आदिवासियों की रिहाई की मांग, विधायक विक्रम मंडावी ने सीएम साय को लिखा पत्र
Umeshwari Baghel | Jul 01, 2026, 16:15 IST
बस्तर के आदिवासियों के लिए मंडावी की बड़ी मांग
बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर जेलों में वर्षों से बंद आदिवासियों के मामलों की समीक्षा की मांग की है। उनका कहना है कि कई गरीब ग्रामीण कानूनी मदद के अभाव में जेल में हैं।
समझें क्या है पूरा मामला
आदिवासियों के मामलों पर सवाल
उनका कहना है कि कई ग्रामीण वर्षों से जेलों में बंद हैं। उनके खिलाफ नक्सली गतिविधियों से जुड़े मामले दर्ज किए गए थे। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे प्रभावी कानूनी सहायता नहीं ले सके। कम शिक्षा और कानूनी प्रक्रिया की जानकारी न होना भी उनके लिए बड़ी परेशानी बना।
विधायक के अनुसार उचित पैरवी नहीं मिलने से कई मामलों में सुनवाई लंबी चली। इससे संबंधित परिवारों को भी सामाजिक और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने ऐसे सभी मामलों की निष्पक्ष समीक्षा की जरूरत बताई है।
मुख्यमंत्री को भेजा पत्र
मंडावी ने कहा कि सरकार हथियार छोड़ने वाले नक्सलियों को पुनर्वास का अवसर दे रही है। आत्मसमर्पण नीति के माध्यम से उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसी आधार पर जेलों में बंद आदिवासी ग्रामीणों के मामलों पर भी संवेदनशीलता से विचार होना चाहिए।
उन्होंने मांग की है कि जिन मामलों में ठोस साक्ष्य नहीं हैं, उनकी दोबारा जांच कराई जाए। ऐसे ग्रामीणों की पहचान भी होनी चाहिए, जिनकी गिरफ्तारी संदेह या परिस्थितिजन्य आधार पर हुई थी। विधायक ने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय कानूनी प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर लिया जाना चाहिए।
उच्चस्तरीय समिति की मांग
मंडावी का कहना है कि समीक्षा प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध होनी चाहिए। जिन लोगों के खिलाफ पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं, उन्हें कानून के अनुसार राहत दी जानी चाहिए। उन्होंने निर्दोष पाए जाने वाले आदिवासियों की शीघ्र रिहाई सुनिश्चित करने की भी मांग की है।
परिवारों को राहत की उम्मीद
मंडावी के मुताबिक निर्दोष लोगों की रिहाई से सरकार के प्रति विश्वास मजबूत होगा। इससे बस्तर में शांति और सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग गांव लौटकर अपने परिवारों के साथ सामान्य जीवन शुरू कर सकेंगे।
सरकार के जवाब का इंतजार
यह मामला कानूनी प्रक्रिया के साथ मानवीय दृष्टिकोण से भी जुड़ा है। निष्पक्ष समीक्षा से वास्तविक दोषियों और निर्दोष ग्रामीणों के मामलों में अंतर स्पष्ट हो सकता है। इससे लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है।
महत्वपूर्ण तथ्य
उन्होंने जेलों में बंद आदिवासियों के मामलों की समीक्षा मांगी।
कई आदिवासी वर्षों से नक्सली मामलों में जेल में हैं।
विधायक ने कानूनी सहायता की कमी का मुद्दा उठाया।
गरीब और कम शिक्षित ग्रामीण अपना पक्ष नहीं रख पाए।
सरकार से उच्चस्तरीय समिति बनाने की मांग की गई।
ठोस सबूत नहीं होने वाले मामलों की जांच मांगी गई।
निर्दोष पाए गए आदिवासियों की जल्द रिहाई की अपील की गई।
मंडावी ने इसे मानवीय और न्याय से जुड़ा मुद्दा बताया।
सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।
FAQ
- विधायक विक्रम मंडावी ने मुख्यमंत्री से क्या मांग की है?
उन्होंने जेलों में बंद आदिवासियों के मामलों की समीक्षा और निर्दोष लोगों की रिहाई की मांग की है। - आदिवासियों की रिहाई के लिए क्या प्रस्ताव दिया गया है?
विधायक ने मामलों की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने का आग्रह किया है। - विधायक ने इस मुद्दे को क्यों उठाया है?
उनका कहना है कि कई गरीब आदिवासी कानूनी मदद के अभाव में वर्षों से जेल में बंद हैं।
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