रविवार को सुरक्षित नहीं रहता छत्तीसगढ़, शुक्रवार दूसरा सबसे खतरनाक दिन; पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों ने खोली परतें

छत्तीसगढ़ में 2025 के अपराध आंकड़ों ने चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रविवार को सबसे अधिक अपराध दर्ज हुए हैं। जबकि शुक्रवार भी खतरनाक साबित हुआ। वहीं मंगलवार सबसे सुरक्षित दिन रहा।

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VINAY VERMA
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News In Short

छत्तीसगढ़ के लिए रविवार अलर्ट डे बन गया है। 

पुलिस मुख्यालय ट्रेंड का विश्लेषण कर रहा है। 

चाकूबाजी की घटनाएं भी पुलिस को परेशान कर रही है। 

रोकथाम के लिए पुलिस उपाय कर रही है। 

News In Detail

छत्तीसगढ़ में अपराध को लेकर एक चौंकाने वाला ट्रेंड सामने आया है। पुलिस मुख्यालय के जरिए वर्ष 2025 के अपराध आंकड़ों का विश्लेषण करने पर एक तथ्य सामने आया है। वो ये है कि प्रदेश में रविवार को सबसे अधिक अपराध हुए हैं। क्राइम की लिहाज से शुक्रवार सबसे खतरनाक दिन रहा है । वहीं मंगलवार को सबसे कम वारदातें हुईं है। यह डाटा न केवल पुलिसिंग रणनीति के लिए अहम है, बल्कि समाज के लिए भी चेतावनी की तरह है।

रविवार बना रेड अलर्ट डे

पुलिस मुख्यालय के अनुसार वर्ष 2025 में रविवार को कुल 601 अपराध दर्ज किए गए। ये सप्ताह के अन्य सभी दिनों से अधिक हैं। इसके विपरीत मंगलवार को सबसे कम 427 अपराध दर्ज हुए।

सप्ताह के अन्य दिनों का आंकड़ा इस प्रकार है

दिनसंख्या
रविवार427
सोमवार496
शनिवार502
बुधवार504
गुरुवार519
शुक्रवार540
रविवार601

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि वीकेंड की ओर बढ़ते दिनों में अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ता है। शुक्रवार से शुरू होकर रविवार तक अपराधों की संख्या में लगातार इजाफा देखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि शुक्रवार और रविवार को अधिक अपराध दर्ज होते हैं।

इसके पीछे सामाजिक और व्यवहारिक कारण हो सकते हैं। वीकेंड पर लोगों की आवाजाही बढ़ती है। बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर भीड़ अधिक रहती है। सामाजिक कार्यक्रम और पार्टियां आयोजित होती हैं तथा शराब और नशे का सेवन भी बढ़ता है।

रात का समय सबसे ज्यादा संवेदनशील

अपराध के समय को लेकर भी पुलिस मुख्यालय ने महत्वपूर्ण जानकारी तैयार किया है। पूरे वर्ष के अपराधों में से 43 प्रतिशत घटनाएं रात के समय दर्ज की गईं है। शाम के समय 33 प्रतिशत और दिन में केवल 24 प्रतिशत वारदातें हुईं है।

रात के दौरान हत्या, हत्या का प्रयास हुआ है। चोरी, मारपीट, चाकूबाजी, अवैध नशाखोरी, सड़क दुर्घटना और हिट एंड रन जैसी गंभीर घटनाएं अधिक सामने आईं है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि रात में निगरानी की चुनौतियां और नशे की बढ़ती प्रवृत्ति इन अपराधों को बढ़ावा देती है। नाइट पेट्रोलिंग के बावजूद कई कारणों से अपराधियों को फायदा मिल रहा है। इसमें प्रकाश व्यवस्था और सीसीटीवी कवरेज की कमी भी शामिल है। 

मई, जून और अक्टूबर रहे सबसे संवेदनशील महीने

महीनों के आधार पर डेटा रिसर्च में भी चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। वर्ष 2025 में मई, जून और अक्टूबर महीने अपराध की दृष्टि से सबसे खतरनाक रहे हैं। इन महीनों में कुल वारदातों का बड़ा हिस्सा दर्ज किया गया है।

सबसे गंभीर तथ्य यह है कि इन महीनों में 68% घटनाओं में चाकू या अन्य धारदार हथियारों का इस्तेमाल हुआ है। यह प्रवृत्ति बताती है कि छोटे विवाद भी हिंसक रूप ले रहे हैं। साथ ही धारदार हथियार आसानी से उपलब्ध हैं।

सामाजिक कारणों पर भी उठे सवाल

अपराध के बढ़ते ग्राफ को लेकर पुलिस अधिकारियों का अलग गी मानना है। वीकेंड पर सामाजिक गतिविधियां, पार्टियां, बाजारों में भीड़ और शराब की खपत बढ़ जाती है। इससे विवाद और हिंसक झड़पों की संभावना बढ़ती है।

यह आंकड़ा बताता है कि मामूली विवाद भी हिंसक रूप ले रहे हैं। धारदार हथियारों की आसान उपलब्धता और गुस्से पर नियंत्रण की कमी अपराध की गंभीरता बढ़ा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं में आक्रामकता और नशे की प्रवृत्ति भी इस प्रवृत्ति को बढ़ा रही है।

पुलिस रणनीति में बदलाव की तैयारी

इन आंकड़ों के आधार पर पुलिस मुख्यालय अब गश्त व्यवस्था और विशेष निगरानी रणनीति में बदलाव की तैयारी कर रहा है। रविवार और शुक्रवार को अतिरिक्त बल तैनात करने की की योजना बनाई जा रही है। साथ ही रात्रिकालीन पेट्रोलिंग बढ़ाने और संवेदनशील इलाकों में विशेष अभियान चलाने की योजना है।

चाकू बिक्री पर लगाम का प्रयास

रायपुर पुलिस ने तो चाकू या अन्य धारदार हथियार पर प्रतिबंध लगाने के लिए व्यापारियों को युवाओं को चाकू नहीं बेचने की हिदायत दी है। इसके अलावा सोशल साइट पर भी चाकू, कैंची की ऑन ब्रिकी पर प्रतिबंध लगा दिया है। यहां तक की किचन में इस्तेमाल किए जाने वाले चाकू की डिलेवरी का रिकार्ड रखने की भी हिदायत दी गई है। डिलेवरी ब्वॉय के सड़कों पर डिलेवरी करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। 

आंकड़े दे रहे चेतावनी का संकेत

वर्ष 2025 के ये आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि छत्तीसगढ़ में अपराध का पैटर्न सप्ताह के दिनों और समय के अनुसार बदल रहा है। मंगलवार भले ही सबसे सुरक्षित दिन साबित हुआ हो, लेकिन रविवार को प्रदेश के लिए हाई रिस्क डे के रूप में चिन्हित किया गया है। 

अब एक सबसे बड़ी चुनौती है। इन आंकड़ों के आधार पर बनाई जा रही रणनीतियां जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती हैं। यदि डाटा को गंभीरता से लेकर कार्रवाई की जाए, तो आने वाले समय में अपराध के इस ट्रेंड को बदला जा सकता है।

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