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बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक संगठित गिरोह के झांसे में आकर एक परिवार पूरी तरह तबाह हो गया। तखतपुर क्षेत्र के ग्राम चनडोंगरी में रहने वाली उर्वशी श्रीवास के पति पुरुषोत्तम की मौत लकवा से हो गई थी।
जालसाजों ने उसकी मौत की वजह सांप काटने से बताकर सरकारी मुआवजा हड़प लिया। जब फर्जीवाड़ा खुला और पुलिस ने उर्वशी को गिरफ्तार किया, तो यह सदमा उर्वशी का बेटा कमलेश सहन नहीं कर पाया और उसने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी।
क्या है पूरा मामला
इस घिनौने खेल की शुरुआत तब हुई जब पति की मौत के बाद एक वकील ने उर्वशी से संपर्क किया। उसने आपदा प्रबंधन की ओर से मिलने वाले चार लाख रुपए के मुआवजे का लालच दिया। वकील ने भरोसा दिलाया कि वह कागजों में मौत का कारण सांप का काटना दिखा देगा।
इसके लिए फर्जी दस्तावेज और फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार की गई। सरकारी खजाने से चार लाख रुपए निकल भी गए, लेकिन उर्वशी के हाथ लगे सिर्फ 50 हजार रुपए। बाकी की मोटी रकम बिचौलिए और गिरोह के सदस्य डकार गए।
कलेक्टर की जांच में खुली पोल
बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने जब मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार, थाना प्रभारी और डॉक्टर की तीन सदस्यीय टीम बनाई, तो परतें खुलने लगीं। जांच में पता चला कि मुआवजा प्रकरण में तहसीलदार के फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे।
चौंकाने वाली बात यह है कि विधायक सुशांत शुक्ला ने खुलासा किया कि, नागलोक कहे जाने वाले जशपुर में सांप काटने से सिर्फ 96 मौतें हुईं, जबकि बिलासपुर में यह आंकड़ा 527 तक पहुंच गया, जिसके लिए 17 करोड़ का मुआवजा बांटा गया। इसी से बिलासपुर में सक्रिय इस बड़े गिरोह का अंदेशा गहरा गया है।
ससुर-साले के बयान से खुली पोल
जांच दल जब उर्वशी के मायके पहुंची, तो वहां के बयानों ने सबको चौंका दिया। मृतक पुरुषोत्तम के ससुर और साले ने बताया कि उसे सांप ने मौत से तीन महीने पहले काटा था, जिसके बाद उसे लकवा मार गया था। उसकी मृत्यु घर पर ही स्वाभाविक हुई थी और शव का पोस्टमार्टम तक नहीं कराया गया था। यानी गिरोह ने बिना पीएम के ही फर्जी रिपोर्ट तैयार करवा ली थी।
पुलिस की रडार पर वकील
अब तखतपुर पुलिस ने उर्वशी के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की कई धाराओं (420, 467, 468, 471, 34) के तहत मामला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया है। लेकिन बड़ा सवाल उन असली मगरमच्छों पर है जो अब भी बाहर हैं। पुलिस अब उस गिरोह की तलाश में है जिसमें वकील, राजस्व विभाग के कर्मचारी और पोस्टमार्टम टीम के वे सदस्य शामिल हैं, जिन्होंने फर्जी हस्ताक्षर और मुहर का इस्तेमाल कर शासन को करोड़ों की चपत लगाई है।
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