/sootr/media/media_files/2026/02/26/bijapur-encounter-2-naxalites-killed-kanker-mase-barsa-surrender-2026-02-26-12-01-05.jpg)
Bijapur/Kanker. छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में दो वर्दीधारी माओवादियों को मार गिराया गया। दोनों के शव बरामद कर लिए गए हैं।
मौके से एक SLR, एक इंसास राइफल, 12 बोर राइफल, विस्फोटक सामग्री और दैनिक उपयोग का सामान जब्त किया गया है। एसपी डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए बताया कि यह कार्रवाई जांगला थाना क्षेत्र में की गई।
वहीं कांकेर जिले के छिंदपदर गांव में माओवादी डीवीसीएम मासे बारसा ने एके-47 के साथ पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है।
इंद्रावती के जंगलों में चला ऑपरेशन
जानकारी के मुताबिक जांगला थाना क्षेत्र के इंद्रावती नदी के घने जंगलों में नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। इसके बाद सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम को सर्चिंग अभियान के लिए रवाना किया गया।
जवानों को देखते ही नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षाबलों ने मोर्चा संभाला। मुठभेड़ के बाद इलाके में सघन सर्च ऑपरेशन चलाया गया, जिसमें दो वर्दीधारी माओवादियों के शव बरामद हुए। फिलहाल क्षेत्र में तलाशी अभियान जारी है।
6 फरवरी को बॉर्डर पर 7 नक्सली मारे गए
इससे पहले 6 फरवरी को छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर हुई मुठभेड़ में 7 नक्सली मारे गए थे। इनमें 3 महिला नक्सली शामिल थीं। इस मुठभेड़ में महाराष्ट्र पुलिस के कॉन्स्टेबल दीपक चिन्ना मदावी (38) शहीद हो गए थे, जबकि एक अन्य जवान घायल हुआ था।
घायल जवान को तत्काल एयरलिफ्ट कर भामरागढ़ अस्पताल पहुंचाया गया, जहां ऑपरेशन के दौरान मदावी ने दम तोड़ दिया। सर्चिंग के दौरान सुरक्षाबलों ने विस्फोटक सामग्री और नक्सली साहित्य भी बरामद किया था।
एक साल में 232 नक्सली ढेर
बीजापुर एसपी डॉ. जितेंद्र कुमार यादव के अनुसार:
- वर्ष 2025 में जिले में 163 माओवादी मारे गए।
- वर्ष 2026 में अब तक 11 माओवादी ढेर किए जा चुके हैं।
- जनवरी 2024 से अब तक 232 नक्सली मारे गए।
- 1163 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया।
- 888 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की।
बस्तर में कमजोर पड़ा माओवादी नेटवर्क
बस्तर क्षेत्र में अब करीब 200 आर्म कैडर के नक्सली ही सक्रिय बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ (MMC) जोन पूरी तरह खत्म हो चुका है। उत्तर बस्तर और माड़ डिवीजन में भी संगठन की पकड़ कमजोर पड़ी है।
सूत्रों के अनुसार दक्षिण बस्तर के जंगलों में पापाराव अपने साथियों के साथ छिपा हुआ है, जबकि मिशिर बेसरा झारखंड में सक्रिय बताया जा रहा है।
20 साल बाद महिला डीवीसीएम का सरेंडर
वर्ष 2003 से दंडकारण्य, अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर में सक्रिय रही माओवादी डिविजनल कमेटी मेंबर (डीवीसीएम) मासे बारसा ने हथियार छोड़ दिए हैं। वह एके-47 के साथ जंगल से बाहर आई और कांकेर पहुंचकर एसपी निखिल रखेचा के समक्ष आत्मसमर्पण किया।
/filters:format(webp)/sootr/media/media_files/2026/02/26/women-naxalite-surrender-2026-02-26-11-47-44.jpeg)
सूत्रों के अनुसार संगठन में डीवीसीएम पद अहम जिम्मेदारी माना जाता है। दो दशक तक सक्रिय रहने के बाद उसका आत्मसमर्पण सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि नारायणपुर के पत्रकार रोशन ठाकुर ने इस आत्मसमर्पण प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संवाद और भरोसे की पहल के बाद मासे बारसा सुरक्षित रूप से कांकेर पहुंची।
बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी और एसपी निखिल रखेचा ने अन्य माओवादियों से भी हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की है। शासन की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वालों को आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और पुनर्वास सुविधा देने की बात कही गई है।
डीवीसीएम स्तर की महिला कैडर का सरेंडर बस्तर में माओवादी संगठन के कमजोर होते ढांचे का संकेत माना जा रहा है। अब देखना होगा कि क्या अन्य सक्रिय सदस्य भी हथियार छोड़ेंगे।
ये खबरें भी पढ़ें...
Bijapur Naxal Encounter: 22 जवानों की शहादत का मास्टरमाइंड उधम सिंह ढेर, 12 नक्सलियों ने डाले हथियार
Naxal Surrender: दंतेवाड़ा में सबसे बड़ी सफलता,एकसाथ 71 नक्सलियों ने किया सरेंडर
CG Naxal News: बीजापुर और गढ़चिरौली में सुरक्षा बलों का बड़ा ऑपरेशन,4 नक्सलियों को मार गिराया
/sootr/media/agency_attachments/dJb27ZM6lvzNPboAXq48.png)
Follow Us