आयुष्मान योजना के पैकेज सालों पुराने... अब इलाज करना मुश्किल
Kanak Durga Jha | May 21, 2025, 14:53 IST
Ayushman Yojana packages years old now difficult to get treatment
Ayushman Yojana : शहीद वीरनारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना में बीमारियों के लिए निर्धारित दर में पिछले सात साल संशोधन नहीं किया गया है।
Ayushman Yojana : शहीद वीरनारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना में बीमारियों के लिए निर्धारित दर में पिछले सात साल संशोधन नहीं किया गया है। वर्तमान में जिस ओपन हार्ट सर्जरी का खर्च लगभग 6 लाख रुपए हो गया है, उसके लिए आयुष्मान की दर ढाई लाख रुप निर्धारित है। इसके अलावा पैकेज शामिल अन्य बीमारियों के इलाज क पैकेज भी वर्तमान खर्च से लगभग पचास फीसदी कम है।
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डाक्टरों का तर्क है कि पुराने पैकेज में अस्पताल चलाना मुश्किल है, इसलिए कई बार गड़बड़ी की शिकायत आती रहती है। पुराने पैकेज को रीव्यू कर वर्तमान खर्च का आकलन कर इसमें संशोधन की आवश्यकता है। चिकित्सकों के विभिन्न संगठन कई बार आयुष्मान योजना के पैकेज में संशोधन की मांग कर चुके हैं। उनका तर्क कि अभी भी इस योजना में विभिन्न बीमारियों के इलाज का खर्च वर्ष 2017-18 के आधार पर तय है।
बीते सात सालों में महंगाई काफी बढ़ चुकी है। मेडिकल उपकरणों से लेकर अन्य चीजों के दाम बढ़ चुके हैं। ऐसे में सात साल पुरानी दर पर इलाज करना कैसे संभव हो सकता है। अनुबंध के मुताबिक आयुष्मान के पैकेज का रीव्यू एक निर्धारित अवधि पर किया जाना चाहिए, मगर इस नियम का पालन नहीं हो पा रहा है।
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कई बीमारियों के पैकेज तो इतने कम हैं कि इससे मरीज की दवाइयां पूरी नहीं आ पातीं, ऐसे में अस्पताल इलाज से इनकार करता है और मरीजों को निराश होना पड़ता है। चिकित्सकों का तर्क है, कम पैकेज की वजह से कई बार अस्पतालों में अतिरिक्त राशि लिये जाने के मामले भी सामने आते हैं। इन सब परेशानियों को दूर करने का एकमात्र तरीका आयुष्मान के पैकेज का निर्धारण वर्तमान स्थिति को देखकर किये जाने की जरूरत है।
पुनः निर्धारण की नितांत जरूरतएएचपीआई छत्तीसगढ़ चैप्टर के अध्यक्ष डॉ.राकेश गुप्ता ने बताया कि, पैकेज के पुनः निर्धारण किए जाने की नितांत आवश्यकता है। एसोसिएशन ऑफहेल्थकेयर प्रोवाइडर्स इंडिया सहित विभिन्न संगठन इसकी मांग काफी समय से करते आ रहे है। राज्य में अभी योजना के लिए जो दरें लागू है उस पर मरीजों को उपचार की सुविधा देना काफी मुश्किल है। पैकेज का समय-समय पर रिव्यू करना आवश्यक है।
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बीजू कार्ड का सिस्टम सहीओडिशा सरकार द्वारा पूर्व में संचालित बीजू स्वास्थ्य कार्ड की योजना को शानदार माना जाता है। इसमें बीमारियों के पैकेज संतोषप्रद होने के साथ भुगतान और निगरानी का सिस्टम भी व्यवस्थित था। चिकित्सकों का कहना है कि प्रदेश में भी इस तरह का सिस्टम बनाने की आवश्यकता है।
स्वास्थ्य योजना के पैकेज में संशोधन की बेहद जरूरत है, इसके लिए राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के साथ सरकारी और निजी चिकित्सको की टीम बनाकर काम पूरा किया जा सकता है। साथ ही अस्पतालों को भुगतान की प्रक्रिया को भी नियमित किए जाने की जरूरत है। इसकी अनियमितता के कारण छोटे और मझोले अस्पतालों को अक्सर आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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डाक्टरों का तर्क है कि पुराने पैकेज में अस्पताल चलाना मुश्किल है, इसलिए कई बार गड़बड़ी की शिकायत आती रहती है। पुराने पैकेज को रीव्यू कर वर्तमान खर्च का आकलन कर इसमें संशोधन की आवश्यकता है। चिकित्सकों के विभिन्न संगठन कई बार आयुष्मान योजना के पैकेज में संशोधन की मांग कर चुके हैं। उनका तर्क कि अभी भी इस योजना में विभिन्न बीमारियों के इलाज का खर्च वर्ष 2017-18 के आधार पर तय है।
आयुष्मान के नियमों का नहीं हो रहा पालन
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कई बीमारियों के पैकेज तो इतने कम हैं कि इससे मरीज की दवाइयां पूरी नहीं आ पातीं, ऐसे में अस्पताल इलाज से इनकार करता है और मरीजों को निराश होना पड़ता है। चिकित्सकों का तर्क है, कम पैकेज की वजह से कई बार अस्पतालों में अतिरिक्त राशि लिये जाने के मामले भी सामने आते हैं। इन सब परेशानियों को दूर करने का एकमात्र तरीका आयुष्मान के पैकेज का निर्धारण वर्तमान स्थिति को देखकर किये जाने की जरूरत है।
पुनः निर्धारण की नितांत जरूरतएएचपीआई छत्तीसगढ़ चैप्टर के अध्यक्ष डॉ.राकेश गुप्ता ने बताया कि, पैकेज के पुनः निर्धारण किए जाने की नितांत आवश्यकता है। एसोसिएशन ऑफहेल्थकेयर प्रोवाइडर्स इंडिया सहित विभिन्न संगठन इसकी मांग काफी समय से करते आ रहे है। राज्य में अभी योजना के लिए जो दरें लागू है उस पर मरीजों को उपचार की सुविधा देना काफी मुश्किल है। पैकेज का समय-समय पर रिव्यू करना आवश्यक है।
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स्वास्थ्य योजना के पैकेज में संशोधन जरुरी
स्वास्थ्य योजना के पैकेज में संशोधन की बेहद जरूरत है, इसके लिए राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के साथ सरकारी और निजी चिकित्सको की टीम बनाकर काम पूरा किया जा सकता है। साथ ही अस्पतालों को भुगतान की प्रक्रिया को भी नियमित किए जाने की जरूरत है। इसकी अनियमितता के कारण छोटे और मझोले अस्पतालों को अक्सर आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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