छत्तीसगढ़ में बिजली का महासंकट : उत्पादन सिर्फ 2900 MW और मांग 7200 MW, अब राजस्थान से मदद की तैयारी
Aishwarya Dwivedi | May 22, 2026, 16:41 IST
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छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी, AC, कूलर और EV चार्जिंग के चलते बिजली की पीक डिमांड 7,100 MW के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जिससे दुर्ग-भिलाई सहित कई इलाकों में भारी लोड और कटौती का संकट गहरा गया है।
छत्तीसगढ़ में इस बार मई की भीषण गर्मी न सिर्फ इंसानों की परीक्षा ले रही है, बल्कि राज्य के पावर इंफ्रास्ट्रक्चर को भी कड़े इम्तिहान से गुजरना पड़ रहा है। चिलचिलाती धूप, उमस और 42 डिग्री के पार जाते पारे के बीच राज्य में बिजली की मांग ने इतिहास के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। प्रदेश में बिजली की पीक डिमांड 7,100 मेगावाट (MW) के अभूतपूर्व और ऐतिहासिक स्तर को पार कर गई है।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, यह उछाल केवल मौसम का मिजाज नहीं है, बल्कि बदलती लाइफस्टाइल, तेजी से होते शहरीकरण और सड़कों पर दौड़ते इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की रफ्तार का नतीजा है। इतना ही नहीं छत्तीसगढ़ में बिजली उत्पादन सिर्फ 2,900 MW है, जबकि खपत 7,200 MW पार कर गई है। इस भारी अंतर को खत्म करने के लिए सरकार महंगे दामों पर बिजली खरीद रही है। अब इस संकट से निपटने के लिए बिजली कंपनी जल्द ही राजस्थान से बिजली खरीदने का प्रस्ताव देगी।
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बिजली विभाग के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। अकेले दुर्ग-भिलाई क्षेत्र की बात करें, तो जनवरी के महीने में जो बिजली लोड महज 270 मेगावाट था, वह मई आते-आते बढ़कर 410 मेगावाट तक पहुंच गया। मात्र चार महीनों के भीतर बिजली की खपत में लगभग 45 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पूरे राज्य की बात करें तो पिछले साल के मुकाबले इस साल मांग में 500 से 1,000 मेगावाट का इजाफा हुआ है।
दिन हो या रात, हर घर में लगातार चल रहे एयर कंडीशनर (AC) और कूलरों ने ग्रिड को चौबीसों घंटे तनाव में रखा है। केवल घरेलू ही नहीं, बल्कि फैक्ट्रियों, दफ्तरों और बाजारों में बढ़ रहे कूलिंग लोड ने इस संकट को और गहरा कर दिया है।
इस बार बिजली संकट के पीछे एक नया और बड़ा कारण बनकर उभरा है—इलेक्ट्रिक वाहन (EV)। अधिकारियों के मुताबिक, एक इलेक्ट्रिक कार को चार्ज करने में लगभग 5 से 7 किलोवॉट बिजली की जरूरत होती है।
विशेषज्ञों का गणित: एक ईवी कार चार्ज होने में उतनी बिजली सोख लेती है, जितनी बिजली में चार एयर कंडीशनर (AC) पूरे दिन चल सकते हैं।
चूंकि अधिकांश लोग रात के वक्त अपनी गाड़ियां चार्जिंग पर लगाते हैं, इसलिए रात के समय बिजली का लोड अचानक 'पिक' कर जाता है। रायपुर समेत कई शहरों में फास्ट चार्जिंग स्टेशन खुल रहे हैं। हालांकि, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) ने उपभोक्ताओं को 'माइनस मीटरिंग' के जरिए घरेलू कनेक्शन से ही गाड़ी चार्ज करने की सुविधा दी है, लेकिन पब्लिक स्टेशनों पर ₹18 प्रति यूनिट की दर अब उपभोक्ताओं की जेब पर भी भारी पड़ने लगी है।
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सिस्टम पर दबाव इस कदर है कि पुराने ट्रांसफार्मर और सीमित क्षमता वाले नेटवर्क हांफने लगे हैं। हाल ही में जब तापमान 42.6 डिग्री सेल्सियस था, तब 44 किमी/घंटे की रफ्तार से चली तेज आंधी ने कोढ़ में खाज का काम किया। आंधी और ओवरलोडिंग के कारण ढाई घंटे तक कई इलाकों की बत्ती गुल रही, जिससे राज्य के करीब 9.5 लाख उपभोक्ता सीधे प्रभावित हुए। दुर्ग-भिलाई के स्थानीय निवासियों और व्यापारियों का आरोप है कि अघोषित कटौती अब रोज की कहानी बन चुकी है, जिससे छात्रों और छोटे कारोबारियों का जीना मुहाल हो गया है।
यह संकट सिर्फ रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, रायगढ़ या राजनांदगांव जैसे बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। ग्रामीण इलाकों में भी लाइफस्टाइल बदलने से कूलर और घरेलू उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ा है, साथ ही साथ खेती के लिए सिंचाई पंपों की लगातार बढ़ती निर्भरता ने ग्रामीण फीडरों पर लोड कई गुना बढ़ा दिया है। दुर्ग रीजन के ईडी संजय खंडेलवाल ने भी माना कि ईवी और एसी के कारण खपत में बड़ा इजाफा हुआ है और सिस्टम को अपग्रेड करने का काम युद्ध स्तर पर जारी है।
