झूठा शपत्र दिया तो माना जाएगा बड़ा अपराध, पंचायत चुनावों के लिए आया नया फरमान

Purshottam Kumar Joshi | Jan 27, 2026, 18:51 IST
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panchayat Election
Photograph: (the sootr)

राजस्थान के राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजेश वर्मा ने पंचायत चुनावों में झूठे शपथपत्रों को लेकर निर्देश जारी किए है। नामांकन के दौरान गलत या झूठा शपथपत्र होने पर उसे अपराध माना जाएगा। पंच से जिला परिषद तक सभी प्रत्याशियों पर सख्त नियम लागू होंगे।

News In Short

  • राजस्थान पंचायत चुनाव में नामांकन प्रक्रिया को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने सख्त निर्देश जारी किए।
  • पंच से जिला परिषद तक सभी प्रत्याशियों के लिए शपथपत्र देना अनिवार्य किया गया।
  • संपत्ति, आपराधिक मामलों और शिक्षा से जुड़ी जानकारी सही देना जरूरी होगा।
  • झूठी या गलत जानकारी देने पर आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।
  • इन नियमों से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

News In Detail

राजस्थान पंचायत चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने नामांकन प्रक्रिया सख्त कर दी है। पंच, सरपंच, पंचायत समिति और जिला परिषद के सभी प्रत्याशियों को शपथपत्र में संपत्ति, शिक्षा और आपराधिक मामलों की सही जानकारी देनी होगी। झूठा या भ्रामक विवरण देना अब अपराध माना जाएगा और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राजस्थान के राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजेश वर्मा ने कहा है कि इससे मतदाताओं को प्रत्याशियों की वास्तविक जानकारी मिलेगी और चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।

राजस्थान पंचायत चुनाव क्यों हैं खास

राजस्थान में आगामी पंचायत चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने इस बार सख्त रुख अपनाया है। पंच, सरपंच से लेकर पंचायत समिति और जिला परिषद तक सभी प्रत्याशियों के लिए नए और कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इन निर्देशों का सीधा असर नामांकन प्रक्रिया पर पड़ेगा। अब चुनाव लड़ने से पहले प्रत्याशियों को पूरी पारदर्शिता के साथ जानकारी देनी होगी।

नामांकन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव

राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि नाम निर्देशन पत्र के साथ दिए जाने वाले घोषणा पत्र और शपथपत्र बेहद अहम होंगे। इन दस्तावेजों में गलत या झूठी जानकारी देना अब प्रत्याशी को कानूनी मुश्किल में डाल सकता है। आयोग के अनुसार यह नियम पूरे प्रदेश में लागू होंगे। चाहे उम्मीदवार ग्रामीण पंचायत से हो या जिला परिषद से।

किन पदों पर लागू होंगे सख्त नियम

  • पंच (Ward Member)
  • सरपंच (Sarpanch)
  • पंचायत समिति सदस्य (Panchayat Samiti Member)
  • जिला परिषद सदस्य (Zila Parishad Member)

कौन-कौन सी जानकारी देना अनिवार्य

प्रत्याशियों को शपथपत्र में अपनी संपत्ति का पूरा विवरण देना होगा। इसके साथ आपराधिक प्रकरण, शैक्षणिक योग्यता और पारिवारिक जानकारी भी शामिल करनी होगी। इन जानकारियों का उद्देश्य मतदाताओं को सही और पूरी जानकारी देना है।
ताकि मतदाता सोच-समझकर अपने प्रतिनिधि का चयन कर सकें।

पिछले चुनावों से मिला सबक

राज्य निर्वाचन आयोग ने माना है कि पिछले पंचायत चुनावों में कई प्रत्याशियों ने गलत जानकारी दी थी। कुछ मामलों में संतान संख्या और शिक्षा से जुड़े तथ्य छुपाए गए थे। बाद में इन मामलों में कई सरपंचों को अदालतों का सामना करना पड़ा। इसी अनुभव के आधार पर इस बार पहले से सख्ती की गई है।

चुनाव से पहले अयोग्यता की जांच नहीं

राजस्थान के राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजेश वर्मा ने स्पष्ट किया है कि किसी प्रत्याशी की अयोग्यता की जांच चुनाव से पहले नहीं की जाएगी। उच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों के अनुसार यह जांच केवल चुनाव याचिका के माध्यम से हो सकती है। यह प्रक्रिया चुनाव परिणाम आने के बाद जिला न्यायालय में चलेगी। नामांकन के समय प्रशासन केवल औपचारिक जांच करेगा।

झूठा शपथपत्र बना आपराधिक अपराध

यदि कोई प्रत्याशी जानबूझकर गलत जानकारी देता है तो यह अपराध माना जाएगा। ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई होगी। इसमें झूठा साक्ष्य देने और मिथ्या घोषणा करने पर सजा का प्रावधान है। आयोग ने इसे बेहद गंभीर विषय बताया है।

रिटर्निंग अधिकारी की अहम भूमिका

नामांकन के दौरान शपथ पत्र की प्रारंभिक जांच रिटर्निंग अधिकारी करेंगे। यदि प्रथम दृष्टया कोई गड़बड़ी मिलती है, तो रिपोर्ट जिला निर्वाचन अधिकारी को भेजी जाएगी। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी। आवश्यक होने पर न्यायालय में परिवाद भी प्रस्तुत किया जाएगा।

पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश

राज्य निर्वाचन आयोग ने पुराने और भ्रम पैदा करने वाले आदेशों को निरस्त कर दिया है। अब नियम साफ हैं कि गलत घोषणा पर सीधी कानूनी कार्रवाई होगी। इससे पंचायत चुनावों में पारदर्शिता बढ़ेगी। साथ ही गलत जानकारी देकर चुनाव लड़ने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी।

भावी उम्मीदवारों के लिए संदेश

जो भी पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें पूरी सावधानी रखनी होगी। एक छोटी सी गलती भी भविष्य की राजनीति पर भारी पड़ सकती है। सही जानकारी, ईमानदारी और पारदर्शिता ही सुरक्षित रास्ता है। आयोग का यह कदम लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में माना जा रहा है।

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