राजस्थान से ₹1.44 लाख करोड़ की रॉयल्टी मांगेगा पंजाब, भगवंत मान के बयान से बढ़ा पानी विवाद
Jyoti Mahender Bhardwaj | Oct 28, 2026, 13:19 IST
राजस्थान से ₹1.44 लाख करोड़ लेने की तैयारी
राजस्थान को मिलने वाले नहरी पानी पर पंजाब ने एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। पंजाब सरकार ने आजादी से पहले हुए समझौते का हवाला देकर राजस्थान से 1.44 लाख करोड़ रुपये की रॉयल्टी मांगी है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विधानसभा के विशेष सत्र में यह मुद्दा उठाया और आरोप लगाया कि राजस्थान पंजाब से मुफ्त पानी लेकर आगे इस्तेमाल करता है। दूसरी तरफ, राजस्थान सरकार पहले ही इस मांग को खारिज कर चुकी है। अब विधानसभा में प्रस्ताव पेश होने के बाद दोनों राज्यों के बीच पानी को लेकर सियासी टकराव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
भगवंत मान बोले- राजस्थान मुफ्त पानी लेकर आगे बेचता है
भगवंत मान ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि पंजाब से पानी मुफ्त लिया जाता है और फिर उसका इस्तेमाल करके आगे फायदा उठाया जाता है। उन्होंने इसे कारोबार से जोड़ते हुए कहा कि जैसे कोई कच्चा माल मुफ्त में लेकर उससे तैयार सामान बेचकर कमाई करे, वैसा ही मामला यहां भी है।
मान के इस बयान के बाद पानी के बंटवारे को लेकर बहस फिर तेज हो गई है। पंजाब सरकार का कहना है कि जब राज्य पानी दे रहा है, तो उसे उसका भुगतान मिलना चाहिए। वहीं राजस्थान सरकार इस मांग को पहले ही गलत बता चुकी है।
पंजाब विधानसभा में पेश हुआ रॉयल्टी का प्रस्ताव
प्रस्ताव में कहा गया कि सतलुज, रावी और व्यास नदियां राजस्थान से होकर नहीं गुजरतीं। इसी आधार पर पंजाब सरकार का तर्क है कि राजस्थान इन नदियों का रिपेरियन राज्य नहीं है। रिपेरियन राज्य का मतलब उस राज्य से है, जिसका क्षेत्र संबंधित नदी के जल प्रवाह से जुड़ा हो।
पंजाब सरकार का आरोप है कि दशकों से उसके हिस्से का पानी राजस्थान को बिना भुगतान के दिया जा रहा है। प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि राजस्थान इस पानी से फायदा उठा रहा है, जबकि पंजाब खुद जल संकट का सामना कर रहा है।
इसी आधार पर पंजाब सरकार ने राजस्थान से पानी की कीमत वसूलने की मांग की है। हालांकि, इस मांग को लेकर दोनों राज्यों के बीच कानूनी और संवैधानिक बहस भी सामने आ सकती है।
केंद्र सरकार से भी की गई भुगतान सुनिश्चित करने की मांग
इस मांग के पीछे पंजाब सरकार का तर्क है कि राज्य में पानी की कमी है और ऐसे में दूसरे राज्य को पानी देने के बदले आर्थिक भुगतान मिलना चाहिए। पंजाब सरकार के मुताबिक, लंबे समय से पानी दिए जाने के बावजूद राज्य को उसका उचित आर्थिक लाभ नहीं मिल रहा है।
अब इस प्रस्ताव के बाद सवाल यह है कि केंद्र सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है। क्या पानी के बदले भुगतान का मुद्दा दोनों राज्यों के बीच बातचीत से सुलझेगा या फिर विवाद और आगे बढ़ेगा, यह आने वाले समय में साफ होगा।
राजस्थान सरकार पहले ही मांग खारिज कर चुकी है
इसके अगले दिन, 20 मार्च को राजस्थान सरकार के जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने पंजाब की मांग को खारिज कर दिया था। उन्होंने साफ कहा था कि राजस्थान सरकार पंजाब को रॉयल्टी नहीं देगी।
राजस्थान सरकार का कहना है कि किसी एक राज्य की ओर से पानी पर रॉयल्टी या व्यावसायिक दावा करना संविधान की मूल भावना और स्थापित कानूनी सिद्धांतों के खिलाफ है। इसी आधार पर राजस्थान ने पंजाब की मांग को अस्वीकार किया था।
अब पंजाब विधानसभा में दोबारा यह मुद्दा उठने से दोनों राज्यों के बीच पुराना विवाद फिर चर्चा में आ गया है। पंजाब की ओर से प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद राजस्थान सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर भी नजर रहेगी।
राजस्थान ने क्यों बताया था रॉयल्टी की मांग गलत?
