बस्तर के लिए नया रोडमैप तैयार, 2031 तक देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाने का लक्ष्य
The Sootr | Jun 25, 2026, 16:16 IST
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विजन 2031 के तहत बस्तर संभाग को देश का सबसे विकसित आदिवासी क्षेत्र बनाने का रोडमैप तैयार किया गया है, जो विकास और आर्थिक समृद्धि सुनिश्चित करेगा।
Raipur. कभी गोलियों की आवाज, बारूदी धमाकों और खौफ के माहौल से पहचाना जाने वाला बस्तर अब बदलाव के एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। जिन इलाकों का नाम आते ही लोगों के मन में नक्सल हिंसा की तस्वीर उभरती थी, वहां अब विकास, शिक्षा, रोजगार और आधुनिक सुविधाओं की चर्चा हो रही है। जिन गांवों में शाम ढलते ही सन्नाटा छा जाता था, वहां अब बच्चों की पढ़ाई की आवाज सुनाई देती है। जिन रास्तों पर कभी मुठभेड़ों की खबरें आती थीं, वहां आज सड़कें बन रही हैं, मोबाइल नेटवर्क पहुंच रहा है और विकास की नई कहानी लिखी जा रही है।
बस्तर में यह बदलाव किसी एक योजना या एक फैसले का परिणाम नहीं है, इसके पीछे केंद्र और राज्य सरकार की वह रणनीति है, जिसमें सुरक्षा और विकास को साथ लेकर आगे बढ़ाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में चल रहे अभियान तथा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार की विकास केंद्रित नीति ने बस्तर को नई दिशा देने का काम किया है।
अब इस बदलाव को और गति देने के लिए बस्तर के लिए व्यापक विजन तैयार किया गया है। विजन 2031 और बस्तर 2.0 ब्लूप्रिंट के जरिए वर्ष 2031 तक बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाने का लक्ष्य रखा गया है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार, पर्यटन और जनजातीय सशक्तिकरण को केंद्र में रखकर तैयार किया गया यह रोडमैप आने वाले वर्षों में बस्तर की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलने वाला माना जा रहा है।
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बस्तर के विकास को लेकर हाल के महीनों में केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर बस्तर में चल रहे विभिन्न अभियानों और विकास कार्यों की जानकारी साझा की। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान, अग्रणी बस्तर अभियान और हितग्राहियों को कार्ड वितरण जैसी योजनाओं की प्रगति से भी उन्हें अवगत कराया गया।
इसके बाद 18 और 19 मई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बस्तर का दो दिवसीय दौरा किया। इस दौरान जगदलपुर में उच्चस्तरीय बैठकों का आयोजन हुआ, जिसमें नक्सलवाद के बाद के बस्तर की विकास रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, क्षेत्रीय विकास और बुनियादी ढांचे को लेकर भविष्य की कार्ययोजना तैयार की गई। इन बैठकों में बस्तर 2.0 ब्लूप्रिंट और विजन 2031 को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
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जगदलपुर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बस्तर नक्सलमुक्ति की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा है और अब अगला लक्ष्य विकास और समृद्धि का है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में बस्तर को सुरक्षा से विश्वास, विश्वास से विकास, विकास से समृद्धि और समृद्धि से संतृप्ति की ओर ले जाना है। सरकार ने बस्तर की आय छह गुना तक बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। अगले चार से पांच वर्षों में बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाया जाएगा।
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बस्तर लंबे समय तक नक्सल हिंसा से प्रभावित रहा है। कई क्षेत्रों में सड़क निर्माण, स्कूलों की स्थापना और सरकारी योजनाओं के विस्तार में बाधाएं आती रहीं। इससे क्षेत्र का विकास प्रभावित हुआ और हजारों लोग बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहे। शाह ने बताया कि जनवरी 2024 में रायपुर में हुई समन्वय बैठक में 31 मार्च 2026 तक देश को माओवादी हिंसा से मुक्त करने का लक्ष्य तय किया गया था। उस समय बहुत कम लोगों को विश्वास था कि दशकों पुरानी समस्या पर इतनी तेजी से नियंत्रण पाया जा सकेगा। अब सुरक्षा बलों की रणनीति, समन्वय और लगातार कार्रवाई के कारण हालात तेजी से बदले हैं।
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बस्तर के विकास मॉडल में आदिवासी परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार की योजना वन उपज, कृषि और पशुपालन से होने वाली आय को सीधे आदिवासी परिवारों तक पहुंचाने की है। गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि आने वाले छह महीनों में बस्तर सहकारी डेयरी नेटवर्क का प्रमुख केंद्र बन सकता है। इसके लिए आदिवासी महिलाओं को एक गाय और एक भैंस उपलब्ध कराने की योजना पर काम किया जा रहा है।
सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिलेगी और महिलाओं की आय में भी वृद्धि होगी। साथ ही आत्मसमर्पण कर चुके पूर्व नक्सलियों के लिए भी नई राह तैयार की जा रही है। उनकी साइकोलॉजिकल मैपिंग, स्किलिंग और शिक्षा के माध्यम से उन्हें सम्मानजनक जीवन और रोजगार से जोड़ने की योजना बनाई गई है।
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बस्तर के विकास की सबसे बड़ी जरूरत आधारभूत सुविधाओं का विस्तार रही है। इस दिशा में पिछले कुछ वर्षों में बड़े स्तर पर काम हुआ है। बस्तर में अब तक 12 हजार 211 किलोमीटर सड़कों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। दूरस्थ इलाकों तक संपर्क बढ़ाने के लिए लगातार सड़क परियोजनाओं पर काम जारी है। मोबाइल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए कुल 13 हजार मोबाइल टावर लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से 5 हजार मोबाइल टावर नक्सल प्रभावित इलाकों में स्थापित किए जा चुके हैं। इससे दूर-दराज के गांव भी डिजिटल दुनिया से जुड़ रहे हैं। इसके साथ बैंकिंग और डाक सेवाओं के विस्तार पर भी काम किया जा रहा है।
