/sootr/media/media_files/2026/01/22/mp-police-women-crime-investigation-new-rules-2026-01-22-13-42-27.jpg)
News In Short
एक जुलाई 2024 के नए कानून के बाद मध्य प्रदेश पुलिस ने जांच नियमों में बदलाव किया है।
महिला सब इंस्पेक्टर की कमी के कारण ASI को भी गंभीर महिला अपराधों की FIR और जांच का जिम्मा मिलेगा।
विशेष परिस्थितियों में SP केवल एक रैंक नीचे के अधिकारी को ही जांच सौंपने के लिए ऑथोराइज्ड होंगे।
नाबालिगों के अपहरण के मामलों में 2 महीने बाद थाना प्रभारी (TI) खुद विवेचना शुरू करेंगे।
प्रदेश में 978 महिला SI की कमी को देखते हुए यह कदम उठाया गया है, ताकि केसों का जल्दी निपटारा हो सके।
News In Detail
MP News. मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय की महिला सुरक्षा शाखा ने एक बड़ा फैसला लिया है। महिला अपराधों की जांच प्रक्रिया में जरूरी बदलाव किए गए हैं। एक जुलाई 2024 से देशभर में नया कानून लागू हुआ था। इसके ठीक 18 महीने बाद, अब जांच अधिकारियों की कमी को दूर करने के लिए नियमों को संशोधित किया गया है। अब केवल महिला सब इंस्पेक्टर (SI) ही नहीं, बल्कि योग्य महिला एएसआई (ASI) को भी गंभीर अपराधों की जांच करने का अधिकार मिल गया है।
एक जुलाई 2024 को ये नए कानून लागू हुए
एक जुलाई 2024 से भारत में तीन नए आपराधिक कानून लागू हो गए हैं। ये नए कानून पुराने औपनिवेशिक IPC, CrPC और साक्ष्य अधिनियम की जगह आए हैं। ये नए कानून हैं, भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA)। इनका मकसद न्याय व्यवस्था को और आधुनिक बनाना है। साथ ही इन कानूनों में तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा। खास बात यह है कि ये कानून पीड़ितों के अधिकारों पर भी खास ध्यान देंगे।
जांच अधिकारियों की कमी ने बदला फैसला
प्रदेश में महिला अधिकारियों की कमी की वजह से केसों का पेंडेंसी बढ़ रहा था। फिलहाल, मध्य प्रदेश में सिर्फ 281 महिला इंस्पेक्टर और 831 महिला सब इंस्पेक्टर हैं, जबकि विभाग को करीब 2 हजार 90 महिला सब इंस्पेक्टरों की जरूरत है।
महिला एसआई की 978 की कमी को देखते हुए स्पेशल डीजी (महिला सुरक्षा) अनिल कुमार ने नए निर्देश जारी किए हैं। अब थाना प्रभारियों के लिए यह जरूरी कर दिया गया है कि वे महीने में कम से कम एक लैंगिक अपराध (Sexual Offense) की जांच जरूर करें।
एक रैंक नीचे तक की ही मिलेगी छूट
नए नियमों के मुताबिक, अगर तय न्यूनतम रैंक की महिला अधिकारी किसी थाने में उपलब्ध नहीं होगी, तो एसपी (SP) एक रैंक नीचे के अधिकारी को लिखित आदेश के साथ केस सौंप सकते हैं। ये छूट सिर्फ एक पद नीचे तक ही होगी। जैसे, अगर बलात्कार जैसे मामलों के लिए एसआई (SI) नहीं है, तो लिखित आदेश से एएसआई (ASI) को केस सौंपा जा सकता है। लेकिन किसी भी हालत में यह जिम्मेदारी हवलदार को नहीं दी जाएगी।
नाबालिगों के अपहरण मामलों में नई तेजी
नाबालिगों के अपहरण से जुड़े मामलों में भी प्रक्रिया को तेज किया गया है। पहले ऐसे मामले अमूमन 4 महीने के बाद डीएसपी या एएसपी स्तर के अधिकारियों को ट्रांसफर (Transfer) कर दिए जाते थे। लेकिन नई व्यवस्था के तहत, अब दो महीने पूरे होते ही ऐसे मामलों की कमान सीधे थाना प्रभारी खुद संभालेंगे, ताकि जांच में कोई ढिलाई न हो।
जानें अब किसके पास क्या अधिकार
नए संशोधनों के बाद अपराधों की जांच करने वाले अधिकारियों की लिस्ट में बड़ा बदलाव आया है-
| अपराध | पहले ये करते थे जांच | अब ये कर सकेंगे जांच |
| पॉक्सो अधिनियम (POCSO) | महिला एसआई | महिला एएसआई |
| दुष्कर्म (धारा 64-71) | एसआई या टीआई | एएसआई भी |
| एसिड अटैक (Acid Attack) | एसआई या टीआई | एएसआई भी |
| लज्जा भंग (Modesty) | एसआई या टीआई | एएसआई भी |
| दहेज प्रताड़ना (Dowry) | एएसआई/एसआई | हवलदार |
| अपहरण (Kidnapping) | एएसआई | हवलदार |
ये खबरें भी पढ़ें...
महिला सुरक्षा में इंदौर 22वें नंबर पर, TCWI रिपोर्ट जारी
खंडवा गैंगरेप के बाद विक्रांत भूरिया ने MP में महिला सुरक्षा पर उठाए सवाल
MP में 17 हजार 871 पदों पर होगी भर्ती, महिला सुरक्षा को मिलेगा बढ़ावा
छिंदवाड़ा के बाद इंदौर में कफ सिरप कांड में बवाल, फैक्ट्री मालिक पर FIR
/sootr/media/agency_attachments/dJb27ZM6lvzNPboAXq48.png)
Follow Us