RDA जमीन आवंटन विवाद, बढ़ती महंगाई और प्रशासनिक अव्यवस्था पर पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने राज्य सरकार को घेरा
Umeshwari Baghel | Oct 01, 2026, 17:57 IST
भूपेश बघेल ने RDA जमीन विवाद समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरा।
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गुरुवार को राज्य सरकार पर कई मुद्दों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने RDA जमीन विवाद से लेकर महंगाई तक सरकार को घेरा। आयुष्मान योजना में अस्पतालों पर कार्रवाई को लेकर भी सवाल किए। नगर निगम में चल रहे विवाद पर भी उन्होंने टिप्पणी की। महानदी जल विवाद और धर्मांतरण के मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा।
इस दौरान मंत्री केदार कश्यप पर भी उन्होंने कई आरोप लगाए। बघेल ने कहा कि सरकार को आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़ना चाहिए। जनता से जुड़े मुद्दों पर ठोस कार्रवाई करना जरूरी है।
रायपुर विकास प्राधिकरण की जमीन से जुड़े विवाद पर भूपेश बघेल ने मंत्री केदार कश्यप को निशाने पर लिया। उन्होंने केदार कश्यप से जुड़े एक पुराने परीक्षा प्रकरण का भी जिक्र किया। बघेल ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के समय उनकी पत्नी से जुड़ा परीक्षा विवाद सामने आया था।
बघेल के मुताबिक उस समय किसी दूसरी महिला के परीक्षा देने का मामला उठा था। उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में पूरा मामला दबा दिया गया। बघेल ने कहा कि पुराने विवाद के बाद अब नया मामला सामने आया है। उन्होंने सवाल किया कि केदार कश्यप से जुड़े विवाद बार-बार क्यों सामने आते हैं।
हालांकि यह पूरा बयान भूपेश बघेल का राजनीतिक आरोप है। खबर में सामने आए आरोपों पर केदार कश्यप या सरकार की प्रतिक्रिया का उल्लेख उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
भूपेश बघेल ने महंगाई के मुद्दे पर भी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने रसोई गैस और दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का मुद्दा उठाया। बघेल ने कहा कि इसका असर सीधे आम परिवारों पर पड़ता है।
उन्होंने आशंका जताई कि आने वाले समय में महंगाई और बढ़ सकती है। बघेल ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक रोजमर्रा की जरूरतों की बढ़ती कीमतें लोगों का बजट बिगाड़ रही हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सरकार महंगाई रोकने में असफल है। उन्होंने कहा कि राहत देने के बजाय लोगों को सलाह दी जा रही है। बघेल ने मांग की कि सरकार जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर ध्यान दे।
आयुष्मान योजना के तहत अस्पतालों पर हो रही कार्रवाई पर भी बघेलने सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि यदि अस्पतालों में गड़बड़ी हो रही थी तो सरकार पहले क्या कर रही थी। उनका कहना था कि इतनी देर बाद कार्रवाई होना सरकार की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाता है।
बघेल ने कहा कि संबंधित विभागों को समय रहते कार्रवाई करनी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के कई लोग अपने विभागों के काम पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहे हैं।
अपने बयान में उन्होंने जमीन से जुड़े मामलों और निजी विवादों का भी जिक्र किया। इन आरोपों के जरिए उन्होंने सरकार के कामकाज पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि मंत्रियों और अधिकारियों को अपने विभाग की जिम्मेदारी प्राथमिकता से निभानी चाहिए।
नगर निगम में अधिकारियों और महापौर के बीच चल रहे विवाद पर भी भूपेश बघेल ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था से जोड़कर देखा। बघेल ने तंज करते हुए कहा कि यही सरकार का सुशासन है।
उन्होंने सवाल किया कि अधिकारियों में इतना साहस कैसे आया। बघेल ने दावा किया कि राजनीतिक नेतृत्व की कमजोरी के कारण ऐसी स्थितियां बनती हैं। उनके मुताबिक प्रशासनिक व्यवस्था तभी मजबूत होती है जब जवाबदेही साफ हो।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच टकराव का असर शहर के कामकाज पर पड़ता है। इसलिए ऐसे विवादों का समाधान जल्दी होना चाहिए।
महानदी जल विवाद पर होने वाली बैठक को लेकर भी बघेल ने सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने को कहा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को छत्तीसगढ़ के हित में फैसला कराने की कोशिश करनी चाहिए।
बघेल के मुताबिक महानदी से जुड़े कई प्रोजेक्ट लंबे समय से प्रभावित हैं। जल विवाद के कारण भविष्य की योजनाओं पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य के जल अधिकारों की मजबूती से पैरवी जरूरी है।
उन्होंने गर्मियों में पानी की जरूरत का भी मुद्दा उठाया। बघेल ने कहा कि प्रदेश के कई क्षेत्रों में जल संसाधनों का बेहतर उपयोग जरूरी है। उनके मुताबिक सरकार को बैठक में छत्तीसगढ़ की जरूरतें मजबूती से रखनी चाहिए।