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बस्तर के युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अब तक लगभग 90 हजार लोगों को स्किल डेवलपमेंट प्रशिक्षण दिया जा चुका है। सरेंडर कर चुके माओवादियों के लिए भी विशेष प्रशिक्षण केंद्र विकसित किए गए हैं। अमित शाह ने बताया कि करीब 20 करोड़ की लागत से आधुनिक स्किल सेंटर बनाया गया है, जहां पूर्व माओवादियों को प्रशिक्षण और काउंसलिंग दी जा रही है। सरकार का मानना है कि रोजगार और कौशल विकास ही युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
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बस्तर में सामाजिक और सांस्कृतिक बदलाव के लिए भी बड़े स्तर पर पहल की गई है। बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजन इसके प्रमुख उदाहरण हैं। बस्तर ओलंपिक में लगभग 1.65 लाख खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। सात जिलों और 32 विकासखंडों में आयोजित इस अभियान ने युवाओं को खेलों से जोड़ने का काम किया। इसमें पारंपरिक जनजातीय खेलों को भी स्थान दिया गया। वहीं बस्तर पंडुम महोत्सव में लगभग 47 हजार कलाकारों, 1,885 ग्राम पंचायतों और 1,743 सांस्कृतिक दलों ने भागीदारी की। इससे बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को नई पहचान मिली है।
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छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं में नियद नेल्लानार योजना प्रमुख है। योजना के तहत 25 से अधिक बुनियादी सुविधाएं और 32 से अधिक सरकारी योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए राज्य सरकार ने अतिरिक्त 20 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। राशन कार्ड, उज्ज्वला गैस कनेक्शन, बिजली, सिंचाई पंप, वनाधिकार पत्र, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल, बैंकिंग सुविधा, मोबाइल टावर और सर्व-ऋतु सड़क जैसी सुविधाएं अब गांवों तक पहुंचाई जा रही हैं।
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विजन 2031 के तहत तैयार बस्तर 2.0 ब्लूप्रिंट में आधारभूत ढांचे के विस्तार को सबसे बड़ी प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत नई सड़कों और पुलों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। सरकार की योजना है कि लंबित ग्रामीण आधारभूत परियोजनाओं को वर्ष 2027 तक पूरा कर लिया जाए। जगदलपुर एयरपोर्ट का विस्तार, रावघाट-जगदलपुर रेललाइन परियोजना, स्वास्थ्य संस्थानों का उन्नयन और नए शैक्षणिक परिसरों का विकास भी इस विजन का हिस्सा है।
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बस्तर में यह बदलाव किसी एक योजना या एक फैसले का परिणाम नहीं है, इसके पीछे केंद्र और राज्य सरकार की वह रणनीति है, जिसमें सुरक्षा और विकास को साथ लेकर आगे बढ़ाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में चल रहे अभियान तथा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार की विकास केंद्रित नीति ने बस्तर को नई दिशा देने का काम किया है।
अब इस बदलाव को और गति देने के लिए बस्तर के लिए व्यापक विजन तैयार किया गया है। विजन 2031 और बस्तर 2.0 ब्लूप्रिंट के जरिए वर्ष 2031 तक बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाने का लक्ष्य रखा गया है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार, पर्यटन और जनजातीय सशक्तिकरण को केंद्र में रखकर तैयार किया गया यह रोडमैप आने वाले वर्षों में बस्तर की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलने वाला माना जा रहा है।
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दिल्ली से जगदलपुर तक बनी विकास की नई रणनीति
इसके बाद 18 और 19 मई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बस्तर का दो दिवसीय दौरा किया। इस दौरान जगदलपुर में उच्चस्तरीय बैठकों का आयोजन हुआ, जिसमें नक्सलवाद के बाद के बस्तर की विकास रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, क्षेत्रीय विकास और बुनियादी ढांचे को लेकर भविष्य की कार्ययोजना तैयार की गई। इन बैठकों में बस्तर 2.0 ब्लूप्रिंट और विजन 2031 को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
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शाह ने दोहराया विकसित बस्तर का संकल्प
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नक्सलवाद से विकास तक का सफर
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आदिवासी परिवारों की आय बढ़ाने पर फोकस
सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिलेगी और महिलाओं की आय में भी वृद्धि होगी। साथ ही आत्मसमर्पण कर चुके पूर्व नक्सलियों के लिए भी नई राह तैयार की जा रही है। उनकी साइकोलॉजिकल मैपिंग, स्किलिंग और शिक्षा के माध्यम से उन्हें सम्मानजनक जीवन और रोजगार से जोड़ने की योजना बनाई गई है।
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सड़क, मोबाइल नेटवर्क और बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार
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स्किल डेवलपमेंट से युवाओं को मिल रहा नया रास्ता
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बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम बने बदलाव के प्रतीक
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नियद नेल्लानार योजना से गांवों तक पहुंच रहा विकास
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बस्तर 2.0 ब्लूप्रिंट से बदलेगी आधारभूत संरचना
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