और जनता ने उसी कारण कांग्रेस को सत्ता से बाहर किया।
![No-confidence motion]()
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने चर्चा के दौरान सरकार पर कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी उपलब्धियां बताने में सफल नहीं रही है।
बघेल ने आरोप लगाया कि किसानों से धान खरीदी, राशन वितरण और कर्मचारियों के हितों से जुड़े कई मुद्दों पर सरकार की स्थिति संतोषजनक नहीं है। उन्होंने दावा किया कि कई योजनाओं के क्रियान्वयन में समस्याएं सामने आ रही हैं।
चर्चा के दौरान सदन में कुछ समय के लिए हंगामा भी हुआ। उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा के भाषण के दौरान राहुल गांधी और नक्सली कमांडर हिड़मा का नाम आने पर विपक्ष ने आपत्ति जताई।
इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई, जिसके चलते सदन की कार्यवाही कुछ मिनटों के लिए स्थगित करनी पड़ी।
प्रश्नकाल के दौरान महतारी वंदन योजना को लेकर भी सरकार को विपक्ष के सवालों का सामना करना पड़ा। विधायक उमेश पटेल ने योजना के लाभार्थियों के आंकड़ों और नाम कटने के मामलों को लेकर सवाल उठाए।
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने जवाब देते हुए कहा कि कई मामलों में ई-केवाईसी, दोहरे आवेदन, 18 वर्ष से कम आयु और अन्य तकनीकी कारणों के चलते नामों की जांच और सत्यापन किया गया है। विपक्ष इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ और सदन से वॉकआउट कर दिया।
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा देर रात करीब 2:40 बजे तक चली। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपने-अपने तर्क रखे। अंत में सदन ने अविश्वास प्रस्ताव को खारिज कर दिया और मानसून सत्र का समापन हुआ।
इस तरह भाजपा सरकार ने विधानसभा में अपना बहुमत साबित करते हुए कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव को असफल कर दिया।
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चर्चा के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया और कहा कि जनता ने झूठ और भ्रष्टाचार की राजनीति को पहले ही नकार दिया है। इसके बाद अविश्वास प्रस्ताव को सदन ने अस्वीकार कर दिया।
महंत ने सरकार पर लगाए कई आरोप
महंत ने किसानों, युवाओं और आम जनता से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए।
मुख्यमंत्री साय का पलटवार
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार आदिवासियों, किसानों, महिलाओं और युवाओं के हित में लगातार काम कर रही है। प्रधानमंत्री जनमन योजना समेत कई योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।
साय ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में प्रदेश भ्रष्टाचार का केंद्र बन गया था और जनता ने उसी कारण कांग्रेस को सत्ता से बाहर किया।
No-confidence motion
भूपेश बघेल ने सरकार को घेरा
बघेल ने आरोप लगाया कि किसानों से धान खरीदी, राशन वितरण और कर्मचारियों के हितों से जुड़े कई मुद्दों पर सरकार की स्थिति संतोषजनक नहीं है। उन्होंने दावा किया कि कई योजनाओं के क्रियान्वयन में समस्याएं सामने आ रही हैं।
राहुल गांधी और हिड़मा के नाम पर हंगामा
इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई, जिसके चलते सदन की कार्यवाही कुछ मिनटों के लिए स्थगित करनी पड़ी।
महतारी वंदन योजना पर भी सरकार घिरी
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने जवाब देते हुए कहा कि कई मामलों में ई-केवाईसी, दोहरे आवेदन, 18 वर्ष से कम आयु और अन्य तकनीकी कारणों के चलते नामों की जांच और सत्यापन किया गया है। विपक्ष इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ और सदन से वॉकआउट कर दिया।
देर रात तक चली कार्यवाही
इस तरह भाजपा सरकार ने विधानसभा में अपना बहुमत साबित करते हुए कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव को असफल कर दिया।
FAQ
- अविश्वास प्रस्ताव क्या होता है?
अविश्वास प्रस्ताव विपक्ष द्वारा सरकार के प्रति विश्वास न होने का प्रस्ताव होता है। इस पर सदन में चर्चा होती है और फिर मतदान या ध्वनिमत के जरिए फैसला लिया जाता है। यदि सरकार के पक्ष में बहुमत रहता है, तो अविश्वास प्रस्ताव गिर जाता है। - छत्तीसगढ़ में कितनी बार अविश्वास प्रस्ताव लाए जा चुके हैं?
छत्तीसगढ़ विधानसभा के गठन के बाद अब तक 10 बार अविश्वास प्रस्ताव लाए जा चुके हैं। इनमें अजीत जोगी, डॉ. रमन सिंह, भूपेश बघेल और विष्णुदेव साय सरकारों के खिलाफ प्रस्ताव पेश किए गए, लेकिन हर बार संबंधित सरकार ने सदन में बहुमत साबित किया और कोई भी अविश्वास प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। You’re
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