भूपेश सरकार ने नेशनल हेराल्ड को दिया सवा चार करोड़ का विज्ञापन, इसके हिंदी एडीशन संडे नवजीवन को 3 करोड़ का भुगतान
Arun Tiwari | Mar 10, 2026, 15:19 IST
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विधानसभा में नेशनल हेराल्ड को दिए गए विज्ञापनों का मुद्दा उठा। बीजेपी विधायक सुशांत शुक्ला ने सवाल किया कि भूपेश बघेल सरकार ने किस नियम के तहत कांग्रेस से जुड़े अखबार नेशनल हेराल्ड और इसके हिंदी संस्करण संडे नवजीवन को 7 करोड़ से अधिक के विज्ञापन दिए।
Raipur. छत्तीसगढ़ की पिछली भूपेश सरकार ने नेशनल हेराल्ड को 7 करोड़ से ज्यादा विज्ञापन दिया है। इसमें नेशनल हेराल्ड न्यूज पेपर को 4 करोड़ 24 लाख रुपए और इसके हिंदी एडीशन संडे नवजीवन पत्रिका को 3 करोड़ से ज्यादा का भुगतान किया गया।
यह सवाल विधानसभा में गूंजा। बीजेपी विधायक सुशांत शुक्ला ने सवाल उठाया कि आखिर किस नियम के तहत किसी राजनीतिक पार्टी के मुखपत्र को विज्ञापन दिए गए। इसके जवाब में सीएम विष्णुदेव साय ने इसका परीक्षण कराने की बात कही।
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साल 2019-20 - 34 लाख रुपए
साल 2020-21 - 58 लाख रुपए
साल 2021-22 - 68 लाख रुपए
साल 2022-23 - 1.28 करोड़ रुपए
साल 2023-24 - 1.36 करोड़ रुपए
साल 2024-26 में नेशनल हेराल्ड को कोई विज्ञापन नहीं
संडे नवजीवन को इस अवधि में 3 करोड़ 6 लाख रुपए का विज्ञापन मिला।
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बीजेपी विधायक सुशांत शुक्ला ने पूछा कि ये विज्ञापन किस कार्यालय से संचालित होते हैं और कितना भुगतान किया गया। उन्होंने कहा कि क्या सरकार राजनीतिक दलों के मुख पत्रों को विज्ञापन के लिए पैसा दे सकती है और यदि दिया गया है तो क्या कार्यवाही होगी। इस सवाल का जवाब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दिया।
मुख्यमंत्री ने जवाब में बताया कि विज्ञापन 8 लाख रुपए प्रति पृष्ठ के आधार पर 2019 की विज्ञापन नियमावली के अनुसार दिया गया। सीएम ने कहा कि यह उनके समय में होता था हमारे समय में नहीं। यह किसका मुखपत्र है यह पूरा देश जानता है।
विधायक अजय चंद्राकर ने विज्ञापन नीति की जाँच और पारदर्शिता की मांग की। इस पर सीएम ने परीक्षण कराने का ऐलान किया। उन्होंने बताया कि नेशनल हेराल्ड के प्रबंधकर्ता पवन बंसल है।
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यह जवाहरलाल नेहरू द्वारा 1938 में स्थापित एक अंग्रेजी अखबार है। जो बाद में 'एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड' (AJL) द्वारा प्रकाशित किया गया।
यह समाचार पत्र और इसका स्वामित्व (यंग इंडिया लिमिटेड, जो राहुल गांधी और सोनिया गांधी की कंपनी है) एक कानूनी मामले के केंद्र में है। आरोप है कि 50 लाख रुपए देकर ₹2000 करोड़ से अधिक की संपत्ति का अधिग्रहण किया गया, जिसकी जांच ED द्वारा की जा रही है।
ये खबर भी पढ़ें... नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग में सोनिया-राहुल ने कमाए 142 करोड़ रुपए: ED
यह सवाल विधानसभा में गूंजा। बीजेपी विधायक सुशांत शुक्ला ने सवाल उठाया कि आखिर किस नियम के तहत किसी राजनीतिक पार्टी के मुखपत्र को विज्ञापन दिए गए। इसके जवाब में सीएम विष्णुदेव साय ने इसका परीक्षण कराने की बात कही।
ये खबर भी पढ़ें... नेशनल हेराल्ड केस को लेकर रायपुर में कांग्रेस का प्रदर्शन, BJP कार्यालय घेरने निकले, मोदी-शाह के पोस्टर पर पोती कालिख
नेशनल हेराल्ड को इतना भुगतान :
साल 2020-21 - 58 लाख रुपए
साल 2021-22 - 68 लाख रुपए
साल 2022-23 - 1.28 करोड़ रुपए
साल 2023-24 - 1.36 करोड़ रुपए
साल 2024-26 में नेशनल हेराल्ड को कोई विज्ञापन नहीं
संडे नवजीवन को इस अवधि में 3 करोड़ 6 लाख रुपए का विज्ञापन मिला।
ये खबर भी पढ़ें... National Herald case: BJP अध्यक्ष वीडी शर्मा बोले- सोनिया, राहुल कानून से ऊपर नहीं
विधानसभा में हुई बहस :
मुख्यमंत्री ने जवाब में बताया कि विज्ञापन 8 लाख रुपए प्रति पृष्ठ के आधार पर 2019 की विज्ञापन नियमावली के अनुसार दिया गया। सीएम ने कहा कि यह उनके समय में होता था हमारे समय में नहीं। यह किसका मुखपत्र है यह पूरा देश जानता है।
विधायक अजय चंद्राकर ने विज्ञापन नीति की जाँच और पारदर्शिता की मांग की। इस पर सीएम ने परीक्षण कराने का ऐलान किया। उन्होंने बताया कि नेशनल हेराल्ड के प्रबंधकर्ता पवन बंसल है।
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यह है नेशनल हेराल्ड का इतिहास :
यह समाचार पत्र और इसका स्वामित्व (यंग इंडिया लिमिटेड, जो राहुल गांधी और सोनिया गांधी की कंपनी है) एक कानूनी मामले के केंद्र में है। आरोप है कि 50 लाख रुपए देकर ₹2000 करोड़ से अधिक की संपत्ति का अधिग्रहण किया गया, जिसकी जांच ED द्वारा की जा रही है।
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