धर्मांतरण के मुद्दे पर भी भूपेश बघेल ने राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने साहू समाज की ओर से जताई जा रही चिंताओं का जिक्र किया। बघेल ने कहा कि केवल गंभीरता जताने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
उन्होंने सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की। बघेल के मुताबिक समाज अपने स्तर पर प्रयास कर रहा है। सरकार को भी स्पष्ट नीति के साथ कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने तंज करते हुए कहा कि सरकार के कदम बहुत धीमे हैं। बघेल ने दावा किया कि अपेक्षित कार्रवाई जमीन पर दिखाई नहीं देती। उन्होंने कहा कि सरकार को सामाजिक चिंताओं पर सिर्फ बयान नहीं देना चाहिए।
भूपेश बघेल का यह बयान कई राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों पर केंद्रित रहा। उन्होंने RDA जमीन विवाद में मंत्री केदार कश्यप को घेरा। महंगाई पर सरकार से जवाब मांगा। आयुष्मान योजना की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए।
नगर निगम विवाद को उन्होंने प्रशासनिक कमजोरी से जोड़ा। महानदी जल विवाद में छत्तीसगढ़ का पक्ष मजबूत रखने की मांग की। धर्मांतरण के मुद्दे पर भी सरकार से ठोस कार्रवाई चाही।
इन बयानों के जरिए बघेल ने भाजपा सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की। दूसरी ओर उनके कई बयान आरोप और राजनीतिक दावे हैं। ऐसे आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
RDA जमीन विवाद पर सवाल
बघेल के मुताबिक उस समय किसी दूसरी महिला के परीक्षा देने का मामला उठा था। उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में पूरा मामला दबा दिया गया। बघेल ने कहा कि पुराने विवाद के बाद अब नया मामला सामने आया है। उन्होंने सवाल किया कि केदार कश्यप से जुड़े विवाद बार-बार क्यों सामने आते हैं।
हालांकि यह पूरा बयान भूपेश बघेल का राजनीतिक आरोप है। खबर में सामने आए आरोपों पर केदार कश्यप या सरकार की प्रतिक्रिया का उल्लेख उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
महंगाई पर सरकार को घेरा
उन्होंने आशंका जताई कि आने वाले समय में महंगाई और बढ़ सकती है। बघेल ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक रोजमर्रा की जरूरतों की बढ़ती कीमतें लोगों का बजट बिगाड़ रही हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सरकार महंगाई रोकने में असफल है। उन्होंने कहा कि राहत देने के बजाय लोगों को सलाह दी जा रही है। बघेल ने मांग की कि सरकार जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर ध्यान दे।
आयुष्मान कार्रवाई पर सवाल
बघेल ने कहा कि संबंधित विभागों को समय रहते कार्रवाई करनी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के कई लोग अपने विभागों के काम पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहे हैं।
अपने बयान में उन्होंने जमीन से जुड़े मामलों और निजी विवादों का भी जिक्र किया। इन आरोपों के जरिए उन्होंने सरकार के कामकाज पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि मंत्रियों और अधिकारियों को अपने विभाग की जिम्मेदारी प्राथमिकता से निभानी चाहिए।
निगम विवाद पर भी तंज
उन्होंने सवाल किया कि अधिकारियों में इतना साहस कैसे आया। बघेल ने दावा किया कि राजनीतिक नेतृत्व की कमजोरी के कारण ऐसी स्थितियां बनती हैं। उनके मुताबिक प्रशासनिक व्यवस्था तभी मजबूत होती है जब जवाबदेही साफ हो।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच टकराव का असर शहर के कामकाज पर पड़ता है। इसलिए ऐसे विवादों का समाधान जल्दी होना चाहिए।
महानदी विवाद पर रखी मांग
बघेल के मुताबिक महानदी से जुड़े कई प्रोजेक्ट लंबे समय से प्रभावित हैं। जल विवाद के कारण भविष्य की योजनाओं पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य के जल अधिकारों की मजबूती से पैरवी जरूरी है।
उन्होंने गर्मियों में पानी की जरूरत का भी मुद्दा उठाया। बघेल ने कहा कि प्रदेश के कई क्षेत्रों में जल संसाधनों का बेहतर उपयोग जरूरी है। उनके मुताबिक सरकार को बैठक में छत्तीसगढ़ की जरूरतें मजबूती से रखनी चाहिए।
धर्मांतरण पर सरकार से सवाल
उन्होंने सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की। बघेल के मुताबिक समाज अपने स्तर पर प्रयास कर रहा है। सरकार को भी स्पष्ट नीति के साथ कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने तंज करते हुए कहा कि सरकार के कदम बहुत धीमे हैं। बघेल ने दावा किया कि अपेक्षित कार्रवाई जमीन पर दिखाई नहीं देती। उन्होंने कहा कि सरकार को सामाजिक चिंताओं पर सिर्फ बयान नहीं देना चाहिए।
कई मुद्दों पर एक साथ हमला
नगर निगम विवाद को उन्होंने प्रशासनिक कमजोरी से जोड़ा। महानदी जल विवाद में छत्तीसगढ़ का पक्ष मजबूत रखने की मांग की। धर्मांतरण के मुद्दे पर भी सरकार से ठोस कार्रवाई चाही।
इन बयानों के जरिए बघेल ने भाजपा सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की। दूसरी ओर उनके कई बयान आरोप और राजनीतिक दावे हैं। ऐसे आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
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