राजस्थान सरकार का तर्क है कि पानी के बंटवारे और भुगतान से जुड़े मामलों को केवल किसी एक राज्य के दावे के आधार पर तय नहीं किया जा सकता। इसके लिए पुराने समझौतों, कानूनी व्यवस्था और संबंधित प्रावधानों को देखना जरूरी है।
इस विवाद में दोनों राज्यों के तर्क अलग-अलग हैं। पंजाब पानी की आपूर्ति के बदले भुगतान चाहता है। राजस्थान इस मांग को स्वीकार नहीं कर रहा है। ऐसे में इस मुद्दे का समाधान बातचीत, संबंधित समझौतों और कानूनी प्रावधानों की व्याख्या पर निर्भर कर सकता है।
1920 के समझौते का दिया जा रहा हवाला
इस समझौते के तहत बीकानेर रियासत की करीब 5 लाख एकड़ जमीन के लिए पानी का आवंटन तय किया गया था। इसमें पानी के बदले शुल्क ब्रिटिश सरकार को दिया जाना था, पंजाब प्रांत को नहीं।
राजस्थान की ओर से इस पुराने समझौते का हवाला देकर पंजाब की मौजूदा मांग पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। वहीं पंजाब सरकार अब पानी की आपूर्ति और उसके आर्थिक मूल्य को आधार बनाकर रॉयल्टी की मांग कर रही है।
यही वजह है कि मामला केवल पानी की कीमत तक सीमित नहीं है। इसमें पुराने समझौते, पानी के अधिकार और भुगतान की जिम्मेदारी जैसे मुद्दे भी शामिल हैं। हालांकि, 1920 के समझौते की मौजूदा कानूनी स्थिति और आज की जल व्यवस्था पर उसके प्रभाव को लेकर अंतिम निष्कर्ष के लिए संबंधित दस्तावेजों और कानूनी प्रावधानों की जांच जरूरी होगी।
चुनाव से पहले क्यों गरमाया पानी का मुद्दा?
पानी पंजाब के लिए एक अहम मुद्दा है। राज्य में जल संकट की चिंता के बीच दूसरे राज्य को पानी देने और उसके बदले भुगतान की मांग राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकती है। भगवंत मान ने विधानसभा में इस मुद्दे को उठाकर सरकार का रुख साफ किया है।
हालांकि, इस मांग के पीछे चुनावी रणनीति ही है, ऐसा कहना अभी केवल राजनीतिक आकलन होगा। इसकी पुष्टि के लिए ठोस आधार जरूरी है। इतना जरूर है कि चुनावी माहौल में यह मुद्दा पंजाब की राजनीति में चर्चा बढ़ा सकता है और राजस्थान के साथ संबंधों पर भी असर डाल सकता है।
आगे क्या?
ऐसे में दोनों राज्यों के बीच बातचीत की संभावना, पुराने समझौतों की व्याख्या और कानूनी पहलुओं की भूमिका अहम होगी। अगर दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम रहते हैं, तो पानी का यह मुद्दा आगे भी सियासी बहस का केंद्र बना रह सकता है।
फिलहाल, ₹1.44 लाख करोड़ की रॉयल्टी की मांग पर कोई सहमति सामने नहीं आई है। पंजाब ने विधानसभा में प्रस्ताव पेश कर अपना पक्ष रखा है, जबकि राजस्थान सरकार पहले ही इसका विरोध कर चुकी है। अब आगे की स्थिति दोनों सरकारों के अगले कदमों पर निर्भर करेगी।
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