बोधघाट बांध परियोजना : बस्तर में सर्वे शुरू, 56 गांवों पर विस्थापन का खतरा बढ़ा
Aishwarya Dwivedi | May 28, 2026, 13:40 IST
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बस्तर में दशकों से लंबित 30 हजार करोड़ की बोधघाट परियोजना का सर्वे दोबारा शुरू हो गया है, जिससे 56 गांवों के विस्थापन और घने जंगलों के डूबने के खतरे के कारण स्थानीय आदिवासियों में कड़ा विरोध है।
NEWS IN SHORT
परियोजना से 56 आदिवासी गांव डूब क्षेत्र में आ जाएंगे।
बांध के कारण 5,700 हेक्टेयर घना जंगल जलमग्न होगा।
बिना सहमति और पुनर्वास योजना के काम शुरू करने का विरोध।
परियोजना से बस्तर के चार जिलों में सिंचाई सुविधा मिलेगी।
NEWS IN DETAIL
हालाँकि, इस फैसले ने स्थानीय आदिवासी समुदायों और पर्यावरणविदों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। बिना किसी ठोस पुनर्वास योजना (Rehabilitation Plan) और जानकारी के शुरू हुए इस सर्वे से बस्तर के गांवों में विस्थापन और अनिश्चितता का डर फैल गया है।
परियोजना का इतिहास और नया खाका
रिपोर्ट तैयार करने की लागत 34.91 करोड़ है, जबकि पूरे प्रोजेक्ट की कुल लागत लगभग 30 हजार करोड़ रूपए आंकी गई है। कंसल्टेंट को DPR पूरा करने के लिए 31 दिसंबर, 2027 तक का समय मिला है। बांध की नदी तल से ऊंचाई 67 मीटर और जलभराव का स्तर 452 मीटर होगा। इसकी जल भंडारण क्षमता 2,727 मिलियन क्यूबिक मीटर और शुरुआती पनबिजली क्षमता 125 मेगावाट (जिसे 300 मेगावाट तक बढ़ाया जा सकता है) होगी।
Project History and New Blueprint
विस्थापन और पर्यावरण का बड़ा संकट
स्थानीय आदिवासियों का कड़ा विरोध
ग्रामीणों का आरोप है कि इस साल मार्च में तेलंगाना की एक टीम 'भारत सरकार' लिखी गाड़ियों में सड़क और बाढ़ नियंत्रण के काम का बहाना बनाकर गुपचुप तरीके से सर्वे करने आई थी, जिसे विरोध के बाद वापस लौटना पड़ा। वहीं, छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के संयोजक आलोक शुक्ला ने चेतावनी दी है कि यह क्षेत्र संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत आता है, इसलिए बिना ग्राम सभाओं की सहमति के कोई भी काम आगे बढ़ाना अवैध है और यह विकास नहीं बल्कि तबाही लाएगा।
प्रशासन का पक्ष
TIMELINE
- 1979: परियोजना की पहली बार परिकल्पना की गई।
- 1984: विश्व बैंक द्वारा परियोजना के लिए कर्ज मंजूर हुआ।
- 1987: आदिवासी विरोध और पर्यावरण नुकसान के कारण प्रोजेक्ट रुका।
- 2020: नए सिरे से संशोधित DPR का खाका तैयार हुआ।
- मार्च 2026: बाहरी टीम द्वारा गुपचुप सर्वे का प्रयास, ग्रामीणों ने खदेड़ा।
- मई 2026 (वर्तमान): आधिकारिक सर्वे शुरू, 7-8 महीने में पूरा करने का लक्ष्य।
- दिसंबर 2027: कंसल्टेंट द्वारा अंतिम DPR सौंपने की आखिरी समयसीमा।
निष्कर्ष
FAQ
- बोधघाट परियोजना क्या है और यह किस नदी पर बन रही है?
यह छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग की एक प्रमुख बहुउद्देशीय (Multipurpose) परियोजना है, जिसे इंद्रावती नदी पर बनाने की योजना है। इसका उद्देश्य बस्तर क्षेत्र में सिंचाई, पेयजल और पनबिजली (Hydroelectricity) का उत्पादन करना है। - . इस परियोजना की अनुमानित लागत और क्षमता क्या है?
कुल लागत: लगभग ₹30,000 करोड़। बिजली उत्पादन: शुरुआती क्षमता 125 मेगावाट, जिसे 300 मेगावाट तक बढ़ाया जा सकता है। सिंचाई क्षमता: इंद्रावती बेसिन के 4 जिलों के 236 गांवों की 3.78 लाख हेक्टेयर भूमि। - यह परियोजना इतने सालों (1987 से) क्यों रुकी हुई थी?
1979 में शुरू हुई इस परियोजना को 1984 में विश्व बैंक से कर्ज मिला था। लेकिन आदिवासियों के उग्र आंदोलन, जंगलों की कटाई और विस्थापन के बड़े संकट को देखते हुए 1987 में इसे पूरी तरह रोक दिया गया था। अब 2020 की नई रिपोर्ट (DPR) के आधार पर इसे दोबारा शुरू किया जा रहा है।
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