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News in short
- भारत माला परियोजना मुआवजा घोटाले में फरार अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया।
- मुआवजा वितरण में अनियमितताओं, फर्जी दस्तावेजों और भ्रष्टाचार की जांच।
- जांच एजेंसी ने दस्तावेज, बैंक खाते और जमीन रिकॉर्ड की जांच की।
- दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर भेजा गया।
- मुआवजा घोटाले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं, जांच जारी है।
News in detail
RAIPUR. भारत माला परियोजना से जुड़े मुआवजा घोटाले में EOW और ACB ने बड़ी कार्रवाई की। फरार तहसीलदार शशिकांत कुर्रे और नायब तहसीलदार को गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों अधिकारियों को कोर्ट में पेश करने के बाद जांच एजेंसी ने पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया है। इस कार्रवाई को मामले की जांच में महत्वपूर्ण प्रगति माना जा रहा है।
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बड़े पैमाने पर जमीन अधिग्रहण
भारत माला परियोजना के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग विस्तार और निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर जमीन अधिग्रहण किया गया था। इस दौरान मुआवजा वितरण में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। आरोप है कि कुछ अधिकारियों, कर्मचारियों और बिचौलियों की मिलीभगत से पात्रता से अधिक मुआवजा स्वीकृत किया गया, फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और सरकारी खजाने को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचाया गया।
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बैंक खातों और जमीन रिकॉर्ड की जांच
इस मामले में पहले भी राजस्व विभाग से जुड़े कई कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। जांच एजेंसी ने दस्तावेजों, बैंक खातों और जमीन रिकॉर्ड की जांच की। कुछ मामलों में जमीन का रकबा बढ़ाकर दिखाया गया। अपात्र लोगों को भी मुआवजा राशि जारी की गई। प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपये के गड़बड़ी की आशंका जताई गई थी।
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दोनों चल रहे थे फरार
ईओडब्ल्यू-एसीबी ने इससे पहले भी इस मामले में छापेमारी की कार्रवाई कर महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जब्त किए थे। जांच के दौरान तत्कालीन तहसीलदार शशिकांत कुर्रे और संबंधित नायब तहसीलदार की भूमिका संदिग्ध पाई गई। उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था। लेकिन दोनों फरार चल रहे थे। लंबे समय से उनकी तलाश की जा रही थी।
दोनों को रिमांड पर भेजा गया
सूत्रों के अनुसार, तकनीकी निगरानी और मुखबिर तंत्र की मदद से दोनों आरोपियों का लोकेशन ट्रेस किया गया। इसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। कोर्ट में पेशी के दौरान जांच एजेंसी ने कहा कि मामले में कई वित्तीय लेन-देन, दस्तावेजी हेरफेर और आरोपियों से कनेक्शन जुड़ने बाकी हैं। इसके लिए विस्तार से पूछताछ जरूरी है। अदालत ने एजेंसी के तर्कों को स्वीकार करते हुए दोनों को रिमांड पर भेज दिया।
जांच एजेंसी मुआवजा वितरण प्रक्रिया में मिलीभगत का पता लगा रही है। वह यह भी जांच रही है कि किस अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका थी। मुआवजा राशि जिन खातों में ट्रांसफर हुई, उनकी भी जांच हो रही है। संभावना है कि इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
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ईओडब्ल्यू-एसीबी की ताजा कार्रवाई
भारत माला परियोजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी सड़क अवसंरचना योजना है, जिसका उद्देश्य देशभर में सड़क संपर्क को मजबूत करना है। ऐसे में इस परियोजना से जुड़े मुआवजा घोटाले ने प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ईओडब्ल्यू-एसीबी की ताजा कार्रवाई से यह संकेत मिला है कि जांच एजेंसी इस मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।
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