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NEWS IN SHORT :
- छत्तीसगढ़ं के बॉर्डर में ओडिशा सरकार की घुसपैठ
- सरकारी स्कूलों में छत्तीसगढ़ी की जगह ओरिया की पढ़ाई
- एकल शिक्षक वाले स्कूलों पर विशेष फोकस
- महासमुंद, रायगढ़, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में चल रहा खेल
- अधिकारियों के अनजान होने का दावा
NEWS IN DETAIL :
छत्तीसगढ़ के बॉर्डर एरिया में ओडिशा सरकार एक बौद्धिक खेल खेल रही। स्कूल में शिक्षकों की कमी का फायदा उठा पहले वहां शिक्षकों की घुसपैठ करवाई जा रही। उसके बाद स्कूलों में छग के बच्चों में ओडिया की शिक्षा दी जा रही।
जबकि छत्तीसगढ़ सरकार की तरफ से ऐसा कोई कोर्स ही स्वीकृत नहीं है। महासमुंद, रायगढ़, सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ऐसे 150 से ज्यादा स्कूल हैं जहां ऐसा चल रहा है। हद तो यह है कि किसी भी अधिकारी को इसकी जानकारी भी नहंी है।
किस तरह से चल रहा खेल
यह खेल पिछले कई सालों से चल रहा है। इसके लिए ओडिशा सरकार ने बाकायदा ओरिया शिक्षकों की नियुक्ति भी की है। उन्हें महीने का साढ़े 4 हजार रुपए मानदेय के रुप दिया जाता है।
बरमकेला के एक स्कूल की ओरिया शिक्षिका ने बताया कि उनकी नियुक्ति ओडिशा सरकार के द्वारा की गई है। जिसके लिए उन्हें महीने साढ़े चार हजार रुपए मिलता है। हालांकि यह पैसा पिछले डेढ़ साल से नहंी आया है।
किस तरह स्कूलों में घुसे शिक्षक
वैसे तो छग के तीन जिलों में 150 से ज्यादा शासकीय स्कूलों मे ओडिया क्लास चल रही है। लेकिन अधिकतर एकल शिक्षक वाले हैं। आड़िसा सरकार ने पहले एकल शिक्षक वाले स्कूलों पर फोकस किया।
जिसमें पहले दोपहर 2 बजे के बाद क्लास लगाने का तय हुआ। लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण अब ओडिशा सरकार के शिक्षक दिनभर स्कूलों में रहते हैं। स्कूल के दौरान ही ओरिया की भी क्लास लगा लेते हैं।
क्या कहता है नियम
छग के राज्य के शासकीय स्कूलों में पढ़ाई जाने वाले विषयों की मान्यता छग शासन ही देती है। यहां तक की निजी स्कूलों में भी स्कूलों के पाठ्यक्रम सहित किताबे छग सरकार की तरफ से मुहैया करवाई जाती है।
छत्तीसगढ़ सरकार ने सरकारी स्कूलों में 5वीं तक बच्चों को स्थानीय भाषा और बोली में पढ़ाई करने का ऑप्शन दिया था। जिनमें धुर्वा भतरी, संबलपुरी, दोरली, कुडुख, सादरी, बैगानी, हल्बी, दंतेवाड़ा गोड़ी, कमारी, सरगुजिया और भुंजिया बोलिया थीं।
इन बोलियों में पुस्तकें स्कूलों मे तैयार करवाकर भेज दिी गई हैं। इसके अलावा छत्तीसगढ़ी, अंग्रेजी और हिन्दी में भी बच्चों के लिए पठन सामग्री स्कूलों को उपलब्ध कराई है।
क्या दिया जाता है तर्क
स्कूलों में उड़िया पढ़ाने के पीछे का तर्क दिया जाता है कि अगर इन क्षेत्रों के लोग किसी काम के लिए ओडिशा गए तो वहां इन्हें भाषाई परेशानी नहीं होगी। जबकि इलाज, शिक्षा या व्यापार के लिहाज से ओडिशा के लोग छग आते हैं।
एनजीओ के सहारे खेल
छग में ओरिया भाषा सिखाने का खेल ओडिशा सरकार एक एनजीओ के सहारे खेल रही। शिक्षकों की नियुक्ति भुवनेश्वर के उत्कल समिलनी द्वारा की गई है।
हालांकि छग सरकार के अधिकारी इस मामले मे खुद को अनजान बता रहे हैं। लेकिन सवाल यही उठता है कि जिले मे डीईओ के अलावा बीईओ, संकुल समन्वयक सहित स्कूलों में प्रधानपाठक होते हैं। उन्हें इस बात की जानकारी कैसे नहीं है।
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