ऊर्जा विशेषज्ञों ने साफ चेतावनी दी है कि आने वाले सालों में क्लाइमेट चेंज के कारण गर्मियां और लंबी व खूंखार होंगी, वहीं सड़कों पर ईवी वाहनों की संख्या भी दोगुनी-तिगुनी हो जाएगी। ऐसे में केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना नाकाफी होगा। यदि अभी से:
छत्तीसगढ़ में गहराया बिजली संकट ; मांग और उत्पादन के बीच कई मेगावाट का बड़ा अंतर
रायपुर में बिजली संकट होगा दूर; कम जगह में ज्यादा करंट दौड़ाएंगे 'मोनो पोल', टावरों की तुलना में 95% जमीन की बचत
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छत्तीसगढ़ में बिजली संकट, डिमांड 4900 मेगावाट की लेकिन उपलब्धता 4400 मेगावाट, औद्योगिक क्षेत्र में की गई कटौती
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, यह उछाल केवल मौसम का मिजाज नहीं है, बल्कि बदलती लाइफस्टाइल, तेजी से होते शहरीकरण और सड़कों पर दौड़ते इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की रफ्तार का नतीजा है। इतना ही नहीं छत्तीसगढ़ में बिजली उत्पादन सिर्फ 2,900 MW है, जबकि खपत 7,200 MW पार कर गई है। इस भारी अंतर को खत्म करने के लिए सरकार महंगे दामों पर बिजली खरीद रही है। अब इस संकट से निपटने के लिए बिजली कंपनी जल्द ही राजस्थान से बिजली खरीदने का प्रस्ताव देगी।
4 महीने में 45% उछाल
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बिजली विभाग के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। अकेले दुर्ग-भिलाई क्षेत्र की बात करें, तो जनवरी के महीने में जो बिजली लोड महज 270 मेगावाट था, वह मई आते-आते बढ़कर 410 मेगावाट तक पहुंच गया। मात्र चार महीनों के भीतर बिजली की खपत में लगभग 45 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पूरे राज्य की बात करें तो पिछले साल के मुकाबले इस साल मांग में 500 से 1,000 मेगावाट का इजाफा हुआ है।
दिन हो या रात, हर घर में लगातार चल रहे एयर कंडीशनर (AC) और कूलरों ने ग्रिड को चौबीसों घंटे तनाव में रखा है। केवल घरेलू ही नहीं, बल्कि फैक्ट्रियों, दफ्तरों और बाजारों में बढ़ रहे कूलिंग लोड ने इस संकट को और गहरा कर दिया है।
EV चार्जिंग: बिजली खपत का नया साइलेंट विलन
विशेषज्ञों का गणित: एक ईवी कार चार्ज होने में उतनी बिजली सोख लेती है, जितनी बिजली में चार एयर कंडीशनर (AC) पूरे दिन चल सकते हैं।
चूंकि अधिकांश लोग रात के वक्त अपनी गाड़ियां चार्जिंग पर लगाते हैं, इसलिए रात के समय बिजली का लोड अचानक 'पिक' कर जाता है। रायपुर समेत कई शहरों में फास्ट चार्जिंग स्टेशन खुल रहे हैं। हालांकि, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) ने उपभोक्ताओं को 'माइनस मीटरिंग' के जरिए घरेलू कनेक्शन से ही गाड़ी चार्ज करने की सुविधा दी है, लेकिन पब्लिक स्टेशनों पर ₹18 प्रति यूनिट की दर अब उपभोक्ताओं की जेब पर भी भारी पड़ने लगी है।
आंधी और ओवरलोड का डबल अटैक
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सिस्टम पर दबाव इस कदर है कि पुराने ट्रांसफार्मर और सीमित क्षमता वाले नेटवर्क हांफने लगे हैं। हाल ही में जब तापमान 42.6 डिग्री सेल्सियस था, तब 44 किमी/घंटे की रफ्तार से चली तेज आंधी ने कोढ़ में खाज का काम किया। आंधी और ओवरलोडिंग के कारण ढाई घंटे तक कई इलाकों की बत्ती गुल रही, जिससे राज्य के करीब 9.5 लाख उपभोक्ता सीधे प्रभावित हुए। दुर्ग-भिलाई के स्थानीय निवासियों और व्यापारियों का आरोप है कि अघोषित कटौती अब रोज की कहानी बन चुकी है, जिससे छात्रों और छोटे कारोबारियों का जीना मुहाल हो गया है।
केवल शहर नहीं, गांवों में भी बढ़ा पावर का प्रेशर
विशेषज्ञों की चेतावनी : भविष्य में मचेगा हाहाकार'
- ट्रांसफार्मरों की क्षमता नहीं बढ़ाई गई,
- केबल नेटवर्क को अपग्रेड नहीं किया गया,
- और ईवी चार्जिंग के लिए अलग से इंफ्रास्ट्रक्चर (स्मार्ट ग्रिड) तैयार नहीं किया गया...
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