17 आरोपी दोषमुक्त, तीन साल बाद कोर्ट ने सुनाया फैसला, दंगे में बाप-बेटे की हुई थी हत्या

छत्तीसगढ़ के बिरनपुर हिंसा मामले में 17 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया है। तीन साल बाद कोर्ट ने पिता-पुत्र की हत्या में अभियोजन पक्ष के आरोपों को नकारा।

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VINAY VERMA
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Photograph: (thesootr)

News In Short

बेमेतरा कोर्ट ने 17 आरोपियों को बरी किया, संदेह का लाभ दिया।
बिरनपुर हिंसा में पिता-पुत्र की हत्या हुई, आरोपियों पर केस चला।
बच्चों के विवाद से शुरू हुआ सामुदायिक संघर्ष, हिंसा में बढ़ा।
घटना के बाद क्षेत्र में कर्फ्यू और पुलिस बल तैनात किया गया था।
भुवनेश्वर साहू हत्याकांड अलग से विचाराधीन, सीबीआई कोर्ट में चल रही सुनवाई।

News In Detail

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के बिरनपुर हिंसा मामले में करीब तीन साल बाद बड़ा न्यायिक फैसला सामने आया है। जिला एवं सत्र न्यायालय बेमेतरा ने पिता-पुत्र रहीम मोहम्मद और ईदुल मोहम्मद की हत्या के मामले में आरोपित सभी 17 लोगों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया है।

लंबे समय तक चली सुनवाई, दर्जनों गवाहों और प्रस्तुत साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में सफल नहीं हो सका। अदालत के फैसले के साथ ही 2023 में हुई वह हिंसक घटना एक बार फिर चर्चा में आ गई है, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था।

अप्रैल 2023 में दर्ज हुआ था मामला

यह मामला अप्रैल 2023 में साजा थाना क्षेत्र में दर्ज किया गया था। आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत केस कायम किया गया था। शासन की ओर से अदालत में 50 से अधिक गवाह पेश किए गए। हालांकि, सुनवाई के दौरान स्वतंत्र गवाहों में से किसी ने भी अभियोजन के कथन का ठोस समर्थन नहीं किया।

कई गवाह अपने पूर्व बयानों से मुकर गए या घटना के संबंध में स्पष्ट पहचान और साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। इसी आधार पर न्यायालय ने कहा कि आरोप संदेह से परे सिद्ध नहीं हो पाए हैं। आपराधिक न्याय प्रणाली में संदेह का लाभ आरोपी को दिया जाता है, इसी सिद्धांत के तहत सभी 17 आरोपियों को बरी कर दिया गया।

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बच्चों के विवाद से शुरू हुई थी हिंसा

अप्रैल 2023 को बिरनपुर गांव में दो समुदायों के बीच विवाद ने अचानक हिंसक रूप ले लिया था। बताया जाता है कि शुरुआती विवाद बच्चों के बीच हुई मारपीट से शुरू हुआ था, लेकिन देखते ही देखते यह तनाव सामुदायिक संघर्ष में बदल गया। इसी दौरान 23 वर्षीय भुवनेश्वर साहू की हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद पूरे इलाके में आक्रोश और भय का माहौल बन गया था।

स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि प्रशासन को भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। क्षेत्र में धारा 144 लागू की गई और गांव में कर्फ्यू भी लगाया गया, ताकि हालात पर काबू पाया जा सके। आसपास के गांवों में आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आई थीं, जिनमें कई घरों को नुकसान पहुंचा।

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तीन दिन बाद मिली थी पिता-पुत्र की लाश

भुवनेश्वर साहू की हत्या के तीन दिन बाद, 11 अप्रैल 2023 को शक्तिघाट इलाके में रहीम मोहम्मद और उनके बेटे ईदुल मोहम्मद के शव बरामद हुए थे। दोनों की हत्या ने तनाव को और गहरा कर दिया था। पुलिस ने इस मामले में 17 लोगों को आरोपी बनाया था और विस्तृत जांच के बाद चालान पेश किया गया था।

अब तीन साल की सुनवाई के बाद अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। इस फैसले से जहां आरोपियों और उनके परिजनों को राहत मिली है, वहीं पीड़ित पक्ष के लिए यह निर्णय भावनात्मक रूप से अहम माना जा रहा है।

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भुवनेश्वर साहू हत्याकांड की सुनवाई अलग

बता दें है कि भुवनेश्वर साहू की हत्या के मामले में 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। उस प्रकरण की सुनवाई रायपुर स्थित सीबीआई कोर्ट में चल रही है और सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। यह मामला अलग से विचाराधीन है और उसका फैसला आना बाकी है। फिलहाल भुवनेश्वर के पिता ईश्वर साहू भाजपा की टिकट पर चुनाव जीत कर साजा के विधायक हैं। 

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फिर चर्चा में आया 2023 का दंगा

बिरनपुर हिंसा उस समय प्रदेश की कानून-व्यवस्था और सामुदायिक सौहार्द को लेकर बड़ा सवाल बनकर उभरी थी। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिमंडल गांव पहुंचे थे और प्रशासनिक स्तर पर शांति बहाली के प्रयास किए गए थे। अब जिला एवं सत्र न्यायालय बेमेतरा के इस फैसले ने एक बार फिर उस पूरे घटनाक्रम को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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