बस्तर में अर्नब तूफान से तबाही: उफान पर नदी-नाले, राहत शिविरों में पहुंचे सैकड़ों लोग

Umeshwari Baghel | Sept 25, 2026, 22:18 IST
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बस्तर में भारी बारिश से उफान पर नदी-नाले
बस्तर में भारी बारिश से उफान पर नदी-नाले

बंगाल की खाड़ी से उठे तूफान अर्नब का असर बस्तर में दिख रहा है। लगातार बारिश से कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। प्रशासन ने रेस्क्यू अभियान तेज कर 350 से ज्यादा लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया है। इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ने से अलर्ट जारी है।

Raipur। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती अर्नब तूफान का असर अब छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में दिखाई दे रहा है। लगातार हो रही तेज बारिश के कारण कई इलाकों में नदी-नाले उफान पर आ गए हैं। निचले क्षेत्रों में पानी भरने से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का अभियान तेज कर दिया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश के बाद जिला प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें लगातार राहत और बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं।

भारी बारिश के चलते बस्तर जिले के कई गांवों और शहर के कुछ हिस्सों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाना शुरू कर दिया है। इन शिविरों में लोगों के रहने, खाने, पीने के पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।

नावों की मदद से निकाले गए बाढ़ में फंसे लोग

बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा के मार्गदर्शन में राहत अभियान चलाया जा रहा है। नगरनार क्षेत्र के नदी बोड़ना इलाके में बाढ़ के पानी में फंसे करीब 40 लोगों को रेस्क्यू टीम ने नावों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद सभी लोगों को ग्राम पंचायत भवन में बनाए गए अस्थायी राहत केंद्र में पहुंचाया गया।

इसी तरह तोकापाल क्षेत्र के घाट धनोरा से कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है। पलवा और लोहंडीगुड़ा क्षेत्र के निचले इलाकों में पानी भरने के बाद वहां रहने वाले परिवारों को पंचायत भवन और अन्य सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया।

प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में टीमों की तैनाती बढ़ा दी है। जहां भी लोगों के फंसे होने की सूचना मिल रही है, वहां तत्काल रेस्क्यू टीम भेजी जा रही है।

9 राहत शिविरों में 350 से ज्यादा लोगों को मिली जगह

बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए बस्तर जिले में 9 राहत शिविर बनाए गए हैं। इन शिविरों में अब तक 350 से अधिक लोगों को सुरक्षित पहुंचाया जा चुका है। प्रशासन की ओर से सभी शिविरों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

जगदलपुर शहर में बाढ़ का असर ज्यादा देखने को मिला है। यहां बनाए गए चार राहत शिविरों में करीब 175 लोगों को ठहराया गया है। शहीद भगत सिंह स्कूल में सबसे ज्यादा प्रभावित लोगों के रहने और भोजन की व्यवस्था की गई है।

इसके अलावा नगरनार क्षेत्र के राहत शिविर में करीब 40 लोग मौजूद हैं। भैंसगांव राहत केंद्र में 77, बेलगांव शिविर में 35 और भेजा पंचायत के राहत केंद्र में 26 लोगों को सुरक्षित रखा गया है।

प्रशासन ने बताया कि राहत शिविरों में भोजन, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य जांच और अन्य जरूरी सुविधाओं की लगातार निगरानी की जा रही है।

कलेक्टर और एसपी ने मौके पर पहुंचकर लिया हालात का जायजा

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए कलेक्टर आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने खुद प्रभावित इलाकों का दौरा किया। अधिकारियों ने जगदलपुर शहर के गंगामुंडा पारा, महादेव घाट, खड़कघाट और मेडिकल कॉलेज डिमरापाल के आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण किया।

इसके अलावा नगरनार-भेजापदर मार्ग पर नदी बोड़ना क्षेत्र में भी पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया गया। अधिकारियों ने राहत शिविरों में पहुंचे लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं।

मैदानी कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार नजर रखें। किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया जाए।

इंद्रावती नदी का बढ़ा जलस्तर, निचले इलाकों में अलर्ट

लगातार बारिश के कारण इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ गया है। नदी किनारे बसे इलाकों में प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। ओडिशा में इंद्रावती नदी पर बने बांधों से पानी छोड़े जाने के बाद आसपास के क्षेत्रों में निगरानी और बढ़ा दी गई है।

नदी और नालों के आसपास रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की अपील की गई है। प्रशासन ने जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त राहत शिविर तैयार रखने के निर्देश दिए हैं।

बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव दल नाव और जरूरी उपकरणों के साथ तैनात हैं। कंट्रोल रूम के जरिए लगातार हालात की जानकारी ली जा रही है।

प्रशासन की लोगों से अपील, जोखिम वाले रास्तों से दूर रहें

जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि भारी बारिश के दौरान उफनते नदी-नालों, पुल-पुलियों और जलभराव वाले रास्तों को पार करने की कोशिश न करें। किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें और परेशानी होने पर तुरंत प्रशासन को सूचना दें।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर बस्तर जिला प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें लगातार काम कर रही हैं। प्रशासन की प्राथमिकता बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालना और उन्हें हर जरूरी सहायता उपलब्ध कराना है।

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